" राजू ! कल तुम एक 'अंतरतम प्रसंग' लघु रूप में लिख कर लाना ठीक "
राजू : -- मास्टर जी ! अंतरतम प्रसंग किसे कहते हैं ?
" अंतरतम प्रसंग.....हाँ, सुनो : -- हमारी एक भोजाई है उनके पिताजी बड़े पहुंचे हुवे महात्मा हैं । बड़े एवं पहुंचे हुवे इस लिए कि उन्होंने बड़ी बड़ी शल्य क्रियाएँ असफल कर दीं माने की बड़े बड़े आपरेसन फेल कर दिय़े । और इनके इस फेलवर आपरेसन से जो फूल सी मूंगफली हुई उसे खाने के लिए उसके साइज के हमारे सारे काजू तैयार बैठे थे । किन्तु वह बोली मैं दो छिलके वाली( डबल स्टेटस) तुम बिना छिलके वाले( स्टेटस लैस) छि छि तुम्हारे पेट में कौन जाएगा"
राजू : -- फिर का हुवा.....मास्टर जी !
" फिर का होना है वो चली गई एक छिलके वाले बादाम के साथ"
राजू : -- मास्टर जी ! अंतरतम प्रसंग किसे कहते हैं ?
" अंतरतम प्रसंग.....हाँ, सुनो : -- हमारी एक भोजाई है उनके पिताजी बड़े पहुंचे हुवे महात्मा हैं । बड़े एवं पहुंचे हुवे इस लिए कि उन्होंने बड़ी बड़ी शल्य क्रियाएँ असफल कर दीं माने की बड़े बड़े आपरेसन फेल कर दिय़े । और इनके इस फेलवर आपरेसन से जो फूल सी मूंगफली हुई उसे खाने के लिए उसके साइज के हमारे सारे काजू तैयार बैठे थे । किन्तु वह बोली मैं दो छिलके वाली( डबल स्टेटस) तुम बिना छिलके वाले( स्टेटस लैस) छि छि तुम्हारे पेट में कौन जाएगा"
राजू : -- फिर का हुवा.....मास्टर जी !
" फिर का होना है वो चली गई एक छिलके वाले बादाम के साथ"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें