मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

----- मिनिस्टर राजू 118 -----

" राजू ! कल तुम एक 'अंतरतम प्रसंग' लघु रूप में लिख कर लाना ठीक "

राजू : -- मास्टर जी ! अंतरतम प्रसंग किसे कहते हैं ?

" अंतरतम प्रसंग.....हाँ, सुनो : -- हमारी एक भोजाई है उनके पिताजी बड़े पहुंचे हुवे महात्मा हैं । बड़े एवं पहुंचे हुवे इस लिए कि उन्होंने बड़ी बड़ी शल्य क्रियाएँ असफल कर दीं माने की बड़े बड़े आपरेसन फेल कर दिय़े । और इनके इस फेलवर आपरेसन से जो फूल सी मूंगफली हुई उसे खाने के लिए उसके साइज के हमारे सारे काजू तैयार बैठे थे । किन्तु वह बोली मैं दो छिलके वाली( डबल स्टेटस) तुम बिना छिलके वाले( स्टेटस लैस)  छि छि तुम्हारे पेट में कौन जाएगा"

राजू : -- फिर का हुवा.....मास्टर जी !

" फिर का होना है वो चली गई एक छिलके वाले बादाम के साथ"

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