मंगलवार, 31 जुलाई 2012

MINISTER RAAJU 12

राजू : -  मास्टर जी ! मास्टर जी !! आपसे  एक वचन कहना था..


           एक वचन क्यों तुम बहु वचन कहो..

राजू :   मास्टर जी,  मुझे जानने वाले ये कहने लगे हैं..,
                             मुझमें मास्टर जी का भूत रहता है.....

           तूम .....तूम.....बुद्धू,शनि, मंगल,शुक्र, अरुण, वरुण, राहू, केतु जो कोई भी हो
           तत्काल बहिर्गमन करो..... अर्थात कक्षा से बाहर जाकर खड़े होव..,

राजू :   मास्टर जी किन्तु बाहर जा कर में क्या बनूंगा..


          भास बनो चमको, बांग दो, या मंडराओ कुछ भी करो..,

राजू :   जी मास्टर जी !!.....: ( : (

रविवार, 29 जुलाई 2012

----- || MINISTER RAAJU 11 || -----

            " ऱाजु  तुम्हें 'हमारा भारत' शीर्षक के अंतर्गत निबंध लिख कर लाने को कहा था
              लिख लाये..??

 राजू : -- जी मास्टर जी किन्तु निबंध अपूर्ण है क्योंकि एक शंका का समाधान चाहिए था..!!

            " कैसी शंका..??"

राजू :     मास्टर जी हमारी सरकार में ' दादा ' पति बन गए 'पापी' पापा बन गए अब पुन:
            दादा कौन बनेगा..??

            "राजू ! राजू !! हमारे देश में जिसके बेटा और बहू होते है वो दादा बनते हैं
            जिसकी बेटी तथा जमाई होते हैं वो दादा थोढ़ी न बनते हैं वो तो नाना
            बनते हैं.."

राजू : -- समाधान हो गया मास्टर जी..!!

बुधवार, 25 जुलाई 2012

----- || MINISTER RAAJU 9 || -----

राजू : -- मास्टर जी हमारे संविधान में राष्ट्रपति की व्यवस्था है
             हम राष्ट्रपिता  को सम्मानित  करते है किन्तु माता व
             पत्नी का सम्मान क्यूँ  नहीं करते..??


            " राजू हमारे संविधान में स्त्रीवाचक शब्दों का प्रयोग वर्जित है.."

राजू : -- मास्टर जी हमारे वेद पुराणों में तो भारत को माता के रूप में
             संबोधित करने की परम्परा है एवं कहा गया है: --
                     " यत्र नारीयस्त पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता"

   
            " राजू ! राजू !! राजू !!! ये आधुनिक  संविधान  है यहाँ 'संसद' में
              अपनी माता तुल्य स्त्रियों को 'परकटी' जैसे बहुत सारे अपशब्दों
              से सम्मानित व  करतल  ध्वनी से  अभिवादन  किया जाता है
              ऐसे 'लोगों' को  उच्च  पद  व  उच्च  आवास  में  निवास  करने             
              हेतु पुरस्कृत किया जाता है.."


राजू : -- "किन्तु मास्टर जी ऐसे कृत्य तो दंडनीय होने चाहिए..??"


            " राजू यदि ऐसा कृत्य  दंडनीय होता तो स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने
               वर्षों पश्चात भी पुरुष अपनी माता स्वरूप कन्याओं से बलात्कार
               जैसा जघन्य कृत्य क्यूँ करते....."


             "       

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 10 -----

राजू : -- " मास्टर जी, मास्टर जी मेरे दोस्त कहते हैं की अब मैं बड़ा हो गया हूँ.."

            " राजू!! बड़े होने से कुछ नहीं होता पैर पे खड़े होना पड़ता है वैसे तू इतना
              भी बड़ा नहीं हुवा है
                                 ये बता तुझे घोड़े पर बैठना है की घोड़ी पर..??"
   
राजू : -- मास्टर जी ....वो....वो.... मैं.... आप...हम....


           "हमम्म्म्म .....अभी बैढेगा तो गिर जाएगा....." 

----- MINISTER RAAJU 8 -----

राजू : -- " मास्टर जी, मास्टर जी मुझे भी घोड़े पर बैठना है.."

            " तू यदि घोड़े पर बैढेगा तो धक्का कौन मारेगा..??"


राजू : -- " मास्टर जी घोड़े को भी धक्का मारना पढ़ता है..??"

             " राजू !! तेरे इन्हीं उलटी पुलती प्रश्नोत्तरी के कारण तुझे गधा कहते है....."

बुधवार, 18 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 7 -----

राजू : -- " मास्टर जी 'गधा-घोड़ा' वाले अध्याय में गधा व घोड़ा ज्ञात नहीं हुवा,
               किंचित  विस्तारपूर्वक स्पष्ट करते हुवे समझाइये न.." 

              " इस अध्याय का यह उपखंड कठीन है रहने दे तेरे सिर के
                ऊपर से जाएगा.."
                अर्थात : --
                                  " अगर अपना कहा तुम आप ही समझे तो क्या समझे..,
                                    मजा कहने का जब है एक कहे और दूसरा समझे..,
                                    कलामे मीर समझें और ज़बाने मिर्जा समझें..,
                                    मगर इनका कहा यह आप समझें या खुदा समझें....."
                                                                    ----- किसी ने कहा था -----

राजू  : -- " समझ गया मास्टर जी.....!!"
                                    

रविवार, 15 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 6 -----

" राजू, आज तुम विचलित क्यों हो.."

राजू : -- "मास्टर जी मेरे नाना-नानी  के कारण.."

" उन्हें क्या हुवा.."

राजू : -- " कह रहे थे कि बहु चाब रही है.."
              मास्टर जी मैने भी बोल दिया बही यदि मँहगी बेचोगे तो
              बहु काटेगी और चाबेगी....."



शनिवार, 14 जुलाई 2012

" बाँध-बाँध बनी बाँधनी बानि बंधे बान..,
  बूंद-बूंद बदी बदरिया बेध बेध बिधान....."

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU -----

" राजू कल पढ़ने क्यों नहीं आए..??"

राजू : -- " मास्टर जी कल मेरी मामी शादी थी..!! "

" किसके साथ..?? "

राजू : -- " मास्टर जी मामी की शादी मामा के साथ ही होगी ना..!! "

" हम्म्म तुम्हारे मामा कुछ ज्यादा ही नमकीन है नई..!! "

----- || AAVAPAN || -----


  आड़ा-आड़ा आँढ ओढ़नी ओढ-ओढ आँट ।।  
  गाढ़ा-गाढ़ा गाडव  गाढ  गोट-गोट गाँढ ।।


  
  ओस-ओस औषसी आहाँ आस-आस आस्तार  ।
  आशु-आशु   आषाढ़ी  आश   आश्रय  आसार  ।।

रविवार, 1 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU -----

" राजू तुम्हे एक कविता याद करने को कहा था
  चलो सुनाओ..!!


राजू : -- मास्टर जी " बुंदेलों हरबोलों से हमने सुनी कहानी थी..,
                             खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी.."


" हो गया बाकी कल सुनाना ये बताओ तुम इतने उदास क्यों हो..??"


राजू : -- " मेरे दोस्त के कारण..!!"


" क्यूँ क्या हुवा..??

राजू : -- मास्टर जी " छमछम करती आई छमछम करती चली गई..,
                             'वो' सिन्दुर लिए खड़ा रहा 'वो0000' राखी बाँध के चली गई.."


" धत् तेरा सत्यानाश हो तू भी गधा तेरा दोस्त भी गधा....."

----- || PAPAA || -----

" पल्लव पल्लव पिप्पल पुल पुलिन पाताल..,
  पात-पात पातरी पोत-पोत पाल....."

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...