मंगलवार, 25 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 73 -----

राजू : -- मास्टर !जी  यदि जनता जनार्दन है तो इसकी रुक्मणी
            एवं सत्यभामा कौन हैं..??

" नारायण.....नारायण......सत्यभामा, रुकमनी का तो पता
  नहीं किन्तु में तो नारद मुनी हूँ..... 

सोमवार, 24 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 72 -----

राजू : --  मास्टर जी ! सूना है की हमार देस मा अतिथि आ रहें हैं

             " काहे आ रहे हैं "

राजू : -- मास्टर जी ! देस के झगड़ा का 'मजा' लेने..,

            " राजू ! देस हो के या बिदेस जन साधारण का एक अतिथि आचरण होता है
               उ देस, काल, परिस्थिति देखकर ही अतिथि बनते हैं जब किसी घर मा झगडा हो
                तो वहां नहीं जाते, कितु इ नेता मंत्री के जाते बुरी है इ तो अउर उचक उचक के
                उ घर मा जाते हैं तभी तो जनता इन्हें अपशब्द कहती है
   
राजू : -- मास्टर जी ! अब आ तो गए...... का करें..,

            " घुमाओ, फिराओ तनिक मिनोरंजन करवाओ अउर का "

राजू : -- मास्टर जी ! कैसे करवाएं......'मिनोरंजन'


             " काहे उ परसों' सरसों रतिया में अउर प्रभात काल में 'लघु चित्र '
                बनाए रहीं न.......उही दिखाओ.... का नाम रही उ चित्र के......
                हाँ "मोर मैया के अचरा"

राजू : -- किन्तु मास्टर जी ! अतिथि उ बिचित्र 'लघु-चित्र' के न तो भास समझेंगे न भासा
            न भासन..,

          " हाँ तो उ पुराना वाला 'लघु-चित्र' दिखाओ का नाम है....
            हाँ सरदार मेक मोहन 'खान' इ तो मूक हैं न वैसे भी अतिथि रसिया
            के हैं.......इ तो खुदई रसिया हैं इनको तो देख के ही मिनोरंजन हो
            जाता है.....




     

----- मिनिस्टर राजू 71 -----

             "ए राजू !"

राजू : --   का मास्टर जी !

           " इ हमार देस का मंत्री मंडल है.....की बिटिया के बाबुल की बस्ती है
             देस के जित्ते भी दरोगा हैं सब इन्हीं की सुरक्षा में तो लगे हैं
             तिसपर भी इ मंत्रिगन अउर राष्ट्रपति की बिटियाएँ कहती हैं
             हमका तो इस देस मा भय लगता है जी ! जब बाबुल के अंगना
             के अँजोर से इत्ता ही भय लगता है तो बिदा काहे नहीं कर देते..,

राजू : -- अउर मास्टर जी ! उ देखो इ बस्ती के चौकीदार.....'बेटवा के मैया' 
            उ भी कुंवारा बेटवा के मैया......उ कहते हैं हमका तो भय ही नहीं
            लगता जी ! अब सारी सेना सीमा को छोड़ इन की सुरक्षा करे तो
            भय काहे को लगेगा.....एक बारी इनको 'बाँध'कर देखिये
            फिर तो हम भी देखंगे की बछुवा भयभीत होते हैं के नाही.....    

शनिवार, 22 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 70 -----

राजू : -- ऐ मास्टर जी !

" हाँ, सुन रहा हूँ बोलो..,"

राजू : -- आप तो कहे रहीं की लोगन मन की भीड़ जुड़ाओ,
            जूड़ तो गई अब भी उ देखत,सुनत बोलत नाहीं हैं ..,

" हमने  केतना लोगन के भीड़ जोड़न को कहा..??

राजू : -- मास्टर जी ! लाख-पचास..,

" हाँ उहाँ जूड़ी कितनी..,
                        
राजू : -- दस-बीस हजार, ऐ मास्टर जी !

             हमरे 'राऊ' भी बड़े ही बिचित्र हैं
             अरु 'राऊ' रउधानी अपवित्र है
              इक मंत्री को कहत हैं : --
              तुम रतियन महुँ नगरिया जाओ
              चौंक डगरिया घूम के आओ
              तनि सीत  ऋतु के सोर लई के आओ
              अब आप ही बताओ
              एक तो पुरुस के गात तिसपर मंत्री जात
              अब कौनु का तो उसका 'लूटेगा' का उसको 'पिटेगा'
              थोथे चने  हैं बाजे घने हैं
              पहले से ही 'लुटे-पिटे' हैं तभी तो मंत्री बने हैं.....
   


             




बुधवार, 19 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 69 -----

राजू : -- मास्टर जी ! जदि भारत मा उ 'अंग्रेज टाइप' फिर से कोई आ जावें
              तो का होगा..??

" राजू ! होगा का उ 'अंग्रेज टाइप' भारत के संबिधान को दुई टुक करेंगे
             और जन साधारण के हाथ मा धरा कर कहेंगे इ लो तुम्हारा 'संबिधान'..,

राजू : -- मास्टर जी । फिर का होगा..??,


" राजू ! फिर का होना है उ नेता-मंत्री लोगन को और उ बढ़ महान उद्योगपति
            लोगन को बिसेस राकेट मा बाँध-जोर के छोड़ आवेंगे
            'मून के रंगून मा' और कहेंगे देखो चंदरमा मा मानव जाति के प्रभाव..,

राजू : -- मास्टर जी ! फिर का होगा..??,

" राजू ! फिर का होना है पूछेंगे........उ हवा से.......तुमको वहां से का दिखाई देत है
  तो उ कहेंगे हम से का पूछत हो....... इ हमार पूँछ से पूछो.....पूंछ उलट हवा से ही कहेंगे
  अब काहे अंधवा हो गए.....काहे नाहीं कहते की तुमको तुम्हारे भाई के ताजमहल दिखाई
  देत है और भाई को हवा का महल..,

राजू :-- मास्टर जी ! और उ हाथी -चूहा का, का होगा..??

"वही......जो बहादुर साह जफ़र का हुवा था...... लिखते फिरेंगे

              चंद अल्फाजों की मूहर है जर्रे महताब पर 
               जहाँ से जमीं देखूं मुझको जन्नत लगे है 



 

शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 68 -----

"राजू ! का कर रहे हो..,"

राजू :-- मास्टर जी ! रामलीला के मंचन का 'जुगाड़'

" काहे कर रहे हो..,"

राजू :-- मास्टर जी ! काहे की उ बिना लाख पचास हजार लोगन की भीड़
             देखे न तो कछु बोल बतियाते  हैं ना ही कछु बताते हैं.....

गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 67 -----

राजू : -- मास्टर जी !

" हूँ..,"

राजू : -- मास्टर जी !

" हाँ सुन रहा हूँ बोलो न..,"

राजू : -- मास्टर जी ! इसी लिए तो उ नाही बोलते जे कभी कभार
             बोल भी दीए तो आप लोगन का खेलना सुरू हो जाता है
             जे सबेरे 'बिलाग-बिलाग' ते सांझन में 'बिक्रम-बेताल'..... 

बुधवार, 12 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 66 -----

" राजू ! तनिक इ बताओ तोहार गुरुजी कौन हैं..,"

राजू :-- मास्टर जी ! 'आप'

" अच्छा ! अच्छा है ! अच्छा है !! बड़ी.....शीघ्रता पूर्वक उत्तर दिया.....
   तनिक ए भी बताओ तोहार 'माम' का गुरजी कौन है..??

राजू : --  कल 'माम' से पूछने ही वाला था कि हमार 'दादी आ गईं'
              और 'बोल पड़ी' कहने लगी रे बछुआ ! तोहार 'अब्बू' कहा जा के ठेका
              खाएं भए तनिक अच्छी जगह ठेका खाते तो दुइ चार परमानु बम
              नहीं लाते दहेज मा , मास्टर जी ! हम भी कह दिए रहे उसमें से
              एक तिहार मूढ़ मा फोड़ देबेंगे, अब इ 'दादी' जावेंगी तो हम पूछ
               के बतावेंगे की हमार 'माम' के गुरजी कौन भए,

" लगे हाथ इ भी पूछ लियो के उन्हें हमार देस के डाक्टर में बॉस काहे
   आत है 'उकील' अउ ओके बछुआ माँ तो बहुंत सुगंध आत है..... 

मंगलवार, 11 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 65 -----

राजू : -- मास्टर जी ! इ सरदार मेक मोहन 'खान' मा  न तो 'अरदास-अजान'
             होत है और ना ही 'पूजन-पिरेयर, अब इस उम्र में बचा ही का है .....
             ढाँचा ही तो हैं..... गिरा काहे नहीं देते..,
           

           " राजू    ----
                                वो लहू कोई और था वो रवानी कुछ और थी..,
                                जाँ-निसार वतन पे नौजवानी कुछ और थी..,
                                वो जिस्म दफन ख़ाक में रूहें थी कुछ अलहदा..,
                                सुलगती हुई जान की शम्मे-दानी कोई और थी..,
                               
                                उ का हैं धान के खोखरी भूसी हैं भूसी, इ तो एके
                                'फूंक' में बाबर की मजिद से सीधे  'मोती' की मजिद
                                में बाँग देते दिखबे करेंगे..... सीधे प्रसारण स्वरूप....."

रविवार, 9 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----

                 

              विद्यमान समस्त चुनावी दल एवं उनके धरता, संचालन करता, स्वामी
              मत के दान हेतु सुपात्र हैं?? -------  नहीं हैं..,
              ( सुपात्र = धर्माधिकारी,सदाचारी, मर्यादित, पुरुषोत्तम, सत्यवादी, नीतिकुशल,
                सद्चरित्र, सरलहृदय, विनम्र आदि आदि.....)


              इन्हीं के विचारों का अनुसरण करने तथा इनके ही आदेशों का पालन करने वाले
              इनके प्रत्याशी सुपात्र होंगे?? ------ नहीं होंगे..,


              क्या कभी कोई निर्दलीय प्रत्याशी सुपात्र  हुवा----- नहीं,  वो भी इन्हीं के जैसा हो गया..,

             विगत उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में यदि मतदाता सोचते समझते तो इन दलों
             एवं इनके प्रत्याशियों के कभी भी अपना बहुमूल्य मत नहीं देते..,
             क्या गुजरात के मतदाता सोचेंगे..?? समझेंगे..?? और अपना अमूल्य मत इन
             भ्रष्टाचारियों को नहीं देंगे.....??  

शनिवार, 8 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू ६४ -----


" राजू ! क्या देख रहे हो ?? "

राजू : -- मास्टर जी ! 'झंडा'

 " झंडे में क्या देख रहे हो..??"

राजू : -- मास्टर जी ! 'चरखा'

" चरखे में क्या देख रहे हो..??"

राजू : -- मास्टर जी ! 'माल'

" माल में क्या देख रहे हो..??"

राजू : -- मास्टर जी ! 'जगत भोजाई'

" मुझको भी दिखाओ ना..??"

राजू : -- मास्टर जी । काली माया हो तभी माल एवं माल
             कि भोजाई दिखती है आपको नहीं दिखेगी वो आपके
             पास है नहीं

----- मिनिस्टर जी -----


                                 स्वतंत्रता प्राप्ति के काल से विद्यमान दिवस तक 'राजनीति'
                                 ने लोकतंत्र को इतना विकृत कर दिया कि वर्त्तमान समय 
                                 में ' नेता-मंत्री' भ्रष्टाचारियों के नाम क छुपाती है एवं 
                                 सद आचारियों के नाम लेते लजाती है.....

----- MINISTAR RAAJU 63 -----

राजू : -- मास्टर जी ! इ नेता-मंत्री लोगन 'नेहरू कट शेरवानी' मार के
             गज गज भर लम्बी जीभ से अघनवा में भी बरसाती मेंढकु के
             जइसे टर-टर करते रहते हैं की हमार लोकतंत्रवा में  कोन्हू
             भी दल भीत में कोई नेक, ईमानदार, सदाचारी, सच्चा, मर्यादित,
             पुरुषोत्तम,सीधा,गुनी आदि आदि नेता मंत्री नई हें का जदी हें
             तो सीधे सीधे उस नेक, ईमानदार के नाम बताते क्यूँ नहीं??
             नाम बता के उसको राष्ट्रपति प्रधान मंत्री बनाते क्यूँ नहीं..??

            " बनाया तो है वो देखो सरदार मेक मोहन 'खान' और  वो देखो  
              बग्गी वाले उरी 'बाबा'..,


राजू : -- मास्टर जी ! ये बग्गी वाले 'उरी' बाबा की कहानी फिर सही
              ये जो सरदार मेक मोहन 'खान' उर्फ़ पगड़ी, घंटी आदि आदि
              वाले बाबा हैं, इनको मान देय तो डेढ़ दो लाख रुपया प्रति महीना
              ,मिलता है पगढ़ी ये नित नए दिन पचास-पचास हजार की
               पहनते हैं इनके परिधान को तो मास्टर जी । पूछो ही मत
               हर दुसरे दिन रात्री-दिवस के भोज समारोह में राजसी भोग
               के चटखारे ले के अन्न के कण को तरसते अपने मत दाता
               को कहते हैं 'मैं पुरुषोत्तम हूँ'  अस्सी साल की जरा अवस्था
               में विदेश में अपने जन्म दिन पर गुलछर्रे उड़ाकर गांधी जी
               की समाधि पर फूल चडाते कहते हैं की मैं तो देश भक्त हूँ
               मास्टरजी ! सदाचार  की क्या यही परिभाषा है??

           
               " राजू ! राजू !! राजू !!! यह तो दृष्टिकोण का अंतर मात्र है
                 अब देखो न 51-51 लाख रूपए यूहीं मंदिरों में दान पर
                 उड़ाने वाल व्यक्ति को 5-10 लाख में गाना बेचने वाला
                 बेचारा व  निर्धन तो लगेगा ही अब इसके पश्चात 'भारत-रत्न'
                  की क्या आवश्यकता है, है कि नहीं.....वैसे ही सबको सरदार
                 'खान' भी सदाचारी दिखते हैं,










शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----

सत्ताधारीयों ने भ्रष्टाचार की भूमि से काले धन की उपज उगाहने के लिए
चुनाव आयोग जैसे कई बैइलवा को पाल रखा है भाई जीत्ति बड़ी डोली
( खेतिहर भूमि )होगी  ढोर-डांगर  भी तो  उत्ते ही चाहिए, है की नहीं..... 

गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----


                                भारतीय संविधान में 'मत' को 'दान' स्वरूप स्वीकार करते हुवे इसे
                                नागरिकों के अधिकार श्रेणी में समाहित किया है । 'दान' का शाब्दिक
                                अर्थ है धर्म हेतु या दयावश किसी को कोई वस्तु प्रदान की क्रिया जो
                                 एक ऐच्छिक प्रक्रिया है..,

                                 विगत वर्षों में हमारे नेता-मंत्रियों ने, चुनाव आयोग  एवं सूचना व
                                 प्रसारण माध्यमों ने मतदाताओं के मस्तिष्क  में  मतदान (जो कि
                                 अधिकार रूप में है ) को कर्त्तव्य स्वरूप में  स्थापित  कर दिया, इस
                                  स्थापना की नींव को हिलाने की प्रक्रिया की समय साधना उतनी
                                  ही होगी जितनी की इसके स्थापन में साध्य थी व है..,


                                   नेता-मंत्रियों की इस स्थापना के प्रति आसक्ति सत्ता सेंधने व
                                   साधने हेतु है यह सर्वथा ज्ञात है..,


                                    चुनाव आयोग ऐसा दोमुखी पशु है जो सत्ता धारियों के लिए तो
                                    'बैल' है, दो चाँदी के डंडे मारे नहीं के जिधर हँकाओ उधर ही हाँक
                                    जाता है, मतदाता के लिए यह काली भैंस है जिसके आगे कित्ता
                                     भी बिन बजाओ ये सुनती ही नहीं..,

                                     बचा हमारा सूचना व प्रसारण  माध्यम जिए  'आम' भाषा में
                                     'मीडिया' कहते है बिना विज्ञापन के यहाँ कोई भी चित्र उपलब्ध 
                                      नहीं है फिर ये नेता-मंत्रियों का व चुनाव आयोग की 'निशुल्क सेवा'
                                      क्यूँकर करते है?? प्रश्न विचारणीय है.....
                              



                             







मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 62 -----

" राजू ! तुमने इतना अच्छा मुस्कराना कहाँ से सीखा..??"

राजू :-- मास्टर जी ! मीरा बाई के भजन सुनकर..,

" तुम्हारा साल तो बहुंत अच्छा है कहाँ से लिया..,"

राजू :-- पिछले साल मेरे पिता जी के साले ने अर्थात मेरे मामा जी ने दिया था
             मास्टर जी ! लगता है आप काला पानी जाए बिना नहीं मानेंगे..,

" राजू ! ऐसे प्रधान मंत्री एवं प्रधान मंत्री पद के ऐसे ऐसे प्रत्यासी को 'देखने'
  से तो अच्छा है कि मैं  कालापानी चला जाऊं.....  

शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 61 -----

" राजू !माना कि तुम्हारे पास 10 रूपए हैं, यदि 'सरकार' उसमें से
   2 रूपए ले ले तो इसे क्या कहेंगे..??


राजू : -- मास्टर जी !! आर्थिक सुधार अर्थात 'लूट की छूट'..!!

" इन्ही 2 रूपए में से 1 रूपए अपनी 'जेब' में रखे और 1 रूपए कुछ समय
  बाद तुम्हें वापस कर दे तो उसे क्या कहेंगे..??

राजू : -- मास्टर जी !! राजनीति अर्थात 'धंधा'.....  

शनिवार, 24 नवंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 60 -----

राजू : -- मास्टर जी ! कल आपण इर 'भारत सरकार' पर टिका टिपण्णी की
             आपको भय नहीं लगा..??

            " राजू ! भय तो बहुंत लगा में रात भर सो ही नहीं पाया
              आहट सी भी कोई होती तो ऐसा लगता था की दरोगा ही हैं,
              कोई परछाई भी लहराती तो ऐसा लगता की थानेदार ही हैं
              कोई द्वार खटखटाता तो ऐसा लगता स्वयं सरकार ही हैं
              राजू ! रात का सन्नाटा मैं 'वो' 'वो' और मैं और उसके छोटे-
              छोटे, छोटे-छोटे, छोटे-छोटे......

राजू : -- मास्टर जी ! छोटे- छोटे क्या..??

              "कार्यक्रम"

राजू : -- ओह! तो ऐसा बोलो न की दूरदर्शन था.....
             मास्टर जी ! जब दूरदर्शन ही था तो सन्नाटा किधर से हुवा..??

            " मुर्ख मैने उसे निस्वर अर्थात म्यूट कर रखा था..'


राजू : -- मैं भी परसों 'मल ग्रहण मिशन' के दर्शन पश्चात आज सुबह रामायण
             व महाभारत के जैसे  'जल ग्रहण मिशन' की बाट जोह रहा था
             वैसे भी आपमें और जल वाले गुरु जी में अंतर ही कितना है लटक
             आप जाइए, सबेरे पहले दूरदर्शन पर सरकार घंटियाँ गुरु जी की
             बजवा देगी..,

            " राजू  ! तू इतनी बुद्धि आम औरत की पार्टी बनाने में लगाता तो कब का प्रधान
              मंत्री बन गया होता..,

राजू : --  मास्टर जी ! आप उसके नियंत्रण यन्त्र अर्थात रिमोट कंट्रोल.....







  

बुधवार, 21 नवंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 59 -----

राजू !  'बिहान बहिर भए साँझ बहुरे'  को क्या कहते हैं..??

राजू :-- मास्टर जी ! 'भूला"

 और " बिहान बहिर बहु बरस बहुरे "  को क्या कहते हैं..??

राजू : -- मास्टर जी !  "भटका" अथवा "भारत सरकार"

और " बिहान बहिर भए कभु न बहुरे " को क्या कहतें हैं..??

राजू : --  इसे भूतकाल काल में 'अंग्रेज' व वर्त्तमान काल में भी 'अंग्रेज' ही कहते हैं............
              मास्टर जी ! आपने अपने 'प्रभु' का जो प्राण प्रतिष्ठान कर के रखा है
              वहां इन राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, सांसद, विधायक तथा
              तथाकथित नेताओं की प्रतिस्थापना कर पूजन आरम्भ कर दीजिये
              अन्यथा ये आपका सांस लेना भी कठिन कर देंगे.... और "भारत सरकार"
              की इस  " अमरीकागिरी "  पर तो टिका टिप्पणी तो बिलकुल मत कीजिये
              वरना आपका तो कालापानी से ही सीधा प्रसारण होगा, वहां फिरते पूछते रहिएगा
              " भूले एवं भटके में क्या अंतर है..?? "

            " हाँ राजू मैने तो किसी को भी नहीं मारा है फिर भी मुझे "भारत सरकार" के इस
            " चुपके-छुपके " से डर लगने लगा है, कौन जाने कल सुबह में कौन सी
               रंग बिरंगी रस्सी से लटकता मिलूं..,

राजू : -- मास्टर जी ! डर तो मुझे भी एक 'शेर टाइप ' से लगता है
              आए बरस दर पर खडा रहता है,  कहता है 'मत' दे..... मत दे.....मतदे

" अब की बारी आए तो उसे कहना तू अपने नाख़ून और दांत उखाड़ के आ.."

राजू : -- मास्टर जी ! वो फिर भी आ गया तो..??

" फिर वो तेरा क्या बिगाड़ लेगा एक डंडा मार के भगा देना.....
  वैसे भी पिंजरे के शिकार के शिकारी शेर थोड़ी न होते हैं.....गीदड़ होते हैं.....






शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 58 -----

राजू : -- बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी । कहत साधु महिमा सकुचानी ।।
              सो मो सन कहि जात न कैसे । साक बनिक मनि गुण गन जैसे ।।रा. च. मा. /बा. का. /दो. न. 2चौ. न.6
                   
                   मास्टर जी ! उक्त चौपाई का ससंदर्भ प्रसंगपूर्ण अर्थांकन कीजिए न..,

              " ये चौपाई लिखी किसने है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! गोस्वामी तुलसी दास ने..,


             " तो उन्ही से पूछो वो ही तुम्हें अच्छे से बताएंगे, तुम मुझे ये बताओ
                कल तुम पुन: माल में क्या कर रहे थे.."

राजू : -- मास्टर जी ! 'जगत भौजाई' को ढूंड रहा था..,


           " मिली..??'

राजू : -- मिली तो किन्तु उतनी आकर्षक नहीं लग रही थी
             मास्टर जी ! ये कौन से क्षेत्र से आती हैं..??


           " कुरुक्षेत्र से....." 

  

रविवार, 4 नवंबर 2012

----- मास्टर राजू 57 -----

"राजू ! क्या पढ़ रहे हो..??"

राजू : -- मास्टर जी एक 'धार्मिक' पुस्तक पढ़ रहा हूँ !

" क्या नाम हैं पुस्तक का..??"

राजू : -- पा.....पा.....(ई).....की पप्पियाँ.....मास्टर जी ! आप भी पढेंगे..??

" मैनें तो इसे कल ही पढ़ लिया था..,

राजू : -- मास्टर जी ! तनिक ये तो बताइये इनके 'प्रभु' सैय्या  में सोते ही रहेंगें  की
              उठेगें  भी..??

" राजू ! ये सबके बैंड बजवा के ही उठते हैं.....


शुक्रवार, 2 नवंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 56 -----

राजू : -- उपबरहन बर बरनि न जाहीं । स्त्रग सुगंध मनिमंदिर माहीं ।।
             रतनदीप सुठि चारु चँदोवा । कहत न बनइ जान जेहिं जोवा  ।।बा.का. दो. 355 चौ.2

                  मास्टर जी ! तुलसी दास द्वारा रचित इस चौपाई का अर्थ कृपया विस्तार पूर्वक
              एवं सरल शब्दों में समझाइये न !!

            मैं अर्थशास्त्र का अध्यापक थोड़े ही हूँ, ये अर्थशास्त्र के अध्यापक से पूछो
            वो ही अच्छे से समझायेंगे..,


राजू : -- मास्टर जी ! वो क्या समझायेंगे जब उनसे पूछा गया की दाना-पानी
              इतना महँगा क्यूँ है तो उनके पास शब्द ही नहीं थे..,


  " इसके लिए शब्दों की क्या आवश्यकता है महँगा है तो छोड़ दो..,


राजू : -- मास्टर जी ! क्या छोड़ें खाना-पीना.....या.....पीना-खाना..??


  " महंगा क्या हुवा है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! दाना-पानी !!


" हाँ तो छोड़ोगे क्या..??"

राजू : -- खाना-पीना, मास्टर जी आप मास्टर कैसे बने..??

" फोटू देखकर..,"

राजू : -- अच्छा ! फोटू देखकर भी मास्टर बनते हैं..,

" हाँ ! हमारे देश में तो बनते हैं, ये बता तू महा मिनिस्टर कैसे बना..??'

राजू : -- मास्टर जी ! मरे हुवे रावण पर तीर चलाती फोटू दिखाकर.."
           
 






              

सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 55 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! आपके पास नापने वाला फीता तो होगा न..??


" हाँ ! हाँ !! राजू है..... ये रहा..,"

राजू : -- मास्टर जी ! इतना बड़ा नहीं लाल किले को थोड़ी न नापना है
             छोटा, छोटा वाला है..,

" हाँ ! हाँ !! राजू छोटा भी है.....ये लो....."


राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! चाँदनी चौंक को भी नहीं नापना है
              और छोटा चाहिए..,

" राजू ! ये बोलो न की 'चाँद' को नापना है.....ये लो छोटा वाला..,"


राजू : -- हाँ ! मास्टर जी ! ये ठीक है.....










रविवार, 28 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 54 -----

राजू : -- " को प्रभु सँग मोहि चितबनिहारा । सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा ।।" अ.का.दो.न.66चौ.4
               मास्टर जी ! तुलसी दास रचित इस चौपाई का अर्थ समझाइये न..,


          " प्रभु के साथ मेरी ओर देखनेवाला कौन है ! जैसे सिंह की स्त्री को खरगोश
             और सियार नहीं देख सकते ।"


राजू : मास्टर जी ! 'अर्थात'!!


 " अर्थात सीता जी कहती हैं जंगल में तुम्हारे जैसे शेर के होते हुवे मुझे कौन
    देख लेगा शेरनी को शेर ही देखेगा, राजू -- सीताराम को ये नहीं पता था कि
    जंगल में दस सिर वाला एक और शेर रहता है जो देखेगा भी और उठा के
    भी ले जाएगा, यदि माया के पीछे भागोगे तो सीता को कोई न कोई तो
    देखेगा ही न..,
                राजू ! राजू !! में तुम्हे पढ़ा रहूँ तुम इधर उधर क्या देख रहे हो..??


राजू : -- मास्टर जी ! आपके नए विद्यार्थी..... !! जाइए जाइए.....उन्हें भी नापीये.....
                    

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 53 -----

" क्यों राजू यदि पैर गरम, पेट नरम,सिर ठंडा तो..??


राजू : -- मास्टर जी ! तो डाक्टरों को मारो डंडा..... किन्तु 
             धीरे से पिछली बारी के P.M., C.M. को मारा था 
             बेचारे आज तक व्हीलचेयर पर हैं.....
             अरे हाँ ! मास्टर जी ! उसके पश्चात आप कहाँ थे?
             थे कहाँ  आप " कुम्भकर्ण की लघु कथा" कहीं के
             न तो बहु के ना ही बही के.....

" राजू ! में अब क्या बनूंगा..??"


राजू : -- मास्टर जी ! आप तो मास्टर ही रहिये 'मत' के दातार मत
             बनिए अन्यथा मुर्ख ही बनेंगे, फिर  इधर उधर  आपरेशन
             करते  फिरेंगें, ये   घोटाले  बाज है  वो  घपला  कर  रहा है
             हमारी न्यायालायें भी बैठी हैं इनकी  रक्षा  हेतु  संजीवनी
             देने के लिए.....
           



             

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 52 -----

राजू : -- मास्टर जी ! हम हर वर्ष रावण को मारते हैं ये रावण मरता क्यों नहीं..??

" ये तो केवल पटाखे छोड़ कर रावण-मरण का मायावी प्रदर्शन है
  रावण के हाथ ही रावण कैसे मरेगा..??

राजू : -- अर्थात..??

"पिछली बारी देखा था न..... देखो.....गौर से.....दूरदर्शन पर.....पुन: प्रसारण.....!!


राजू : -- मास्टर जी ! ज्यादा मत देखो-दिखाओ कहीं
             हमारे मंत्री गणों को शर्म न आने लागे..... 

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी ! -----

" हमारे पुर्व वित्तमंत्री जी माता के चरण पकढ़े बेढे हैं
  उनके भवन में माता का दिया सब कुछ है, माता
  इस बारी उन्हें थोड़ी सी बुद्धि दे दे....." 

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----

" हमारे देश के कर्णधार जहां चढ़ते-चढ़ते अपनी अपनी विधान सभा एवं संसदीय
  रेखा के ऊपर चढ़ गए , वहीँ मतदाता उतरते-उतरते निर्धन रेखा के निचे आ गए
  इससे पहले की मतदाता और निचे उतरें, ये कर्णधार स्वयं ही उतर जाएँ तो ही
  अच्छा है अन्यथा....." 

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----


नेताओं को सभी वस्तुएं या तो निशुल्क या फिर सस्ते में
मिलती  हैं

महँगा-महँगा घर नेता को सस्ते में

महँगी-महँगी भूमि नेता को सस्ते में

महंगे-महंगे कपडे नेता को सस्ते में

महँगी-महँगी गाड़ियां नेता को सस्ते में

भोग-भोजन-भोज नेता को सस्ते में

यहाँ तक 'न्याय भी नेता को ही मिलता है

हमें कुछ नहीं मिलता.....हम मूर्खाधिपति जो हैं
अपना 'मत' भी इन्हीं नेताओं को दे देते हैं.....

----- मिनिस्टर राजू 51 -----

" राजू ! तुम्हे कल लघु कथा लिख कर लाने को कहा था क्यों नहीं लाये..??


राजू : -- मास्टर जी ! में चोटिल हूँ इस लिए..,


"क्यों !! क्या हुवा !!!"


राजू : -- मास्टर जी ! मेरा गाल देखिये कितना सुजा हुवा है..,


" कैसे सुजा..,"


राजू : -- कल किसी बात पर मेरे दोस्तों ने मेरे गाल पर एक थप्पड़ मार दिया,
            तत्पश्चात मेने दूसरा गाल भी आगे कर दिया, फिर तो दस-बीस और
            दे मारे ! कहने लगे बड़ा गांधी बना फिरता है ये बता तेरा वाला नेहरू
            एवं उसके सांप-सपोले कहाँ है, मास्टर जी ! मेरी ये दुर्दशा 'पाकी' के
            कारण हुई है खुद तो चले गए 'नेहरू कट शेरवानी के फैशन' को यहीं
            छोड़ गए.....भुगत मैं रहा हूँ..... 


बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 50 ------

" राजू ! तुम्हारे सगे सबंधी कहाँ रहते हैं..??,"


राजू : -- मास्टर जी ! कुछ महानगर में, कुछ नगर में, कुछ धूर आदिवासी
            क्षेत्र में, कुछ क्षेत्र के पास तथा कुछ सीमा रेखा के आस-पास..!

" अच्छा ! तू कहाँ रहता है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! में उनके पड़ोस में रहता हूँ..,

" अच्छा ! अच्छा !! कल तुम " हमारे कुंभकरण' विषय पर आधारित
  एक लघु कथा लिखकर लाना..!!"

राजू : -- जी ! मास्टर जी !

" ये बताओ यदि एक निकम्मा नाकारा बनिया खाली बैढे क्या करता है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! इधर के बर्तन उधर करता है..,


"वैरी गूड ! हमारी सरकारें भी वोही बनिया है देखो.....दूरदर्शन पर दिख रहीं हैं.....


सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 49 -----

राजू : -- मास्टर जी ! माना कि :--
            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           " में सांख्यिकी का अध्यापक थोड़े ही हूँ साख्यिकी के अध्यापक से पूछो
             वही यह आकलन बताएँगे..,

राजू : -- मास्टर जी ! में यह प्रश्न सीधे "प्रधान" अध्यापक से ही पूछ लेता हूँ

           माना कि : -- आप "प्रधान" अध्यापक हैं..,

            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           मुझे यह ज्ञात था कि आपको सुनाई नहीं देता है..... बधीर हैं.....
           में श्रवण यन्त्र साथ लाया हूँ..... ये लीजिये लग गया.....कान में 

           मुझे यह भी ज्ञात था कि आप मूक नहीं हैं किन्तु "मौन" हैं 
           मैं ध्वनी विस्तारक यन्त्र भी साथ में लाया हूँ.....ये नीचे लग गया.....
           लो...गांधी जी का ऐनक तो लाया ही नहीं बिना ऐनक तो आपको दिखाई नहीं देता 
  
           "प्रधान" अध्यापक जी ! ये सारी वस्तुवें मुझे आपके अंगरक्षक ने उपलब्ध करवाई है 
            कहने लगे ले जाओ, आवश्यकता पड़ेगी

            अब कृपया उपरोक्त आंकलन के सह यह भी ज्ञात कीजिये कि  न्यायालय में 
            अपना पक्ष रखने व न्याय प्राप्त करने  में कितनी अवधि व कीतने पैसे लंगेंगे 

            " बहुत पैसे लगेंगे वो तेरे पास हैं नहीं"

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! ये पैसे लगाने के लिए लगते कहाँ है..??


           " पेड़ पर..."

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! फिर तो में अपना 'मत' पेड़ को ही दूंगा, 
             ऐसी सड़ी हुई व्यवस्था को क्यूँ दूँ जहां मुझे न्यायालय में केवल मात्र 
             प्रस्तुत होने में ही बहुंत पैसे व्यय करने हो.....   



 




गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 48 -----

राजू : -- मास्टर जी ! 'अंतरराष्ट्रीय साला' किसे कहते हैं..??


" दुनिया की सारी महिलायें जिसकी माँ-बहन हों उसे
  'अंतरराष्ट्रीय साला' अर्थात 'जगत साला' कहते हैं....."


राजू : -- मास्टर जी ! .........'वो' भी..??


" हाँ........'वो' भी....."



मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 47 -----

राजू : -- मास्टर जी ! लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल किसे खाते हैं..??


" जब 'राजनेता' दिल्ली में बैठ कर हरियाणा के आंसुओं से गुजरात के मतों
  को तोले तो उसे लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल कहते हैं..!!


राजू : -- मास्टर जी ! कड़क धुप में, धूल धूसरित होकर, भूखी-प्यासी जनता को
           वातानुकूलित लम्बी गाड़ी से उतर कर महंगे महंगे वस्त्र धारी, ऊँचे-ऊँचे
           छाँवदार मंचों पर विराजमान नेता को 'मत' दान करने को कौन कहता है..??


         " चुनाव आयोग..,"


राजू : -- अर्थात, एक भ्रष्टाचारी भोग विलासित लोकतंत्र को मत दान कर सुदृढ करो,
            मास्टर जी ! ये चुनाव आयोग रहता कहाँ है..??


" और अधिक प्रश्न मत कर अन्यथा शासन की आबरू एवं आइब्रो दोनों उतर जायेगी....."


रविवार, 7 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 46 -----

  " राजू ! कल तुम माँल में क्या कर रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! माल देख रहा था..!!


" तुम्हारा माली कहाँ था..वो तुम्हे क्यूँ नहीं देख रहा था..??"


राजू : -- मास्टर जी ! मैं तो माली की वनमाला का एक टूटा
            हुवा फूल हूँ.....कभी इस चरण में.....कभी उस चरण में..,


" तू वनमाली का फुल नहीं उसके वन का टूटा हुवा बाँस है.....,
  कभी इस अधर में.....कभी उस अधर में.....


राजू : -- मास्टर जी ! आप माँल में क्या कर रहे थे..??


" मैं वहां अन्तरराष्ट्रीय साडू को ढूंड रहा था..


राजू : -- मास्टर जी ! मिला..??


" मिला भी.....और मिली भी..,

राजू : -- मास्टर जी ! कौन सी वाली मिली..??

" जगत भोजाई मिली.....".

बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 45 -----

राजू : -- मास्टर जी ! कल मैने देखा एक सरदार महामात्य को देख कर
            शर्मा रहा था..!!


          " अच्छा !! महामात्य को देख सरदार शर्माते भी हैं..??"


 राजू : -- मास्टर जी !! वो सरदार था सरदारनी नहीं था..!!


         " अच्छा ! अच्छा !! तत पश्चात तुमके क्या कहा..??"


राजू : -- मास्टर जी मैने न  उसकी थोड़ी सी शर्म वर्म पोछी एवं
            आपका वाला सुविचार बोल दिया..!!


         " अच्छा ! कौन सा वाला बोला ..??"

राजू : -- मास्टर जी !! वोही वाला "सरदार महामात्य हो सकते हैं
                                    महामात्य सरदार थोड़ी न होता है....."


        

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 44 -----

" राजू ! ये बताओ कि झाँसी वाली रानी लक्ष्मी बाई का जन्म कब हुवा था..??


राजू : -- मास्टर जी ! तब की बारी अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार के पश्चात
            तथा अब की बारी ईस्ट इंडिया कम्पनी के पदार्पण के पूर्व..!!


" अच्छा !! इस बारी बापू का जन्म कब होगा स्वतंत्रता के पूर्व या पश्चात..??"



राजू : - मास्टर जी ! बापू का जन्म यथावत रहेगा किन्तु इस बारी प्रथम
           एवं द्वितीय प्रधानमंत्री का जन्म कल होयेगा..!!
                          मास्टर जी ! कल मे अब की बारी की स्वतंत्रता के 65
           वर्ष पश्चात की पटकथा पर निबंध लिख कर लाउंगा..!!

" कल छूट्टी है परसों लिख कर लाना.....


गुरुवार, 27 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 42 -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये पाक के वजीर फजीर की औलाद को भी मोहब्बत
            करना आता है..??


" हाँ ! आता तो है.."

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे वजीर फजीर की औलाद को तो नहीं आता..??


" नहीं आता तो तू सिखा दे.."


राजू : -- मास्टर जी ! मैं कहाँ मोहब्बत से पैदा हुआ हूँ
           और वो मोहब्बतों का खानदान..कहाँ वो और कहाँ..
           वैसे मास्टर जी ! ये पाक वाली मोहब्बत थोड़ी बड़ी नहीं है..??


          " मेने नापी नहीं है..!!"

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे पास  तो ऐसी बड़ी मोहब्बत को लम्बी करने
            का लम्बा कीर्तिमान है खुदा करे ये भी लम्बी ही हो.....
           

शनिवार, 22 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 41 -----

" राजू ! कल शाम तुम्हारी आबरू कहाँ थी..??"


राजू : -- मास्टर जी ! मेरे वालिद-वालिदान के चमन की हिफाजत कर रही थी..!!


" क्यों कर रही थी..??"


राजू : -- मास्टर जी ! चमने-दरख़्त की शाखों पर रकम रकम के
            समर लटक रहे थे जो आता वही लुट ले जाता..!!


" निगेबाँ रहना अबकी बार खोद कर ही न ले जाएँ..!!"

    बदनजरे-दामन थीं खुद निगाबान की.., 
    शाखे-समरदार थीं मेरे गुलिस्तान की..,
    जहां  आगोशे-जां  खामोश  रही जबां..,
    आबरू लूटती  रही  मेरे  आशियाँ  की.....   

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 40 -----

" राजू ! तूम सीता की रसोई में क्या कर रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! श्री राम एवं उनके मंदिर को ढुंढ रहा था.....



मंगलवार, 18 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 39 -----

   " राजू ! कल तुम्हे उत्तर तैयार कर लाने कहा था कर लाये..??"


राजू : -- जी मास्टर जी ! वो मिनिस्टर पूर्वकाल में पंचों के साथ थे
            इस बारी वो दस्यु के साथ हैं..!!


 " अच्छा ! तू किसके साथ है..??"


राजू : मास्टर जी ! में तो अपनी माता के साथ हूँ..!!


" अच्छा ! अच्छा !! और माता किसके साथ है..??"


राजू : -- वो पिता जी के साथ हैं एवं पिता जी माता के साथ है
            वे दोनों साथ-साथ हैं मास्टर जी ! आप किसके साथ हो..??


 " में गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर के साथ हूँ....."

  

सोमवार, 17 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 38 -----

                                                   "  सुदर्शनम् कमलाकरम् " 


 " राजू !  परसों हिन्दी एवं उसका व्याकरण पढ़ाया था,
   अब इस शीर्षक की कविता के भाव बताओ..??"


  राजू : -- मास्टर जी ! यदि माया रूपी शेषनाग की छाया शीश पर हो
              तो चरणों में लक्ष्मी का वास होता है..!!


 " धन्य हो ! धन्य हो ! महाराज धन्य हो !! भारत में भी न कैसे कैसे गुरु एवं
    उनके शिष्यभी कैसे कैसे  'थे', यथाक्रम कलयुग को तो आना ही था..!!


राजू : -- मास्टर जी ! अभी भी वैसे ही मास्टर एवं वैसे ही उनके मिनिस्टर 'हैं'
            अब की बारी कोयलायुग आया है.....


" कल इस प्रश्न के उत्तर को तैयार कल के लाना कि
  "ये मिनिस्टर सदैव पंचों के साथ क्यूँ रहता है.....??"


शनिवार, 15 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 37 -----

  " राजू ! कल तुम्हे हिन्दी एवं उसका व्याकरण पढ़ाया था, चलो बताओ
    गाधिकुल क्या है..??


 राजू : -- मास्टर जी ! यह एक स्त्रीलिंग शब्द है..!!


 " अच्छा !! तो गांधिकुल क्या है..??"


 राजू : -- मास्टर जी ! यह एक पुर्लिंग शब्द है..!!


" अच्छा ! अच्छा !! तो गधाकुल क्या है..??"


राजू : -- यह उभयलिंग है, मास्टर जी ! मैं क्या हूँ..??


" तू कुछ नहीं है..!!"


राजू : -- मास्टर जी ! यह तो उचित नहीं है, ये प्रश्न मैं अपनी माता से पूछूंगा..!!  

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजा -----

बिवर     अलकालवाल  बिलावर   बिलोकन   बाल ।
बिदक बिदारन बबाल बिल बिल बिलोकन बिडाल ।। 

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 36 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मैंने अपनी माँ से पूछा
             " माँ मेरी शादी वादी विवादी... आदि आदि कब होगी..??"


            " तो क्या कहा तुम्हारी माँ ने..??"


राजू : -- वो बोली तुझ जैसे माँ वादी से कौन शादी करेगा..... 

शनिवार, 8 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 35 -----

राजू : -- मास्टर जी ! माँवादी किसे कहते हैं..??


        " जिनका विवाह विवादी होता है उन्हें माँवादी कहते हैं.."


राजू : -- मास्टर जी ! माँवादी एवं आतंकवादी में क्या अंतर है..??


         " माँवादी के साथ माँ होती है.."

राजू : -- मास्टर जी ! तदनंतर करुण रस आतंकवादी के साथ होना चाहिए..??


         " वो केवल कवियों के साथ होता है,तू कोई अन्य प्रश्न पूछे इससे पहले ये बता
            मास्टर मैं हूँ की तू है..??

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर तो आप ही हो..

          " सनद रहे.."  

शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 34 -----

 " राजू ! कल सार्वजनिक वितरण केंद्र में तुम्हारे साथ जो भद्र महिला थी,
    वो तुम्हारी बुआ थीं..??"


राजू : -- नही वो मेरी माता थी  मास्टर जी !


 " किन्तु उसमें माता वाले लक्षण के दर्शन तो नहीं हो रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! माता वाले लक्षण दर्शाने का सूत्र कौन सा है..??


" राजू ! अभी तुम बालक हो, जब तुम परिणय सुत्र में आबद्ध होगे
  तब यह सूत्र भी ज्ञात हो जाएगा एवं लक्षण भी.."

राजू : -- मास्टर जी ! .....??


" यह प्रश्न तुम्हारी माता से पुछना..... 


मंगलवार, 4 सितंबर 2012

----- ।। मिनिस्टर राजू 33 ।। -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये गव यहीं सिंगरती रहेगी या घास चरने भी जायेगी।।??


             " क्यों तेरे पेट में दर्द क्यूँ हो रहा है ..??"


राजू : -- अब इतने भूषण के पश्चात यह भूसा खाने से तो रही,
             मास्टर जी ! हो गयी आपकी गुड गुड मोर्निंग.....

शनिवार, 1 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजा -----

" कुटिलिक कटक काट कपट बाँध  समुद्र पाल ।
 काटी काटी कै कटखाहक त्रीलोकेश की चाल ।।" 

----- मिनिस्टर राजू 32 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मेरे माता-पिता ने मुझे नई द्वि चक्र वाहिनी दिलवाई है,


             " अच्छा ! कैसी है "

राजू : -- " मास्टर जी ! बिलकुल मेरे मन के जैसी, वो भी केवल हवा में ही तथा
              हवा से ही बातें करती है"

           " राजू !! तू भी किसी संग्राहलय में संग्रहण करने के योग्य है
              तेरी चप्पल एवं सायकल में अंतर करना कठिन है"
           

गुरुवार, 30 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 31 -----

राजू : -- मास्टर जी ! आज मेरे माता-पिता के मध्य झगड़ा हो गया,


             " तुम्हारी माता का क्या नाम है??"


राजू : -- मास्टर जी ! 'मृत्यु'


             "तथा पिता का??"

राजू : -- आशाराम !! मास्टर जी ! दादा का भी नाम बताऊँ??


             "नहीं उस यमराज का नाम पता है"
              ""एकमुश्त वफ़ा का मुश्ताक हूँ मेरी वफाते-महबूब,
              मुझको गिला भी नहीं तेरी बेवफाई का""

राजू : -- मास्टर जी ! आप मास्टर है की डाक्टर??
             यह तो वैद्य विवरणी अर्थात नुसख़ा अर्थात प्रेस-क्रेप्सन
            जैसा प्रतीत होता है

         
            "राजू ! मैं  न कई डाक्टरों से घिरा हूँ, डाक्टर के घर में रहता हूँ,
             मेरी दूकान में डाक्टर रहता है और भी बहुत प्रकार के डाक्टर हैं
             कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं  किसी अस्पताल में भर्ती हूँ
             उन डाक्टरों की पर्चियां ही देख-देख का तुमको सिखाता हूँ " 


बुधवार, 29 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 30 -----

राजू : -- मास्टर जी ! जब भी जनता भ्रष्ट-भ्रष्ट खेलती है
            न्यायालय साब्-साब् एवं रूशी-रूशी को बीच में पेलती है

           सरकार संरक्ष लेती है
           स्वहित निर्णय का पक्ष लेती है

           विलंबित न्याय सच्चा नहीं लगता,
           सरकार के मुख से 'लोकतंत्र' अच्छा नहीं लगता

           लगे जब चुनाव पास हैं,
           लो न्याय का नया दंडपाश है

           न्यायालय जाने क्या जतलाता है
           जाने कौन इसे सोते से उढाता है

           'खाना' 'पहनना' 'सोना' सब भुला देगी,
            जनता एक दिन न्यायालयों को ही उढा देगी,

           " हम्म्म्म तुम्हारा निबंध किधर है??"

राजू : -- मास्टर जी ! स्वतंत्रता  पूर्व भारत में अग्रेजों के साथ  'राका'
            एवं उनके 'काका' रहते थे अंग्रेज कहते ये हमारा प्रशासन है

            राका कहते 'हम तो नहीं मानेंगे'

            अंग्रेज कहते 'ये हमारा विधि-विधान है'
            राका कहते 'हम तो नहीं मानेंगे'

            अंग्रेज कहते 'ये हमारी न्यायिक व्यवस्था है'
            राका कहते 'हम तो नहीं मानेगे'

            अंग्रेजों ने पूछा 'फिर क्या मानोगे'
            राका बोले 'हम तो हमारा वाला मानेंगे'
            'एवं हमारा वाला ही मनवाएंगे'

            तत  पश्चात अंग्रेजों ने उन्हें गोल-गोल घुमाया
            एक बारी घुमे, दोबारा घुमे
            'तीसरी बारी कहने लगे हम तो नहीं घूमेंगे' 

            अंग्रेजों ने पुन: पूछा 'तो क्या करोगे??'
            कहने लगे ' हम तो हमारे गोल अर्थात संसद में घुमाएंगे'

            अंतत: मुर्ख अंग्रेज इन चौव्वन चतुरों के हाथ सत्ता देकर चले गए,
            भारत  छोड़ने  के  पश्चात  चेते,  अरे!! ये संसद, संविधान, नियम,
            न्यायालय सब हामारा ही है ये  केवल लोकतंत्र के नाम पर भारत
            वासियों को गोल-गोल घुमा रहें हैं         

            स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात दो 'चीजों' का 'फैशन' ही चल गया
            एक तो गांधीगिरी एवं दूसरी 'नेहरू कट शेरवानी' भूखे भंडारों के देश
            में ऐसा 'फैशन' स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भी दर्शनीय था एवं वर्त्तमान
            में भी दर्शनीय है" 


     

मंगलवार, 28 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 29 -----

 " राजू कल हमारा कान फ्रेश हो गया "

राजू : -- "मास्टर जी ! मेरा तो प्रेस हो गया"

" हम तो सिंग का शेर सुन रहे थे"

राजू : --" मास्टर जी ! मैं चूहे का भूखा हाथी में सिर धुन रहा था"
             जाने कौन सी नदी में बह रहा था,
             केवल अपनी ही कह रहा था,
             विदेश में पढ़ालिखा हूँ,
             माँ के पेट से सिखा हूँ,
             अब गाँव गाँव जाउंगा,
             गवैयों को सिखाउंगा,
             मैं स्वयं भीख मांगूंगा,
             गवैये को मंगवाउंगा,
             माँ का बहुत दुलारा हूँ,
             43 साल का कुवांरा हूँ
             झोपड़ में घुस खाउंगा,
             भोर हुवे तेरे पानी से बोरिग में नहाऊंगा,

             कोई पूछे भाई पैसा भी भरेगा,
             तेरे भोजन से तो पेट सड़ेगा,

             तू ही चतुर है,
             एक सांस में खांस लेता है,

             गवैयाँ चार चतुर है,
             एक में डेढ़ सांस लेता है 


" हमने तुझे 'निबंध ' लाने को कहा था
  कविता सुनाने को नहीं कहा था"

राजू : -- "मास्टर जी ! वो निबंध तो अभी अपूर्ण है कल पूर्ण कर दिखाउंगा"


   

रविवार, 26 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 28 -----

राजू : -- मास्टर जी ! चाटुकार कैसे बनते हैं..??


           " राजनेता" बनकर..!!


राजू : -- मास्टर जी ! 'राजनेता' कैसे बनते हैं..??


           "दूरदर्शन पर दिखा रहें हैं ना वैसे..!!"


राजू : -- मास्टर जी ! विद्यमान "राजनेता' ऐसे ही बने थे..??


           "हाँ..,"


राजू : -- अर्थात पहले विधि, नियम, निति आदि का  उल्लंघन करो
            तत्पश्चात संसद में विराज कर नए नए नियम के निर्माता
            बनो, ये कैसा लोकतंत्र है मास्टर जी..??

     
           "वर्तमान  भारत में ऐसा ही लोकतंत्र है, तुम नया  वाला  लाना ठीक
            तथा कल 'भारत-स्वतंत्रता पूर्व एवं पश्चात' के विषय पर व्यंगात्मक
            शैली में निबंध लिखकर लाना..!!"


राजू : -- जी मास्टर जी ! किन्तु निबंध का वर्णन मौखिक होगा अथव श्याम
            पट पर होगा..??

            " यह कल ही सूचित किया जाएगा..!!"     

शनिवार, 25 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 27 -----

राजू : -- मास्टर जी !  क्या भारत में हर कोई बिकाऊ है..??


          " क्यों..? अर्थात कैसे..?"

राजू : -- मास्टर जी ! वो ऐसे कि कल कोई पूछ रहा था,
            "कान फ्रैश करके प्रेस" करने का क्या लोगे..,


          " राजू ! राजू !! राजू !!! भारत में एक यही तो निशुल्क है
            बाकी सब का शुल्क है यहाँ तक की यहाँ सलाह के भी..,


राजू : -- पैसे लगते हैं, है न मास्टर जी !!.....


          

शुक्रवार, 24 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 26 -----

" चल  चाल चल चाटुकार, चौव्वन चतुर होय..,
  न्यायकिरण कि  नवकरण, कारा कारा धोय....."  

तत पश्चात कहें हाय ! हाय !! प्रेस करे कोय.....

----- मिनिस्टर राजू 25 -----

" राजू ! तुम बढ़े होकर क्या बनोगे..? चित्रकार अथवा मूर्तिकार..??


राजू : -- मास्टर जी ! चाटुकार..!!!!!


" क्यों बनोगे..?"

राजू : -- मास्टर जी ! क्योंकि  चाटुकार  बनने  भर  से राष्ट्रपति एवं प्रधानमन्त्री
            बन सकते हैं, तत्पश्चात कुछ और बनने की आवश्यकता ही नहीं होगी....." 

गुरुवार, 23 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 24 -----

राजू : -- मास्टर जी ! अर्ज किया है : --
                                                    " मजहब से मेरे क्या तुझे तेरी दयार और..,
                                                      मैं और मेरा यार और मेरा कारोबार और....."
                                                                  ----- || मीर तकी मीर ।। -----


            मास्टर जी ! एक और ..............मेरी सरकार भी और..,


          " मिनिस्टर जी ! एक बार और..,"


राजू : -- मास्टर जी ! कौन सा वाला..? कान वाला या काला वाला..?


           " कान के निचे वाला....."

                            

सोमवार, 20 अगस्त 2012

----- मिनिस्टर राजू 23 -----

राजू : -- मास्टर जी ! कल आप क्यों नहीं आये थे ..??


           " कल मेरी दोस्ती को बुखार था..,"


राजू : -- मास्टर जी ! किन्तु आपके दोस्त तो भेषज हैं..,


           " वो चाँद देख रहा था..,"

राजू : -- मास्टर जी ! किन्तु ईद तो आज है..,


         " कल वो क़तार में खड़ा था..,"

राजू : -- मास्टर जी ! क़तार  में खड़े होने से चाँद दीखता है..,

           " हाँ ! ऐसा उसके पड़ोसी कहते है..,"

राजू : -- मास्टर जी ! उस पड़ोसी के पड़ोसी क्या कहते हैं..,

            " वो केवल लिखते है एवं साक्षात्कार के समय मौन रहते हैं..,"

राजू : -- मास्टर जी ! समझ गया मैं मिनिस्टर राजू हूँ मास्टर तो आप ही हैं.....
                

शनिवार, 18 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 22 -----

राजू : -- मास्टर जी ! अखिलभारत में झंडा फहर गया ये गव सम्पूर्ण विश्व में फहराएगी क्या..?



          राजू ! तुझे क्यों कष्ट हो रहा है कितना सुन्दर तो गा रही है
                   बिलकुल कोयल के जैसे


राजू: -- मास्टर जी ! कोयला खाके कोयल जैसे ही गाएगी न


          राजू ! तेरे मुखढ़े पर ये मुख किसने लगाया...लगाया तो लगाया
                   इस पर किसको बैढाया.. तेरी ये वाणी है या वीणा.....


राजू : -- मास्टर जी ! आप तो वेणुर्धर गोपाल हो..,

         
          तू स्वयं को अंग्रेज समझता है किन्तु तू है नहीं ये बता तू क्या है.....


राजू : -- मास्टर जी ! में बहिर्गमन करता हूँ और भास बनता हूँ.....


    

शुक्रवार, 17 अगस्त 2012

----- || MINISTER RAAJU 21 || -----

राजू : --           नयन नयन नायिका नायक नय नय नयन ।
                       नैन नदी निंद नींद नायिका नौ ननंद ।।
                       न..... न.... नायका नद नद नदन ।।
                       मास्टर जी ! इन दोनों में कौन उत्तम है..?


                      राजू ! दूसरा वाला.....   

बुधवार, 15 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 20 -----

राजू : -- मास्टर जी !  ये गव तो तबला ले के बैढ गई लो अब ग़जल सुनाएगी
             स्थापित ही कर दिया क्या..,


            तू मत सुन किन्तु प्रभु इसकी सुनता है..,


राजू : -- कैसे मास्टर जी ..?


            इक बारी इसने प्रभु से कहा प्रभु.... यज्ञ करवाना है  समस्या यह है कि
            गठजोड़  तो है किन्तु जोड़  नहीं है.., प्रभु बोले भक्त जोड़ तो मेरे पास भी
            नहीं है किन्तु इस जोड़ का तोड़ है.., तोड़ है .. जै बाबा नारद
                                            एक दिवस पुन: निवेदन किया प्रभु:.... भागवत
           करवानी है गठजोड़ तो है किन्तु जोड़ नहीं है भंडारा कैसे करूँ.....
           प्रभु ने पुन: सुमिरन किया..... जै बाबा नारद..... लो भागवत हो गई..,


राजू : -- मास्टर जी ! अपनी गवर्नमेंट की भी यही अवस्था है
             गठजोड़ तो है किन्तु जोड़ नहीं है और मास्टर जी !
             इनका तो प्रभु भी नहीं है.....
                                       
           

मंगलवार, 14 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 19 -----

              राजू ! गव एवं गवर्नमेन्ट में क्या अंतर है..?


राजू : -- मास्टर जी !! केवल मात्र   ऐ   का अंतर है..!!

               
            स्पष्ट करो कि कैसे..?


राजू : -- एक घाट घाट घंटी बजाती है तथा दूसरी घाटे घाटे घंटी बजाती है
             स्वयं किसी की सुनती नहीं अपनी सुनाते रहती है और मास्टर जी !!
             संध्या को तो बजाती ही है प्रभात को पुन: प्रसारण करती है..!!


           तू क्या करता है..?


राजू : -- मास्टर जी !! मैं केवल मात्र अध्ययन करता हूँ..,


            किसका..? विषय विकार का अथवा विषय विशेष का..?


राजू : -- भारत माता का....!!

रविवार, 12 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 18 -----

राजू : -- मास्टर जी ! यदि रामायण भागवत पूर्ण हो गई हो तो अपनी गाय
             को शान्ति निकेतन प्रस्थान करवाएंगे अथवा यहीं घाट पर ही घंटियाँ बजवायेंगे

            'सर्वप्रथम यह स्पष्ट कर कि तू घाट पर किस प्रयोजन उपस्थित है,
             भागवत श्रवण कर रहा है या रासलीलाओं के दर्शन कर रहा है..,


राजू : -- मास्टर जी ! दिखाई मुझे देता नहीं, सुनता मैं हूँ नहीं,
             जो कहता हूँ वो सुनाई नहीं देता..,

           
             कुछ दिखाई दे न दे तुझे  रासलीलाएं अवश्य दृष्टिगत होती है..,

         
राजू : -- मास्टर जी ! प्रतीत होता है आप गाय को झंडा फहरा कर ही प्रस्थान करवाएंगे.....    

गुरुवार, 9 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 17 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! मेरे दोस्त मुझे न धर्म निरपेक्ष
            कह कर पुकारते है..,


            किन्तु तेरा नाम  तो मोहन है..?( राजू घर का नाम है )

राजू : -- मास्टर जी ! उसके ऊपर सिंग भी तो है,
            तथा में कोई करम नहीं करता इस लिए मेरे नाम के निचे
            दोस्तों ने सब मिटा कर मेक भी लगा दिया अर्थात
            मेक मोहन सिंग..,


            अर्थात माइक मोहन सिंग क्योंकि तू कुछ सुनता ही नहीं,
            बोलता है वो सुनाई नहीं देता, दिखता  तुझे है नही श्रवण
            यन्त्र की सर्वाधिक आवश्यकता तुझे है,
            अरे हाँ ! तेरे आगे पीछे राहू केतु भी लगे हैं एवं तू कर्क-
            मकर रेखा के सह सदैव पंचसितारों में विराजमान रहता
            है, तू धर्म-निरपेक्ष कहाँ हुवा तू तो देह-निरपेक्ष हुवा.....                  
   
           

बुधवार, 8 अगस्त 2012

----- MINISTER RAAJU 16 -----

'' राजू ! ये क्या कर रहे हो..?? '

राजू : -- मास्टर जी ! गाय को चीरा लगा रहा हूँ ..

 ' राजू ! तुम्हे चारा खिलाने को कहा था चीरा लगाने को नहीं कितनी बार
   तुम्हे कहा है की भेषज मत बना करो तुम भास ही उत्तम हो,
   राजू ! ये तुम्हारे भेस को क्या हुवा-----
                                            उदर अन्दर दत भंजक भुजा । मुख मंडल सुजन दिरिस दूजा ।।
                                            छीन भीन भय विगलित भेसा । भीन  भीन  केश ऋषि केसा ।।

   वत्स ! तुम्हारा तन वीभत्स काव्य कीर्तन कर रहा है,
   कहो बालक इस घट के औघट कौन घटना घटी..,

राजू : -- मास्टर जी ! दुर्घटना घटी चूँकि सावधानी हटी,
            कल एक भद्र महिला को मां-बहन कह दिया था
            एवं मेरी विषम वाणी का प्रसारण दूरदर्शन पर हो गया..

राजू ! यह अति उत्तम हुवा की तुम्हारी वाणी परकटी के सह स्पष्ट नहीं हुई
अन्यथा तुम्हारी वाणी का प्रसारण सीधे आकाश पर होता.....    
          

मंगलवार, 7 अगस्त 2012

----- || MINISTER RAAJU 15 || -----

राजू : -- मास्टर जी ! आपने अपनी गाय को एक महीने में सोते से जगाया,
            अब पुरे एक महीने उसे  स्नान करवाएंगे  तनिक ये तो  बताइये ये
            गाय दूध कब देगी..


           '' राजू! राजू!!गाय सर्वप्रथम गाभिन होती है तत्पश्चात बछ्छे-बछिया
              देती है उसके पश्चात दूध देती है..

राजू : --  मास्टर जी ! आपकी  योजना  का  योजन  भी पंचवर्षीय कार्यक्रम के
             सदृश्य प्रतीत होता है अर्थात कब नौ मन तेल होगा और कब राधा नाचेगी..


            ' अर्थात गाँव तो बसा नहीं माँगने वाले पहले ही आ गए,
              अभी जाओ बाद में आना
              एवं गाय जब तक दूध नहीं देती तब तक तुम गुना भाग करके आकलन
              करते रहो ये दूध कब देगी कितना देगी सूत्र है ------जितना चारा = उतना दूध.....   

शनिवार, 4 अगस्त 2012

----- || MINISTER RAAJU 14 || -----

राजू :-- मास्टर जी ! यदि मेरे पास दुर्लभ वाहन, 100-50 लाख मुद्रा, दो वर्ष के दंड के सह
            दो वर्ष का सामाजिक कार्यक्रम हो तो क्या मै किसी को भी कुचल सकता हूँ..??

           " अरे राजू ! इतने में तो तुम भवनपति से लेकर त्रिभुवनपति तक  को कुचल
             सकते हो..'
                           इतने दुर्लभ विस्फोटक पता नहीं कोई कैसे वहन  करता है, तुम्हारा
             वाला उपाय सस्ता सरल सुलभ एवं अपेक्षाकृत कहीं अधिक सुरक्षित है..!!


राजू :-- मास्टर जी! किन्तु भवन एवं त्रिभुवनपति के अंगरक्षक..!!


           " राजू ! राजू !! राजू !!! लगता है इतिहास विषय में तुम्हारा ध्यान कम है,
             जैसे भवन-त्रिभुवनपति होंगे वैसे ही उनके अंगरक्षक होंगे..!!


राजू :-- मास्टर जी ! आप कितना अच्छा पडाते हो..??


           " राजू मैं कहाँ अच्छा पढ़ाता  हूँ अच्छा तो वो पढ़ाते हैं जिन्होंने अंग्रजी में पढ़के
             अंग्रेजों को ही पढ़ा दिया.....          

----- MINISTER RAAJU 13 -----

राजू :-- मास्टर जी सर्वप्रथम 'गोरे अंग्रेज' तत्पश्चात 'काले अंग्रेज' आये
            अब कौन से रंग के अंग्रेज आयेंगे..??

           " राजू ! तुम्हें हपी नाला वाला वर्नसूत्र सिखाया था,
             उसी में से कोई एक आयेंगे..,

राजू :-- मास्टर जी ! रंग-बिरंगी फिरंगी कब आयेंगे..??

            " राजू ! यदि जीवित रहे तो इसके पश्चात आयेंगे.....      

मंगलवार, 31 जुलाई 2012

MINISTER RAAJU 12

राजू : -  मास्टर जी ! मास्टर जी !! आपसे  एक वचन कहना था..


           एक वचन क्यों तुम बहु वचन कहो..

राजू :   मास्टर जी,  मुझे जानने वाले ये कहने लगे हैं..,
                             मुझमें मास्टर जी का भूत रहता है.....

           तूम .....तूम.....बुद्धू,शनि, मंगल,शुक्र, अरुण, वरुण, राहू, केतु जो कोई भी हो
           तत्काल बहिर्गमन करो..... अर्थात कक्षा से बाहर जाकर खड़े होव..,

राजू :   मास्टर जी किन्तु बाहर जा कर में क्या बनूंगा..


          भास बनो चमको, बांग दो, या मंडराओ कुछ भी करो..,

राजू :   जी मास्टर जी !!.....: ( : (

रविवार, 29 जुलाई 2012

----- || MINISTER RAAJU 11 || -----

            " ऱाजु  तुम्हें 'हमारा भारत' शीर्षक के अंतर्गत निबंध लिख कर लाने को कहा था
              लिख लाये..??

 राजू : -- जी मास्टर जी किन्तु निबंध अपूर्ण है क्योंकि एक शंका का समाधान चाहिए था..!!

            " कैसी शंका..??"

राजू :     मास्टर जी हमारी सरकार में ' दादा ' पति बन गए 'पापी' पापा बन गए अब पुन:
            दादा कौन बनेगा..??

            "राजू ! राजू !! हमारे देश में जिसके बेटा और बहू होते है वो दादा बनते हैं
            जिसकी बेटी तथा जमाई होते हैं वो दादा थोढ़ी न बनते हैं वो तो नाना
            बनते हैं.."

राजू : -- समाधान हो गया मास्टर जी..!!

बुधवार, 25 जुलाई 2012

----- || MINISTER RAAJU 9 || -----

राजू : -- मास्टर जी हमारे संविधान में राष्ट्रपति की व्यवस्था है
             हम राष्ट्रपिता  को सम्मानित  करते है किन्तु माता व
             पत्नी का सम्मान क्यूँ  नहीं करते..??


            " राजू हमारे संविधान में स्त्रीवाचक शब्दों का प्रयोग वर्जित है.."

राजू : -- मास्टर जी हमारे वेद पुराणों में तो भारत को माता के रूप में
             संबोधित करने की परम्परा है एवं कहा गया है: --
                     " यत्र नारीयस्त पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता"

   
            " राजू ! राजू !! राजू !!! ये आधुनिक  संविधान  है यहाँ 'संसद' में
              अपनी माता तुल्य स्त्रियों को 'परकटी' जैसे बहुत सारे अपशब्दों
              से सम्मानित व  करतल  ध्वनी से  अभिवादन  किया जाता है
              ऐसे 'लोगों' को  उच्च  पद  व  उच्च  आवास  में  निवास  करने             
              हेतु पुरस्कृत किया जाता है.."


राजू : -- "किन्तु मास्टर जी ऐसे कृत्य तो दंडनीय होने चाहिए..??"


            " राजू यदि ऐसा कृत्य  दंडनीय होता तो स्वतंत्रता प्राप्ति के इतने
               वर्षों पश्चात भी पुरुष अपनी माता स्वरूप कन्याओं से बलात्कार
               जैसा जघन्य कृत्य क्यूँ करते....."


             "       

शुक्रवार, 20 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 10 -----

राजू : -- " मास्टर जी, मास्टर जी मेरे दोस्त कहते हैं की अब मैं बड़ा हो गया हूँ.."

            " राजू!! बड़े होने से कुछ नहीं होता पैर पे खड़े होना पड़ता है वैसे तू इतना
              भी बड़ा नहीं हुवा है
                                 ये बता तुझे घोड़े पर बैठना है की घोड़ी पर..??"
   
राजू : -- मास्टर जी ....वो....वो.... मैं.... आप...हम....


           "हमम्म्म्म .....अभी बैढेगा तो गिर जाएगा....." 

----- MINISTER RAAJU 8 -----

राजू : -- " मास्टर जी, मास्टर जी मुझे भी घोड़े पर बैठना है.."

            " तू यदि घोड़े पर बैढेगा तो धक्का कौन मारेगा..??"


राजू : -- " मास्टर जी घोड़े को भी धक्का मारना पढ़ता है..??"

             " राजू !! तेरे इन्हीं उलटी पुलती प्रश्नोत्तरी के कारण तुझे गधा कहते है....."

बुधवार, 18 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 7 -----

राजू : -- " मास्टर जी 'गधा-घोड़ा' वाले अध्याय में गधा व घोड़ा ज्ञात नहीं हुवा,
               किंचित  विस्तारपूर्वक स्पष्ट करते हुवे समझाइये न.." 

              " इस अध्याय का यह उपखंड कठीन है रहने दे तेरे सिर के
                ऊपर से जाएगा.."
                अर्थात : --
                                  " अगर अपना कहा तुम आप ही समझे तो क्या समझे..,
                                    मजा कहने का जब है एक कहे और दूसरा समझे..,
                                    कलामे मीर समझें और ज़बाने मिर्जा समझें..,
                                    मगर इनका कहा यह आप समझें या खुदा समझें....."
                                                                    ----- किसी ने कहा था -----

राजू  : -- " समझ गया मास्टर जी.....!!"
                                    

रविवार, 15 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU 6 -----

" राजू, आज तुम विचलित क्यों हो.."

राजू : -- "मास्टर जी मेरे नाना-नानी  के कारण.."

" उन्हें क्या हुवा.."

राजू : -- " कह रहे थे कि बहु चाब रही है.."
              मास्टर जी मैने भी बोल दिया बही यदि मँहगी बेचोगे तो
              बहु काटेगी और चाबेगी....."



शनिवार, 14 जुलाई 2012

" बाँध-बाँध बनी बाँधनी बानि बंधे बान..,
  बूंद-बूंद बदी बदरिया बेध बेध बिधान....."

मंगलवार, 3 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU -----

" राजू कल पढ़ने क्यों नहीं आए..??"

राजू : -- " मास्टर जी कल मेरी मामी शादी थी..!! "

" किसके साथ..?? "

राजू : -- " मास्टर जी मामी की शादी मामा के साथ ही होगी ना..!! "

" हम्म्म तुम्हारे मामा कुछ ज्यादा ही नमकीन है नई..!! "

----- || AAVAPAN || -----


  आड़ा-आड़ा आँढ ओढ़नी ओढ-ओढ आँट ।।  
  गाढ़ा-गाढ़ा गाडव  गाढ  गोट-गोट गाँढ ।।


  
  ओस-ओस औषसी आहाँ आस-आस आस्तार  ।
  आशु-आशु   आषाढ़ी  आश   आश्रय  आसार  ।।

रविवार, 1 जुलाई 2012

----- MINISTER RAAJU -----

" राजू तुम्हे एक कविता याद करने को कहा था
  चलो सुनाओ..!!


राजू : -- मास्टर जी " बुंदेलों हरबोलों से हमने सुनी कहानी थी..,
                             खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी.."


" हो गया बाकी कल सुनाना ये बताओ तुम इतने उदास क्यों हो..??"


राजू : -- " मेरे दोस्त के कारण..!!"


" क्यूँ क्या हुवा..??

राजू : -- मास्टर जी " छमछम करती आई छमछम करती चली गई..,
                             'वो' सिन्दुर लिए खड़ा रहा 'वो0000' राखी बाँध के चली गई.."


" धत् तेरा सत्यानाश हो तू भी गधा तेरा दोस्त भी गधा....."

----- || PAPAA || -----

" पल्लव पल्लव पिप्पल पुल पुलिन पाताल..,
  पात-पात पातरी पोत-पोत पाल....."

शनिवार, 30 जून 2012

----- MINISTER RAAJU 5 -----

" राजू यदि घोढ़ी घोढ़े से मरी घोढ़ा घढ़ी से मरा
  तो गधा किससे मरेगा..??


राजू :-- मास्टर जी इस बारी गधा 'घूढ़की' से ही मर जायेगा.....

----- || CHORI CHORI || -----

" चित्र-चित्र चित्रित चरितार्थ चित-चित चितरनहार..,
  चत्तुरंगिणी चित्रक चित्रवत् चित्त-चित्त चित्हार.....

शुक्रवार, 29 जून 2012

----- MINISTER RAAJU 4 -----

" राजू कल दूरदर्शन पर जो टमटम देखा उसमे गधा कौन था
  घोड़ा कौन था और कहाँ था

राजू : -- " मास्टर जी गधे का तो पता नहीं किन्तु घोड़ा, घोड़ा था
              और अपने स्थान पर ही था....."

----- || LANCHAA KA LAACHAA || -----

" लोच लोच लचकन लंचा लचक लचक ललचाऐ..,
  लगन  लगन  लग  ललना  लहर  लहर लहराऐ....."

गुरुवार, 28 जून 2012

----- MINISTER RAAJU 3 -----

" राजू, घोड़ा घूस से यारी करेगा तो खायेगा क्या..??"


  राजू :-- मास्टर जी "घुसा"

" यदि गधा घोड़े से यारी करेगा तो क्या खायेगा..??


  राजू :-- मास्टर जी वो भी घूसा ही खायेगा


 " फिर तू क्या खायेगा..?????" 

----- ????? -----

" कड़ी कड़ी की कौढ़ीयां कौड़ी कौड़ी कोण..,
  काढ काढ कोढीवाल कोटि-कोटि कौण....." 

----- || Bas, Das || -----

" कटक-कटक कंढ कटि कन काष कोदंड कंढ..,
  कणक कोट कांड कंढारि काट काढ़ कै कंढ....."

बुधवार, 27 जून 2012

मंगलवार, 19 जून 2012

----- MINISTER RAAJU 2 -----

" राजू साली किसे कहते है..??"


 राजू :-- "मास्टर जी साले की बहन को.."


            " अच्छा, क्यूँ कहते है..??"


राजू :-- " मास्टर जी क्यूँ की यदि साली आगे पीछे घुमे 
             तो मस्त लगता है.."


             " तू भी एक अवशेष ही है.."

----- MINISTER RAAJU -----

TUSEDAY, JUNE 19 2012                                                         

" राजू  'मीनिस्टर' एवं 'मिस्टर' क्या अन्तर है..??


  राजू :-- "मास्टर जी वही जो 'शेष 'एवं 'मिसेस ' में है.."


            "हम्म्म..... कैसे कैसे अवशेष है....."

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...