मंगलवार, 22 जनवरी 2013

----- मिनिस्टर राजू 76 -----

राजू : -- मास्टर जी !

" हूँ "

राजू : -- हमारे सर्बोच्च न्यायालय के जज को तो 'बिरोध प्रदर्शन'
            मा भारी रूचि है और बछुआ कहत है कि हमका तो जज
            बनना है फिर समस्या का है मैय्या दिलवा काहे नहीं देती
            .....खिलौना ही तो है..... उपाधि भी है.....अरे उ नाना जी
            की..,

" राजू ! अब का कहें बछुआ भए दुव्वल और मैय्या है की अव्वल बने
   बैठी हैं किती बारी कहा जा के चुल्हा चौका संभाले और बछुआ को
   अव्वल बना कर गरम गरम रोटी खवाएं फिर उ काहे किसी के घर
   घुस के खावेगा और सुतेगा और नहाएगा.....राजू ! जब दीपक
   बुझता है न तो बुझने से पहिले बहुंत भरभराता है..... 

रविवार, 6 जनवरी 2013

----- मिनिस्टर राजू 75 -----

          " राजू ! आज तो तूम बहुँत ही महक रहे हो
            कोई महँगा बाला खुसबू मले हो का..??"

राजू : -- उ का है ना मास्टर जी ! आज हमारी मैया इसी खुसबू
            के कारन हमरे बापू पे बरस पड़ी कहने लगी  : --

          " इ देखव तोहार बछुवा को अब इ दिनोदिन अइसे ही
            सिलेंडर की इत्ती महँगी गैस निकाल निकाल के देही
            मा चुपरेगा तो हम घर कैसे चलायेंगे....."
              

शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

----- मिनिस्टर राजू 74 -----

राजू : -- ऐ मास्टर जी ! रामायण मा 'लछमन रेखा' अउर 'धोबी' का
            बरनन तो सुने रहे इ नवा वाला 'मर्यादा रेखा' अउर 'मछुवारा'
            किधर से आई गवा..??

         " राजू ! एक राम चरित मानस तुलसी दास लिख के चल दिए
           भक्ति रस मा.......इ 'मंदिर बाले' एक ठो नया लिखेंगे 'हास रस'
           मा काहे कि इनका मंदिर भी बड़ा हास्यास्पद है जहाँ के भगवान
           इ खुदेइ हैं अब साकेत मा लोगबाग राम के जन्म भूमि देखने
           नाहीं जाते......हँसने जाते हैं.....

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...