राजू : -- मास्टर जी ! हम भी 'अनुभूति' की भभूती मलेगें..,
" तुम्हारे बाबूजी घूस लेते हैं ?? "
राजू : -- नहीं ! मास्टर जी!
" घोटाला करते हैं ?? "
राजू : -- नहीं ! मास्टर जी !
" कर चोरी, डकैती, काला धन संग्रहण आदि आदि करते हैं "
राजू : -- नहीं ! नहीं ! नहीं ! आदि आदि मास्टर जी !
" फिर तुम्हारे बाबूजी करते क्या हैं ?? "
राजू : -- मास्टर जी ! वही ! जो सब करते हैं, गंगा में जाके धोते हैं, हिमालय में चढ़
के सुखाते हैं और पिघलते-बहते गृहस्थी के सांसारिक सागर में बिलीन हो
जाते हैं..,
" ओह ! तो तुम उसी सागर के मोती हो??आजकल मोती वोती का 'फैशन' कहाँ है
लाल की 'नेहरू कट शेरवानी' का फैशन है !
राजू : --मास्टर जी ! ये फैशन तो 'मार' लेते हैं पर टेलर को कछु इनाम- सिनाम नहीं देते
" उ का है न राजू इन्हें कोयरे में तो रतन दिखाई देते हैं और रतन मा कोयरे
राजू -- मास्टर जी ! एक तो उ महाराज थे जो भाइट खाके भी बिलैक ही रहे
एक इ हैं जो बिलैक खाके भी खुद को भाइट- भाइट कहते हैं
राजू ! एही तो कलियुग है नाम ही करिया है