" राजू ! थे काल मदरसा कु कोणी आयो ?? "
राजू : -- मास्टर जी ! म काल साहित्य की छोरी कविता को ब्याह मंड्वाण गयो थो ।
" किस क सागो ?? "
राजू :-- मास्टर जी ! कला को पोतो सुर साग ।
" ओह ! संगीत को छोरो साग..... मंड्ग्यो??"
राजू : -- घणो चोखो मंड्ग्यो.....मास्टर जी । इब थे बताओ थे काल कू कोणी आयो ??
" म सुर ओर कविता क टाबरियां को नामकरण करन गयो थो"
राजू : -- मास्टर जी ! कुण कुण सो नाम ??
" गज़ल और गीत "
राजू : -- मास्टर जी ! फेर नाम धर दियो ??
" धरण त पैलइँ सुर को सालो निबन्ध, भाण न लेण आ ग्यो"
राजू : -- मास्टर जी ! म भी तो संस्कृति को पोतो और सभ्यता को पुत हूँ
.................... गज़ालाआआ
" राजू ! राजू ! राजू ! म्हारो देस म बालका को ब्याह की रीति बंद होगी "
राजू : -- मास्टर जी ! म कद बड़ो होऊंगो??
" अपणी दादी त पूछ"
राजू : -- मास्टर जी ! कई दिणा होगो दादी आई कोणा ।
" आई कोणा तो बुला ले "
राजू : -- मास्टर जी ! कैंय्याँ ??
" जो पाछ को चुटकुलों म बुलायो थो वैंय्या.....
राजू : -- मास्टर जी ! म काल साहित्य की छोरी कविता को ब्याह मंड्वाण गयो थो ।
" किस क सागो ?? "
राजू :-- मास्टर जी ! कला को पोतो सुर साग ।
" ओह ! संगीत को छोरो साग..... मंड्ग्यो??"
राजू : -- घणो चोखो मंड्ग्यो.....मास्टर जी । इब थे बताओ थे काल कू कोणी आयो ??
" म सुर ओर कविता क टाबरियां को नामकरण करन गयो थो"
राजू : -- मास्टर जी ! कुण कुण सो नाम ??
" गज़ल और गीत "
राजू : -- मास्टर जी ! फेर नाम धर दियो ??
" धरण त पैलइँ सुर को सालो निबन्ध, भाण न लेण आ ग्यो"
राजू : -- मास्टर जी ! म भी तो संस्कृति को पोतो और सभ्यता को पुत हूँ
.................... गज़ालाआआ
" राजू ! राजू ! राजू ! म्हारो देस म बालका को ब्याह की रीति बंद होगी "
राजू : -- मास्टर जी ! म कद बड़ो होऊंगो??
" अपणी दादी त पूछ"
राजू : -- मास्टर जी ! कई दिणा होगो दादी आई कोणा ।
" आई कोणा तो बुला ले "
राजू : -- मास्टर जी ! कैंय्याँ ??
" जो पाछ को चुटकुलों म बुलायो थो वैंय्या.....