मंगलवार, 28 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ९ ४ -----

" राजू ! का लिख रहे हो ? "

राजू : -- मास्टर जी ! नाटक लिख रहा हूँ नाटक

" अच्छा ! का नाम है नाटक का ? "

राजू : -- मास्टर जी ! " डाकू फ़ूल्लन देबी"

" ओह! ओह ! का का लिख चुके हो "

राजू : -- अभी तो मध्यांतर लिख दिया हूँ.....एक ठो ज़मज़मा "सैट" कर रहा हूँ   
             फूल उधर से खिला.....हाथ इधर से निकला.....सूरज उधर डूबा.....चाँद इधर निकला
             मास्टर जी ! आप भी पढेंगे ?

" हाँ ! हाँ ! ( पढ़ने के बाद ) ओह ! ओह ! जब मध्यांतर इतना डिरावना है तो किलाइमेक्स
 केतना डिरावना होगा?

राजू : - मास्टर जी ! पिछले किलाइमेक्स में फाटक बंद हुवे थे.....अब तो पूरा गढ़ ही बंद हो जाएगा.....

बुधवार, 22 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ९ ३ -----

राजू : -- ........ "तस्बीरें" ....... मास्टर जी ! हमारा तो गज़ल गाने का मन कर रहा है..,

" तू..... कौआ कहीं का.....तू गज़ल गाएगा तो सारी कोयलें भाग जाएंगी"

राजू : -- मास्टर जी ! कोयलें तो उड़ती हैं......ये भागने कब से लगी.....

"जब से ये 'नाटकबाज' 'नाटककार' बन गए"

राजू : -- मास्टर जी ! 'बाज' और 'कार' में पी पी क्यों आता है?

"वे जब मस्जिद में बांग देंगे न तब पूछना"


सोमवार, 20 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू 9 २ -----

राजू : -- मास्टर जी ! जब उ सठियाए हुवे सेठों को मरनी से इतना ही भय लगता है
             .....और वो सुरक्षा कर्मियों को पालने पोसने में इतने ही सक्षम हैं तो सारी
             सेना को  ही सुरक्षा में काहे नहीं लगा देते ?

" फिर अपने देश के लिए ? "

राजू : - मास्टर जी ! मास्टर जीईई ! "नई रख लेते हैं..,"

"अरे राजू ! ये तो मस्त योजना है " नौकरी सरकारी- तनख्वाह कारोबारी" 

शुक्रवार, 17 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ९ १ -----

राजू: -- मास्टर जी ! कल ये दिल्ली की पुलिस, किस नाटक के फाटक
            को कौन से निबन्ध से बंद कर रही थी ?

" राजू ! राजू! दिल्ली की पुलिस कहाँ साहित्य कार है ये नाटक-निबन्ध लिखना थोड़े ही जानती है
  ये तो मुलाजमत-नामा माने की सेवा-पुस्तिका लिखती है.....कल इसने उस किताब में एक
  'ज़मज़मा' माने की गीत लिख दिया..,

राजू : -- मुलाजमत-नामा में..... 'ज़मज़मा'..... मास्टर जी ! फिर का हुवा ?

" फिर.....फिर का होना है मुलाजमत-नामा हीट हो गया"

राजू :-- मास्टर जी ! फिर तो हमारी सरकार इन्हें नामो-एहतराम से नवाजना चाहिए 
            कोई पुरस्कार-परितोष का उद्घोष करना चाहिए ?

" राजू ! तू जितना छोटा है उतनी ही छोटी बात भी करता है.....सरकार इनके नाम से पुरूस्कार की उद्घोषणा करेगी जैसे कि....."पुलिस रत्न"

राजू : -- मास्टर जी ! "पुलिस रत्न" के फले भी तो कुछ लगना चाहिए..,

" उसके लिए समाचार पत्रों को एक एक पृष्ठ का विज्ञापन दिया है, और बिजली से चलने वाले समाचार संसाधनों को आधे आधे घंटे के विज्ञापन दी हैं

राजू : -- मास्टर जी ! ये महामात्य की "बर्तनी' अभी तक नहीं सुधरी है.....भारत निर्माण कहते हैं तो
             भारत निर्वाण लगता है.....




मंगलवार, 14 मई 2013

----- ॥ मिनिस्टर राजू ९ ० ॥ -----


                               तीन बरस गए भूल मैं, तीन जुआ में हार । 
                              तीन गई सोवति अब चली जरन सरकार ॥ 
                              
                              अर्थात : - तीन वर्ष खेलने खाने में बिता दी, तीन वर्ष युवा के विलास में बिता दी 
                              तीन वृद्ध वस्था प्राप्त कर सोती रही अब सरकार तन फूंकने चली ॥ 

                              एक दिन पश्चात.....

                             राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी!

                            " क्या राजू ! क्या राजू !
     
                             राजू: -- मास्टर जी ! पक्ष तो कह रही है में एक साल बाद जरुंगी,

                            " फिर तो उसका चौथा होना तय है" 

सोमवार, 13 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ८ ९ -----

राजू : -- मास्टर जी !
                               बालपन भोले गया, और जुआ महमंत । 
                               बृद्धपने आलस गयो चला जरन्ते अंत ॥ 
                                    ----- ॥ कबीर ॥ -----

                              तीन बरस गए भूल मैं, तीन जुआ में हार । 
                              तीन गई सोवति अब चली जरन सरकार ॥ 
                              
                              अर्थात : - तीन वर्ष खेलने खाने में बिता दी, तीन वर्ष युवा के विलास में बिता दी 
                              तीन वृद्ध वस्था प्राप्त कर सोती रही अब सरकार तन फूंकने चली ॥ 

" राजू ! राजू ! अब ई का है ??"

राजू : -- मास्टर जी ! सरकार ने अर्थात पक्ष ने नरसों, अपने कार्यकाल के निबन्ध का जो
              उपसंहार लिखना चालु किया था, हमने उसपर दोहा लिख दिया..,

" अच्छा ! तो विपक्ष क्या लिख रही थी?"

राजू : -- मास्टर जी ! विपक्ष को निबन्ध लिखना कहाँ आता है, यदि आता तो वो अपना संविधान
             न लिख लेती विपक्ष का लिखा काहे फाल्लो करती अवसर बार बार थोड़ी न मिलता है.....
             वो तो 'नाटक' लिखती है नाटक,

" आह! इतना डरावना किलाइमेक्स..... राजू ! महात्मा गांधी ने कहा है: -- "डरना और डराना दोनों पाप है"
   एक बात समझ नहीं आई ये पक्ष, विपक्ष के किलाइमेक्स में अपनी फोटो काहे देख रही है.....









रविवार, 12 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ८८ -----


राजू : -- " राजनीति के सिद्धांत में राष्ट्र की रक्षा सभी उपायों से करने के आदेश हैं,
               इसलिए राजा,राजकुमार, औए अमात्य सबका विसर्जन किया जा सकता है....."
                                                              ----- ।। जय शंकर प्रसाद ।। -----

               मास्टर जी ! इस सूक्ति का अर्थ समझाइये नाँ.....

               " परसों किया था न दो अमात्यों का बिसर्जन अब महामात्य का बिसर्जन बाकी है"

राजू : -- किन्तु मास्टर जी ! आपने तो सर्जन करने कहा था बिसर्जन करने को थोड़े न कहा
            था ..,

            " राजू! राजू! तू ज्यादा बोल के मुझे डरा मत नहीं तो बछुआ के पेट में मरोड़ उठेगी न
              तो वह अपनी बेसुरी आव़ाज से बे-उनबानी तकरीर पड़ना शुरू कर देगा, उसकी
               बेसुरी तकरीरों से तो पड़ोसीयों के भी  बैरक उखड़ गए फिर मेरी तो बिसात ही क्या
               है.....                

बुधवार, 8 मई 2013

----- मीनिस्टर राजू ८७ -----

" क्यों राजू !तुमने कल के लिए ये छुट्टी की अर्जी क्यों लगाई है, और ये नई 'अचकन'
   क्यों बनवाई है?"

राजू : - मास्टर जी ! वो क्या है की कल मरकज़ की सरकार अपी फतह की ख़ुशी में
            'सदक़े के कौंवे' छोड़ेगी सो मे भी वही जाना है.....

              मास्टर जी ! आप भी जलूल जलूल आना.....
          

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...