गुरुवार, 27 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 42 -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये पाक के वजीर फजीर की औलाद को भी मोहब्बत
            करना आता है..??


" हाँ ! आता तो है.."

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे वजीर फजीर की औलाद को तो नहीं आता..??


" नहीं आता तो तू सिखा दे.."


राजू : -- मास्टर जी ! मैं कहाँ मोहब्बत से पैदा हुआ हूँ
           और वो मोहब्बतों का खानदान..कहाँ वो और कहाँ..
           वैसे मास्टर जी ! ये पाक वाली मोहब्बत थोड़ी बड़ी नहीं है..??


          " मेने नापी नहीं है..!!"

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे पास  तो ऐसी बड़ी मोहब्बत को लम्बी करने
            का लम्बा कीर्तिमान है खुदा करे ये भी लम्बी ही हो.....
           

शनिवार, 22 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 41 -----

" राजू ! कल शाम तुम्हारी आबरू कहाँ थी..??"


राजू : -- मास्टर जी ! मेरे वालिद-वालिदान के चमन की हिफाजत कर रही थी..!!


" क्यों कर रही थी..??"


राजू : -- मास्टर जी ! चमने-दरख़्त की शाखों पर रकम रकम के
            समर लटक रहे थे जो आता वही लुट ले जाता..!!


" निगेबाँ रहना अबकी बार खोद कर ही न ले जाएँ..!!"

    बदनजरे-दामन थीं खुद निगाबान की.., 
    शाखे-समरदार थीं मेरे गुलिस्तान की..,
    जहां  आगोशे-जां  खामोश  रही जबां..,
    आबरू लूटती  रही  मेरे  आशियाँ  की.....   

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 40 -----

" राजू ! तूम सीता की रसोई में क्या कर रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! श्री राम एवं उनके मंदिर को ढुंढ रहा था.....



मंगलवार, 18 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 39 -----

   " राजू ! कल तुम्हे उत्तर तैयार कर लाने कहा था कर लाये..??"


राजू : -- जी मास्टर जी ! वो मिनिस्टर पूर्वकाल में पंचों के साथ थे
            इस बारी वो दस्यु के साथ हैं..!!


 " अच्छा ! तू किसके साथ है..??"


राजू : मास्टर जी ! में तो अपनी माता के साथ हूँ..!!


" अच्छा ! अच्छा !! और माता किसके साथ है..??"


राजू : -- वो पिता जी के साथ हैं एवं पिता जी माता के साथ है
            वे दोनों साथ-साथ हैं मास्टर जी ! आप किसके साथ हो..??


 " में गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर के साथ हूँ....."

  

सोमवार, 17 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 38 -----

                                                   "  सुदर्शनम् कमलाकरम् " 


 " राजू !  परसों हिन्दी एवं उसका व्याकरण पढ़ाया था,
   अब इस शीर्षक की कविता के भाव बताओ..??"


  राजू : -- मास्टर जी ! यदि माया रूपी शेषनाग की छाया शीश पर हो
              तो चरणों में लक्ष्मी का वास होता है..!!


 " धन्य हो ! धन्य हो ! महाराज धन्य हो !! भारत में भी न कैसे कैसे गुरु एवं
    उनके शिष्यभी कैसे कैसे  'थे', यथाक्रम कलयुग को तो आना ही था..!!


राजू : -- मास्टर जी ! अभी भी वैसे ही मास्टर एवं वैसे ही उनके मिनिस्टर 'हैं'
            अब की बारी कोयलायुग आया है.....


" कल इस प्रश्न के उत्तर को तैयार कल के लाना कि
  "ये मिनिस्टर सदैव पंचों के साथ क्यूँ रहता है.....??"


शनिवार, 15 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 37 -----

  " राजू ! कल तुम्हे हिन्दी एवं उसका व्याकरण पढ़ाया था, चलो बताओ
    गाधिकुल क्या है..??


 राजू : -- मास्टर जी ! यह एक स्त्रीलिंग शब्द है..!!


 " अच्छा !! तो गांधिकुल क्या है..??"


 राजू : -- मास्टर जी ! यह एक पुर्लिंग शब्द है..!!


" अच्छा ! अच्छा !! तो गधाकुल क्या है..??"


राजू : -- यह उभयलिंग है, मास्टर जी ! मैं क्या हूँ..??


" तू कुछ नहीं है..!!"


राजू : -- मास्टर जी ! यह तो उचित नहीं है, ये प्रश्न मैं अपनी माता से पूछूंगा..!!  

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजा -----

बिवर     अलकालवाल  बिलावर   बिलोकन   बाल ।
बिदक बिदारन बबाल बिल बिल बिलोकन बिडाल ।। 

मंगलवार, 11 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 36 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मैंने अपनी माँ से पूछा
             " माँ मेरी शादी वादी विवादी... आदि आदि कब होगी..??"


            " तो क्या कहा तुम्हारी माँ ने..??"


राजू : -- वो बोली तुझ जैसे माँ वादी से कौन शादी करेगा..... 

शनिवार, 8 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 35 -----

राजू : -- मास्टर जी ! माँवादी किसे कहते हैं..??


        " जिनका विवाह विवादी होता है उन्हें माँवादी कहते हैं.."


राजू : -- मास्टर जी ! माँवादी एवं आतंकवादी में क्या अंतर है..??


         " माँवादी के साथ माँ होती है.."

राजू : -- मास्टर जी ! तदनंतर करुण रस आतंकवादी के साथ होना चाहिए..??


         " वो केवल कवियों के साथ होता है,तू कोई अन्य प्रश्न पूछे इससे पहले ये बता
            मास्टर मैं हूँ की तू है..??

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर तो आप ही हो..

          " सनद रहे.."  

शुक्रवार, 7 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 34 -----

 " राजू ! कल सार्वजनिक वितरण केंद्र में तुम्हारे साथ जो भद्र महिला थी,
    वो तुम्हारी बुआ थीं..??"


राजू : -- नही वो मेरी माता थी  मास्टर जी !


 " किन्तु उसमें माता वाले लक्षण के दर्शन तो नहीं हो रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! माता वाले लक्षण दर्शाने का सूत्र कौन सा है..??


" राजू ! अभी तुम बालक हो, जब तुम परिणय सुत्र में आबद्ध होगे
  तब यह सूत्र भी ज्ञात हो जाएगा एवं लक्षण भी.."

राजू : -- मास्टर जी ! .....??


" यह प्रश्न तुम्हारी माता से पुछना..... 


मंगलवार, 4 सितंबर 2012

----- ।। मिनिस्टर राजू 33 ।। -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये गव यहीं सिंगरती रहेगी या घास चरने भी जायेगी।।??


             " क्यों तेरे पेट में दर्द क्यूँ हो रहा है ..??"


राजू : -- अब इतने भूषण के पश्चात यह भूसा खाने से तो रही,
             मास्टर जी ! हो गयी आपकी गुड गुड मोर्निंग.....

शनिवार, 1 सितंबर 2012

----- मिनिस्टर राजा -----

" कुटिलिक कटक काट कपट बाँध  समुद्र पाल ।
 काटी काटी कै कटखाहक त्रीलोकेश की चाल ।।" 

----- मिनिस्टर राजू 32 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मेरे माता-पिता ने मुझे नई द्वि चक्र वाहिनी दिलवाई है,


             " अच्छा ! कैसी है "

राजू : -- " मास्टर जी ! बिलकुल मेरे मन के जैसी, वो भी केवल हवा में ही तथा
              हवा से ही बातें करती है"

           " राजू !! तू भी किसी संग्राहलय में संग्रहण करने के योग्य है
              तेरी चप्पल एवं सायकल में अंतर करना कठिन है"
           

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...