सोमवार, 29 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 55 -----

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! आपके पास नापने वाला फीता तो होगा न..??


" हाँ ! हाँ !! राजू है..... ये रहा..,"

राजू : -- मास्टर जी ! इतना बड़ा नहीं लाल किले को थोड़ी न नापना है
             छोटा, छोटा वाला है..,

" हाँ ! हाँ !! राजू छोटा भी है.....ये लो....."


राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! चाँदनी चौंक को भी नहीं नापना है
              और छोटा चाहिए..,

" राजू ! ये बोलो न की 'चाँद' को नापना है.....ये लो छोटा वाला..,"


राजू : -- हाँ ! मास्टर जी ! ये ठीक है.....










रविवार, 28 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 54 -----

राजू : -- " को प्रभु सँग मोहि चितबनिहारा । सिंघबधुहि जिमि ससक सिआरा ।।" अ.का.दो.न.66चौ.4
               मास्टर जी ! तुलसी दास रचित इस चौपाई का अर्थ समझाइये न..,


          " प्रभु के साथ मेरी ओर देखनेवाला कौन है ! जैसे सिंह की स्त्री को खरगोश
             और सियार नहीं देख सकते ।"


राजू : मास्टर जी ! 'अर्थात'!!


 " अर्थात सीता जी कहती हैं जंगल में तुम्हारे जैसे शेर के होते हुवे मुझे कौन
    देख लेगा शेरनी को शेर ही देखेगा, राजू -- सीताराम को ये नहीं पता था कि
    जंगल में दस सिर वाला एक और शेर रहता है जो देखेगा भी और उठा के
    भी ले जाएगा, यदि माया के पीछे भागोगे तो सीता को कोई न कोई तो
    देखेगा ही न..,
                राजू ! राजू !! में तुम्हे पढ़ा रहूँ तुम इधर उधर क्या देख रहे हो..??


राजू : -- मास्टर जी ! आपके नए विद्यार्थी..... !! जाइए जाइए.....उन्हें भी नापीये.....
                    

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 53 -----

" क्यों राजू यदि पैर गरम, पेट नरम,सिर ठंडा तो..??


राजू : -- मास्टर जी ! तो डाक्टरों को मारो डंडा..... किन्तु 
             धीरे से पिछली बारी के P.M., C.M. को मारा था 
             बेचारे आज तक व्हीलचेयर पर हैं.....
             अरे हाँ ! मास्टर जी ! उसके पश्चात आप कहाँ थे?
             थे कहाँ  आप " कुम्भकर्ण की लघु कथा" कहीं के
             न तो बहु के ना ही बही के.....

" राजू ! में अब क्या बनूंगा..??"


राजू : -- मास्टर जी ! आप तो मास्टर ही रहिये 'मत' के दातार मत
             बनिए अन्यथा मुर्ख ही बनेंगे, फिर  इधर उधर  आपरेशन
             करते  फिरेंगें, ये   घोटाले  बाज है  वो  घपला  कर  रहा है
             हमारी न्यायालायें भी बैठी हैं इनकी  रक्षा  हेतु  संजीवनी
             देने के लिए.....
           



             

बुधवार, 24 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 52 -----

राजू : -- मास्टर जी ! हम हर वर्ष रावण को मारते हैं ये रावण मरता क्यों नहीं..??

" ये तो केवल पटाखे छोड़ कर रावण-मरण का मायावी प्रदर्शन है
  रावण के हाथ ही रावण कैसे मरेगा..??

राजू : -- अर्थात..??

"पिछली बारी देखा था न..... देखो.....गौर से.....दूरदर्शन पर.....पुन: प्रसारण.....!!


राजू : -- मास्टर जी ! ज्यादा मत देखो-दिखाओ कहीं
             हमारे मंत्री गणों को शर्म न आने लागे..... 

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी ! -----

" हमारे पुर्व वित्तमंत्री जी माता के चरण पकढ़े बेढे हैं
  उनके भवन में माता का दिया सब कुछ है, माता
  इस बारी उन्हें थोड़ी सी बुद्धि दे दे....." 

सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----

" हमारे देश के कर्णधार जहां चढ़ते-चढ़ते अपनी अपनी विधान सभा एवं संसदीय
  रेखा के ऊपर चढ़ गए , वहीँ मतदाता उतरते-उतरते निर्धन रेखा के निचे आ गए
  इससे पहले की मतदाता और निचे उतरें, ये कर्णधार स्वयं ही उतर जाएँ तो ही
  अच्छा है अन्यथा....." 

गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर जी -----


नेताओं को सभी वस्तुएं या तो निशुल्क या फिर सस्ते में
मिलती  हैं

महँगा-महँगा घर नेता को सस्ते में

महँगी-महँगी भूमि नेता को सस्ते में

महंगे-महंगे कपडे नेता को सस्ते में

महँगी-महँगी गाड़ियां नेता को सस्ते में

भोग-भोजन-भोज नेता को सस्ते में

यहाँ तक 'न्याय भी नेता को ही मिलता है

हमें कुछ नहीं मिलता.....हम मूर्खाधिपति जो हैं
अपना 'मत' भी इन्हीं नेताओं को दे देते हैं.....

----- मिनिस्टर राजू 51 -----

" राजू ! तुम्हे कल लघु कथा लिख कर लाने को कहा था क्यों नहीं लाये..??


राजू : -- मास्टर जी ! में चोटिल हूँ इस लिए..,


"क्यों !! क्या हुवा !!!"


राजू : -- मास्टर जी ! मेरा गाल देखिये कितना सुजा हुवा है..,


" कैसे सुजा..,"


राजू : -- कल किसी बात पर मेरे दोस्तों ने मेरे गाल पर एक थप्पड़ मार दिया,
            तत्पश्चात मेने दूसरा गाल भी आगे कर दिया, फिर तो दस-बीस और
            दे मारे ! कहने लगे बड़ा गांधी बना फिरता है ये बता तेरा वाला नेहरू
            एवं उसके सांप-सपोले कहाँ है, मास्टर जी ! मेरी ये दुर्दशा 'पाकी' के
            कारण हुई है खुद तो चले गए 'नेहरू कट शेरवानी के फैशन' को यहीं
            छोड़ गए.....भुगत मैं रहा हूँ..... 


बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 50 ------

" राजू ! तुम्हारे सगे सबंधी कहाँ रहते हैं..??,"


राजू : -- मास्टर जी ! कुछ महानगर में, कुछ नगर में, कुछ धूर आदिवासी
            क्षेत्र में, कुछ क्षेत्र के पास तथा कुछ सीमा रेखा के आस-पास..!

" अच्छा ! तू कहाँ रहता है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! में उनके पड़ोस में रहता हूँ..,

" अच्छा ! अच्छा !! कल तुम " हमारे कुंभकरण' विषय पर आधारित
  एक लघु कथा लिखकर लाना..!!"

राजू : -- जी ! मास्टर जी !

" ये बताओ यदि एक निकम्मा नाकारा बनिया खाली बैढे क्या करता है..??"

राजू : -- मास्टर जी ! इधर के बर्तन उधर करता है..,


"वैरी गूड ! हमारी सरकारें भी वोही बनिया है देखो.....दूरदर्शन पर दिख रहीं हैं.....


सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 49 -----

राजू : -- मास्टर जी ! माना कि :--
            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           " में सांख्यिकी का अध्यापक थोड़े ही हूँ साख्यिकी के अध्यापक से पूछो
             वही यह आकलन बताएँगे..,

राजू : -- मास्टर जी ! में यह प्रश्न सीधे "प्रधान" अध्यापक से ही पूछ लेता हूँ

           माना कि : -- आप "प्रधान" अध्यापक हैं..,

            मैं सड़क पर खड़ा हुवा एक सामान्य व्यक्ति हूँ..,
            पैसे उपजाने लायक मेरे पास कोई कार्य नहीं है..,
            अत: पास में पैसे नहीं है..,
            जीवन का निर्वहन का साधन पारिवारिक आय है..,
            न्यायालय में एक वाद प्रस्तुत करना है..,

            इस हेतु शासकीय अधिवक्ता की उपलब्धता प्राप्त करने में
            कितनी अवधी व कितने पैसे लगेंगे??, जबकि यह प्राप्ति
            आवागमन के साधन से ही संभव हो..,

            उपलब्धता प्राप्ति के पश्चात न्यायालय में पक्ष रखने हेतु
            केवल प्रथम उपस्थिति में कितनी अवधी व पैसे लगेंगे??

            कृपया आकलन करके बतलाइये न..,

           मुझे यह ज्ञात था कि आपको सुनाई नहीं देता है..... बधीर हैं.....
           में श्रवण यन्त्र साथ लाया हूँ..... ये लीजिये लग गया.....कान में 

           मुझे यह भी ज्ञात था कि आप मूक नहीं हैं किन्तु "मौन" हैं 
           मैं ध्वनी विस्तारक यन्त्र भी साथ में लाया हूँ.....ये नीचे लग गया.....
           लो...गांधी जी का ऐनक तो लाया ही नहीं बिना ऐनक तो आपको दिखाई नहीं देता 
  
           "प्रधान" अध्यापक जी ! ये सारी वस्तुवें मुझे आपके अंगरक्षक ने उपलब्ध करवाई है 
            कहने लगे ले जाओ, आवश्यकता पड़ेगी

            अब कृपया उपरोक्त आंकलन के सह यह भी ज्ञात कीजिये कि  न्यायालय में 
            अपना पक्ष रखने व न्याय प्राप्त करने  में कितनी अवधि व कीतने पैसे लंगेंगे 

            " बहुत पैसे लगेंगे वो तेरे पास हैं नहीं"

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! ये पैसे लगाने के लिए लगते कहाँ है..??


           " पेड़ पर..."

राजू : -- "प्रधान" अध्यापक जी ! फिर तो में अपना 'मत' पेड़ को ही दूंगा, 
             ऐसी सड़ी हुई व्यवस्था को क्यूँ दूँ जहां मुझे न्यायालय में केवल मात्र 
             प्रस्तुत होने में ही बहुंत पैसे व्यय करने हो.....   



 




गुरुवार, 11 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 48 -----

राजू : -- मास्टर जी ! 'अंतरराष्ट्रीय साला' किसे कहते हैं..??


" दुनिया की सारी महिलायें जिसकी माँ-बहन हों उसे
  'अंतरराष्ट्रीय साला' अर्थात 'जगत साला' कहते हैं....."


राजू : -- मास्टर जी ! .........'वो' भी..??


" हाँ........'वो' भी....."



मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 47 -----

राजू : -- मास्टर जी ! लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल किसे खाते हैं..??


" जब 'राजनेता' दिल्ली में बैठ कर हरियाणा के आंसुओं से गुजरात के मतों
  को तोले तो उसे लोकतांत्रिक राजनीति की तिर्यक चाल कहते हैं..!!


राजू : -- मास्टर जी ! कड़क धुप में, धूल धूसरित होकर, भूखी-प्यासी जनता को
           वातानुकूलित लम्बी गाड़ी से उतर कर महंगे महंगे वस्त्र धारी, ऊँचे-ऊँचे
           छाँवदार मंचों पर विराजमान नेता को 'मत' दान करने को कौन कहता है..??


         " चुनाव आयोग..,"


राजू : -- अर्थात, एक भ्रष्टाचारी भोग विलासित लोकतंत्र को मत दान कर सुदृढ करो,
            मास्टर जी ! ये चुनाव आयोग रहता कहाँ है..??


" और अधिक प्रश्न मत कर अन्यथा शासन की आबरू एवं आइब्रो दोनों उतर जायेगी....."


रविवार, 7 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 46 -----

  " राजू ! कल तुम माँल में क्या कर रहे थे..??"


राजू : -- मास्टर जी ! माल देख रहा था..!!


" तुम्हारा माली कहाँ था..वो तुम्हे क्यूँ नहीं देख रहा था..??"


राजू : -- मास्टर जी ! मैं तो माली की वनमाला का एक टूटा
            हुवा फूल हूँ.....कभी इस चरण में.....कभी उस चरण में..,


" तू वनमाली का फुल नहीं उसके वन का टूटा हुवा बाँस है.....,
  कभी इस अधर में.....कभी उस अधर में.....


राजू : -- मास्टर जी ! आप माँल में क्या कर रहे थे..??


" मैं वहां अन्तरराष्ट्रीय साडू को ढूंड रहा था..


राजू : -- मास्टर जी ! मिला..??


" मिला भी.....और मिली भी..,

राजू : -- मास्टर जी ! कौन सी वाली मिली..??

" जगत भोजाई मिली.....".

बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 45 -----

राजू : -- मास्टर जी ! कल मैने देखा एक सरदार महामात्य को देख कर
            शर्मा रहा था..!!


          " अच्छा !! महामात्य को देख सरदार शर्माते भी हैं..??"


 राजू : -- मास्टर जी !! वो सरदार था सरदारनी नहीं था..!!


         " अच्छा ! अच्छा !! तत पश्चात तुमके क्या कहा..??"


राजू : -- मास्टर जी मैने न  उसकी थोड़ी सी शर्म वर्म पोछी एवं
            आपका वाला सुविचार बोल दिया..!!


         " अच्छा ! कौन सा वाला बोला ..??"

राजू : -- मास्टर जी !! वोही वाला "सरदार महामात्य हो सकते हैं
                                    महामात्य सरदार थोड़ी न होता है....."


        

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 44 -----

" राजू ! ये बताओ कि झाँसी वाली रानी लक्ष्मी बाई का जन्म कब हुवा था..??


राजू : -- मास्टर जी ! तब की बारी अंग्रेजी साम्राज्य के विस्तार के पश्चात
            तथा अब की बारी ईस्ट इंडिया कम्पनी के पदार्पण के पूर्व..!!


" अच्छा !! इस बारी बापू का जन्म कब होगा स्वतंत्रता के पूर्व या पश्चात..??"



राजू : - मास्टर जी ! बापू का जन्म यथावत रहेगा किन्तु इस बारी प्रथम
           एवं द्वितीय प्रधानमंत्री का जन्म कल होयेगा..!!
                          मास्टर जी ! कल मे अब की बारी की स्वतंत्रता के 65
           वर्ष पश्चात की पटकथा पर निबंध लिख कर लाउंगा..!!

" कल छूट्टी है परसों लिख कर लाना.....


----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...