शनिवार, 2 अगस्त 2025

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान 

तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१|| 

:-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वयं उनका उल्लंघन करते हैं और देश के जन साधारण से उनके पालन की अपेक्षा करते हैं......

सभागार बैठे रचे थाप बिधेय विधान ।
जन मानस मनाए तिन्ह आप चले मन मान॥२|| 
:-- संसद में सांसदों ने विधि के विधायनों की थप्पियाँ लगा दी है वह जन मानस से उनके अनुशरण की अपेक्षा कर स्वयं स्वेच्छानुसार आचरण करते है.....

पुरबल बिधि बिधान रचित राखे ऊँच मचान l
सभा सदस बैठे करे नवल नवल निर्मान ll३|| 
:-- पूर्व में रचे विधि विधेयक रचित हुवे ऊंचे गृहमंचों पर रखे धूलधूसरित हो रहे हैं सांसद महोदय संसद में बैठे पुनः नए नए विधान की रचना हेतु आतुर हो रहे हैं......

"अनपेक्षित नियम विधान का निर्माण जन मानस के धन व समय का अपव्यय है.....
"अपेक्षित नियम विधानों के निर्माण की उपेक्षा सभा सदनों को औचित्यहीन करती है.....

स्वहित साधन हुँति करे सत्ता जब षड़यंत्र ।
तहाँ भरोसा तोड़ता जन गण का यह तंत्र ॥४|| 
:-- स्वहित साधने हेतु जब सत्ता षडयंत्र करने लगती लोकतांत्रिक गणराज्य के प्रति विश्वास पर जनमानस को संदेह होने लगता है...

राज करके अँग्रेज अब गए भारत को जान ।
याकी लोक समृद्धि को देवें आदर मान ॥५|| 
:-- भारत पर शासन कर अंग्रेजों ने भारत वर्ष को पहचान लिया है अब वह इसकी लोक समृद्धि का आदर सम्मान करने लगे है .....
:-- भारतं शासनं कृत्वा आङ्ग्लाः भारतं ज्ञातवन्तः अधुना तस्य समृद्धेः आदरं कर्तुं आरब्धाः।

सीवाँ के सैनी अजहुँ चुपे चाप गए बैठ ।
एहि दरसाए देस भीत नहीं घूस की पैठ॥६|| 
:- - सीमा पर सैनिकों द्वारा मौन का अवलंबन यह दर्शाता है कि अब देश में घूसपैठ नहीं हो रही है.....
:-- यदि घुसपैठ निर्बाध रूप से हो रही है तो सैनिकों का मौनावलंबन क्यूँ है.....?

दोष पराए देस का ताकु ग्रंथ अनुहार l 
कही सके तहँ जाए को सुधिजन कहो विचार ll७|| 
:-- पराए देशों के दोषों को उनके धार्मिक ग्रंथों का उदाहरण देकर उन्हीं के देश में कहने का साहस है ? सुबुद्ध सुज्ञानि जन यह विचार कर कहें... ..
:-- जगत डैडी को कहिए जाकर :-- आपका भगवान कीलों में क्यूँ लटका हुआ है ये कौन सा वाद है..... मनुवाद है या अमनुवाद... .. ?एक आध परमाणु पूछने वाले के सिर में अवश्य फूट जाएगा... ..

देस धर्म सद्ग्रंथ की करतब फिरे बुराए ।
सासन हर को चाहिये ताको अबरोधाएँ॥८|| 
:-- हमारे देश में प्रादुर्भूत धर्म व उसके सद्ग्रथों की हमारे अपने ही देश में निंदा करते फिर रहें लोगों के ऐसे निंदनिय कृत्य को शासन कर्त्ताओं द्वारा तत्काल प्रतिबंधित करना चाहिए.....

भारत तिन्हनि कारिआ बड़ा पाल कर पोस ।
देय स्वारथ आपने धर्म ग्रंथ को दोष ॥९|| 
:-- वस्तुतः भारत ने ऐसे लोगों को पाल पोश कर बड़ा किया है जो अपना हित साधने हेतु भारत के धर्म ग्रंथों की निंदाभारत में ही करते फिर रहे हैं......
होत सक्ति ते सामरथ करे नहीं उपयोग । 
हे भारत तव लोग सो नहीं सिंहासन जोग ॥१०|| 
:-- शक्ति सामर्थ्य होते हुवे भी उसका उपयोग न करते हों तब हे भारत वह सत्ता सूत्र धारी तुम्हारे सिंहासन के योग्य नहीं है.....

देस धर्म निज छाँड़ जो, करत फिरत पाखंड ।
सासन हर दैं ताहि को कठोर बिधि कर दंड ॥११|| 
:--अपने देश के प्रादुर्भूत धर्म का त्यागकर जो धर्म का पाखंड करतेहुवे दूसरों के धर्मग्रंथों की निंदा करने में संलग्न है शासनकर्त्ता को ऐसे पाखंडियों हेतु विधेय रचितकर कठोरतम दंड केप्रावधान करना चाहिए

सीवाँ के सैनी अजहुँ चुपे चाप गए बैठ। 
एहि दरसाए देस भीत नहीं घूस की पैठ॥१२|| 
:- - सीमा पर सैनिकों द्वारा मौन का अवलंबन यह दर्शाता है कि अब देश में घूसपैठ नहीं हो रही है.....:-- यदि घुसपैठ निर्बाध रूप से हो रही है तो सैनिकों का मौनावलंबन क्यूँ है.....?












शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

----- ॥ दोहा-दशम ३६२ ॥ -----,

>> स्वतंत्रता किसे कहते हैं.....?
--------किसी राष्ट्र की सम्प्रभुता के स्वत्व पर उसके मूलभूत का अधिकार स्वाधिनता है------ 

 मूलभूत को प्रभुत्व के स्वत्व का अधिकार | 
  राष्ट्र की स्वतंत्रता करो तब स्वीकार ||१|| 
: -- राष्ट्र की प्रभुसत्ता के सत्व पर जब मूल भूत का अधिकार हो स्वतंत्रता तभी स्वीकार्य हो 
  इस्लाम भारत का मूलभूत नहीं है तथापि उसे उसकी संप्रभुता के स्वत्व का अधिकार प्राप्त है . . . . .
  • एक निश्चित भूखंड के लिए 'राष्ट्र' ( नेशन ) एवं वहां के वासियों हेतु 'जन' (प्यूपिल)शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम वैदिक काल में किया गया था..... ( ये अंग्रेजों और कांग्रेस के इतिहास में लिखा है ) यह इतिहास सिद्ध करता है कि सनातन भारत के मूल में है......
बंगाल पर हिंदुओं परअत्याचार की घटनाए सत्ताधारियों के साहसिक निर्णयों की क्षमता के अभाव को प्रदर्शित करती हैं हम भारत वंशियों ने आपातकाल का केवल दुरूपयोग होते ही देखा है


धर्म हेतु को देस है,देस हेतु सँविधान | 
मानुज के नियमन हेतु सकल नेम निरमान ||२|| 
: -- कोई राष्ट्र धर्म के हेतु है जहाँ धर्म है वहां राष्ट्र है कोई संविधान राष्ट्र के लिए है जहाँ राष्ट्र है वहां संविधान है समस्त नियमों का निर्माण मनुष्य के लिए हैं जहाँ मनुष्य है वहां नियम है |  

अर्थात : -- किसी राष्ट्र का अस्तित्व धर्म से है जहाँ धर्म नहीं था उन राष्ट्रों का अस्तित्व अस्त हो गया विश्व में सनातन काल से भारत का अस्तित्व उदय मान है कारण कि यहाँ धर्म  सनातन काल से स्थापित है..... 

धर्म हेतु को देस है,देस हेतु सँविधान | 
मानुज के नियमन हेतु सकल नेम निरमान ||३ ||  
: -- कोई राष्ट्र धर्म के हेतु है जहाँ धर्म है वहां राष्ट्र है कोई संविधान राष्ट्र के लिए है जहाँ राष्ट्र है वहां संविधान है समस्त नियमों का निर्माण मनुष्य के लिए हैं जहाँ मनुष्य है वहां नियम है |  

देस बड़ा सँविधान से बड़ा देस से धर्म | 
जन जन के नियमन हेतु सकल नियम निरमान ||४ || 
:-- संविधान से राष्ट्र सर्वोपरि होता है राष्ट्र से धर्म सर्वोपरि होता है समस्त नियमों का निर्माण राष्ट्र जनों पर  नियंत्रण और अनुशासन हेतु किया जाता है उसपर शासन हेतु नही.....  

यदि कोई जनसंचालन तंत्र तत्संबधित राष्ट्र की सम्प्रभुता अक्षुण्ण रखने में असमर्थ हो तब उक्त राष्ट्र के मूलभूत को ऐसे तंत्र के विकल्प का विचार करना चाहिए....

नर नारी का सौहृदय पश्चिम हुँत अधुनात | 
भारत देस निबास यह तत्त्व परम पुरात ||५ 
:--स्त्री पुरुष की मैत्री पश्चिम देश के लिए आधुनिकता है भारत वंशियों में यह मैत्री परम पुरातात्त्विक स्वरूप में उपस्थित है.....

मंदिर मंदिर बिराजे राधिका घन स्याम | 
दोउ सनेह की मूर्ति दोउ कृपा के धाम ||६|| 
: - मंदिर मंदिर में राधिका और घन श्याम दोनों मैत्रीय स्नेह व्की कृपा के धाम स्वरूप में विराजित हैं | 

यह जवाहर नेहरू की बुद्धि का था विकार | 
नरनारी की मैत्रिता आधुनिक है विचार ||७|| 
: - वस्तुत: यह जवाहर लाल नेहरू की बुद्धि का एक विकार था कि स्त्री पुरुष की मित्रता एक आधुनिक विचार है 

होता गया ऐसा इस विचार का परिणाम | 
नहीं अब इसके वंश का प्रयागराज में नाम ||८||  
: - इस विचार का फिर ऐसा परिणाम होता गया कि अब प्रयागराज में उसके वंश का नाम तक नहीं है 

फिर दूर इस वंशज से हुए राम घनश्याम | 
अब इस वंशज का धर्म है ईसाई इस्लाम ||९||  
: - फिर शनै: शनै: इस वंशज से राम कृष्ण की संस्कृति दूर होती चली गई वर्तमान में इसके वंशजों का धर्म या तो ईसाई है या इस्लाम है 
 
सारांश में भारत में स्त्री पुरुष की मित्रता एक पुरातात्त्विक विचार है पश्चिम देशों के लिए यह आधुनिक है स्त्री पुरुष की मित्रता को आधुनिक विचार कहने वाले नेहरू की विचार धारा के लोग हैं जिसके परिणाम में हमें इसके वंशज स्पष्ट दृष्टिगत हो रहे हैं  

भाषा संस्कृति से है भारत देस समृद्ध | 
विचारों की संकुलता से पश्चिम है दारिद्र ||१०||  
भाषा व् संस्कृति से भारत एक समृद्ध देश है विचारों की परिपूर्णता से पश्चिमी देश अभी दरिद्र है 



गुरुवार, 26 जून 2025

----- मिनिस्टर राजू 189 -----,

 '' राजू और मास्टर''

पता है राजू अब ये अंग्रेज के बच्चे भी आर्यों के आगमन की फैली भ्रांतियों जैसी भ्रांतियां फैलाकर दुनिया भर में क्या कहते फिरते हैं..... ?

राजू : -- क्या कहते फिरते हैं मास्टर जी.....?

" हम भारत से आए थे"

राजू : -- हाँ मास्टर जी ! अब हम लोंग को भी श्रीमान, श्रीमान नहीं बोलना चाहिए । अन्यथा ये कल को कह देंगे ये तो अंदमान निकोबार से आए थे और कारोबार करते थे.....

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...