बुधवार, 5 जुलाई 2017

----- मिनिस्टर राजू १८६ -----

राजू ! पता है डाकू जब डाका डाल लेते है तब सबसे पहले बन्दुक बिसाते है फिर घोड़े.....

राजू : -- मास्टर जी हमारे लिये.....?

" धत अपने दल के लिए, हमारे लिए तो वो गोली बिसाते हैं.....,

राजू : -- वोई मैं कहूं घोटाले की दुर्गंध किधर से आ रही है.....,

" आती है, आती है, रक्षा के पण ठानने आती है..... 

शनिवार, 17 जून 2017

----- मिनिस्टर राजू १८६ -----

राजू : -- मास्टर जी ! अब चंबल में डाकू क्यों नहीं दिखाई देते.....?

" वे सभी दल बनाकर मंत्री बन गए है इसलिए दिखाई नहीं देते....."

राजू : -- अच्छा मास्टर जी ! ये नक्सली भी क्या जंगल-जंगल लगा रखे हैं दल बनाकर मंत्री काहे नहीं बन जाते वहां भी तो वोइच करने को मिलेगा जो यहाँ कर रहे हैं | वैसे भी लोकतंत्र है कोई कुछ भी बन सकता है और कुछ भी कर सकता है.....?

" प्रयोजन अर्थात मुद्दा कहाँ से लाएँगे.....? "

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे पास से ले लेंगे चिपको आन्दोलन रहा, अपना भूमि-अधिग्रहण रहा , पेड़- लगाओ -जंगल बचाओ रहा, उपज उगाओ-खेत बचाओ रहा निर्मल नदी आंदोलन रहा,  कहता ये संविधान-सबका जीवन एक समान, भारतीय को अधिकार - प्रवासी बहार रहा घिसेपिटे मुद्दे और भी बहुंत से हैं आरक्षण संरक्षण  निर्धनता और वो टेक्स वाला वो तो बड़ा धासूँ मुद्दा है वेस्ट इण्डिया कंपनी के शासक वाला , अरे मंदिर भी वो नहीं बना रहे हैं तो ये बना दें ले चलें अयोध्या एक बस कौंन रोकेगा.....?

संत महंत.....?
           


----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...