शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

----- ॥ दोहा-दशम ३६२ ॥ -----,

>> स्वतंत्रता किसे कहते हैं.....?
--------किसी राष्ट्र की सम्प्रभुता के स्वत्व पर उसके मूलभूत का अधिकार स्वाधिनता है------ 

 मूलभूत को प्रभुत्व के स्वत्व का अधिकार | 
  राष्ट्र की स्वतंत्रता करो तब स्वीकार ||१|| 
: -- राष्ट्र की प्रभुसत्ता के सत्व पर जब मूल भूत का अधिकार हो स्वतंत्रता तभी स्वीकार्य हो 
  इस्लाम भारत का मूलभूत नहीं है तथापि उसे उसकी संप्रभुता के स्वत्व का अधिकार प्राप्त है . . . . .
  • एक निश्चित भूखंड के लिए 'राष्ट्र' ( नेशन ) एवं वहां के वासियों हेतु 'जन' (प्यूपिल)शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम वैदिक काल में किया गया था..... ( ये अंग्रेजों और कांग्रेस के इतिहास में लिखा है ) यह इतिहास सिद्ध करता है कि सनातन भारत के मूल में है......
बंगाल पर हिंदुओं परअत्याचार की घटनाए सत्ताधारियों के साहसिक निर्णयों की क्षमता के अभाव को प्रदर्शित करती हैं हम भारत वंशियों ने आपातकाल का केवल दुरूपयोग होते ही देखा है


धर्म हेतु को देस है,देस हेतु सँविधान | 
मानुज के नियमन हेतु सकल नेम निरमान ||२|| 
: -- कोई राष्ट्र धर्म के हेतु है जहाँ धर्म है वहां राष्ट्र है कोई संविधान राष्ट्र के लिए है जहाँ राष्ट्र है वहां संविधान है समस्त नियमों का निर्माण मनुष्य के लिए हैं जहाँ मनुष्य है वहां नियम है |  

अर्थात : -- किसी राष्ट्र का अस्तित्व धर्म से है जहाँ धर्म नहीं था उन राष्ट्रों का अस्तित्व अस्त हो गया विश्व में सनातन काल से भारत का अस्तित्व उदय मान है कारण कि यहाँ धर्म  सनातन काल से स्थापित है..... 

धर्म हेतु को देस है,देस हेतु सँविधान | 
मानुज के नियमन हेतु सकल नेम निरमान ||३ ||  
: -- कोई राष्ट्र धर्म के हेतु है जहाँ धर्म है वहां राष्ट्र है कोई संविधान राष्ट्र के लिए है जहाँ राष्ट्र है वहां संविधान है समस्त नियमों का निर्माण मनुष्य के लिए हैं जहाँ मनुष्य है वहां नियम है |  

देस बड़ा सँविधान से बड़ा देस से धर्म | 
जन जन के नियमन हेतु सकल नियम निरमान ||४ || 
:-- संविधान से राष्ट्र सर्वोपरि होता है राष्ट्र से धर्म सर्वोपरि होता है समस्त नियमों का निर्माण राष्ट्र जनों पर  नियंत्रण और अनुशासन हेतु किया जाता है उसपर शासन हेतु नही.....  

यदि कोई जनसंचालन तंत्र तत्संबधित राष्ट्र की सम्प्रभुता अक्षुण्ण रखने में असमर्थ हो तब उक्त राष्ट्र के मूलभूत को ऐसे तंत्र के विकल्प का विचार करना चाहिए....

नर नारी का सौहृदय पश्चिम हुँत अधुनात | 
भारत देस निबास यह तत्त्व परम पुरात ||५ 
:--स्त्री पुरुष की मैत्री पश्चिम देश के लिए आधुनिकता है भारत वंशियों में यह मैत्री परम पुरातात्त्विक स्वरूप में उपस्थित है.....

मंदिर मंदिर बिराजे राधिका घन स्याम | 
दोउ सनेह की मूर्ति दोउ कृपा के धाम ||६|| 
: - मंदिर मंदिर में राधिका और घन श्याम दोनों मैत्रीय स्नेह व्की कृपा के धाम स्वरूप में विराजित हैं | 

यह जवाहर नेहरू की बुद्धि का था विकार | 
नरनारी की मैत्रिता आधुनिक है विचार ||७|| 
: - वस्तुत: यह जवाहर लाल नेहरू की बुद्धि का एक विकार था कि स्त्री पुरुष की मित्रता एक आधुनिक विचार है 

होता गया ऐसा इस विचार का परिणाम | 
नहीं अब इसके वंश का प्रयागराज में नाम ||८||  
: - इस विचार का फिर ऐसा परिणाम होता गया कि अब प्रयागराज में उसके वंश का नाम तक नहीं है 

फिर दूर इस वंशज से हुए राम घनश्याम | 
अब इस वंशज का धर्म है ईसाई इस्लाम ||९||  
: - फिर शनै: शनै: इस वंशज से राम कृष्ण की संस्कृति दूर होती चली गई वर्तमान में इसके वंशजों का धर्म या तो ईसाई है या इस्लाम है 
 
सारांश में भारत में स्त्री पुरुष की मित्रता एक पुरातात्त्विक विचार है पश्चिम देशों के लिए यह आधुनिक है स्त्री पुरुष की मित्रता को आधुनिक विचार कहने वाले नेहरू की विचार धारा के लोग हैं जिसके परिणाम में हमें इसके वंशज स्पष्ट दृष्टिगत हो रहे हैं  

भाषा संस्कृति से है भारत देस समृद्ध | 
विचारों की संकुलता से पश्चिम है दारिद्र ||१०||  
भाषा व् संस्कृति से भारत एक समृद्ध देश है विचारों की परिपूर्णता से पश्चिमी देश अभी दरिद्र है 



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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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