गुरुवार, 26 जून 2025

----- मिनिस्टर राजू 189 -----,

 '' राजू और मास्टर''

पता है राजू अब ये अंग्रेज के बच्चे भी आर्यों के आगमन की फैली भ्रांतियों जैसी भ्रांतियां फैलाकर दुनिया भर में क्या कहते फिरते हैं..... ?

राजू : -- क्या कहते फिरते हैं मास्टर जी.....?

" हम भारत से आए थे"

राजू : -- हाँ मास्टर जी ! अब हम लोंग को भी श्रीमान, श्रीमान नहीं बोलना चाहिए । अन्यथा ये कल को कह देंगे ये तो अंदमान निकोबार से आए थे और कारोबार करते थे.....

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...