भारत सब कइ होइ जूँ भया जगत का देस |
बाकी भूमि होत गई सेस संग अवसेस || ३४६१ ||
भावार्थ : - भारत देस जब भारतियों का न होकर सबका देश हो गया तब उसकी भूमि खंड-खंड होकर शेष से अवशेष मात्र रह गई |
अजहुँ सार्बिक होइहि त रहिइहिं नहि अबसेष |
सरनार्थि होइ जाइब देसज राउर देस || ३४६२ ||
भावार्थ : - यदि अभी भी भारत सबका देश होगा तो यह भूमि अवशेष मात्र भी नहीं रहेगी और भारतीय अपने ही देश में शरणार्थी होकर रह जाएंगे |
को देस भू तिन्हनि करि भयउ मूलगत जेतु |
पर ते को निजबसताइ गहिब जात तिन हेतु ||३४६३ ||
भावार्थ : - कोई राष्ट्र अथवा राष्ट्र भूमि पर प्रभुत्व होता है जो उस राष्ट्र के निर्माण में मूलभूत होते हों | दूसरों के अधीनस्थ कोई स्वत्व अथवा स्वाधीनता उस मूलभूत के हेतु ही प्राप्त की जाती है |
कोई राष्ट्र उनका होता है जो उसके निर्माण में मूलभूत हैं कोई अधीनता उनके विरुद्ध कारित की जाती है कोई स्वाधीनता उनके निमित्त प्राप्त की जाती है
अधीन प्रभुत स्वाधीन होत परायो हूँत |
स्वाधीन तब होइ नहि वाके मूरी भूत || ४३४६ ||
भावार्थ : - किसी राष्ट्र के अधीन हुवे सम्प्रभुत्व की स्वाधीनता यदि राष्ट्र से भिन्न व्यक्ति, व्यक्तियों अथवा समुदाय हेतु हो तब उसके मूलभूत स्वाधीन न होकर पराधीन ही रहते हैं |
होत जात सो देस निज संप्रभूत तैं दूर |
मौलि अधिकृति ते अधिकृत भवतु परायो मूर || ३४६५ ||
भावार्थ : - वह राष्ट्र अपने सम्प्रभुत्व से दूर होता चला जाता है जिसके संविधान में स्वयं से भिन्न अन्योदर्य मूल, मौलिक अधिकारों से संपन्न हों |
एहि देस स्वाधीन किए सीस बाँधि तलवार |
कहा आधिकरिता बहुरि करतन सासनहार || ३४६६ ||
भावार्थ : - सिर पर तलवार बांधकर अपना रक्त बहाते हुवे इस देश को क्या इस हेतु स्वाधीन किया गया था कि उसका आधिकर्ता ही अधिकारों से समृद्ध होकर उसपर पुनश्च शासन करे |
कहा प्रथम आधिकरिता केर उत्तराधिकारि |
दुज ते लहि स्वाम पुनि देइ जाति करधारि || ३४६७ ||
भावार्थ : - किसी स्वामी द्वारा अपनी सम्पति पर द्वितीय बलात आधिपत्य कर्ता से प्राप्त किया गया स्वामित्व क्या प्रथम बलात आधिपत्य कर्ता अथवा उसके उत्तराधिकारी वंशजों को पुनश्च हस्तांतरित की जाती है क्या |
प्रभुत बसीभूत भै पुनि प्रभुता भइ तब दासि |
आधिकर्ताधिबासि ही भयो बहुरि जबु सासि || ३४६८ ||
भावार्थ : - ( किन्तु भारत के सत्ताधारियों ने ऐसा किया ) स्वाधीनता पश्चात जब अधिवासी अधीनकर्ता को शासन करने का अधिकार प्राप्त हुवा तब देश का सम्प्रभुत्व उसके वशीभूत हो गया और उसकी साधन सम्पतियाँ उसकी पुनश्च दासी हो गईं |
एहि पाटल बर्नारुनिम पाहन कर इतिहास |
कहत अधिबासि कर रचे करत देस कहुँ दास || ३४६९ ||
भावार्थ : - यह लालगुलाबी पत्थरों का इतिहास इस बात का साक्ष्य है कि इसे स्थायी रूप से निवासित एक भिन्न राष्ट्र के धार्मिक समुदाय ने इस राष्ट्र को अधीन करते हुवे रचा था |
खैँचते एकै रेख ते देस भया परदेस |
परबस पड़िया बासिआ तहँ बासी रह सेस || ३४७० ||
भावार्थ : -एक रेखा खींचते ही किसी के लिए यह देश विदेश हो गया, और इस राष्ट्र का मूलभूत होकर भी वह स्वाधीनता से शेष होकर पराए के वशीभूत ही रहा |
बाकी भूमि होत गई सेस संग अवसेस || ३४६१ ||
भावार्थ : - भारत देस जब भारतियों का न होकर सबका देश हो गया तब उसकी भूमि खंड-खंड होकर शेष से अवशेष मात्र रह गई |
अजहुँ सार्बिक होइहि त रहिइहिं नहि अबसेष |
सरनार्थि होइ जाइब देसज राउर देस || ३४६२ ||
भावार्थ : - यदि अभी भी भारत सबका देश होगा तो यह भूमि अवशेष मात्र भी नहीं रहेगी और भारतीय अपने ही देश में शरणार्थी होकर रह जाएंगे |
को देस भू तिन्हनि करि भयउ मूलगत जेतु |
पर ते को निजबसताइ गहिब जात तिन हेतु ||३४६३ ||
भावार्थ : - कोई राष्ट्र अथवा राष्ट्र भूमि पर प्रभुत्व होता है जो उस राष्ट्र के निर्माण में मूलभूत होते हों | दूसरों के अधीनस्थ कोई स्वत्व अथवा स्वाधीनता उस मूलभूत के हेतु ही प्राप्त की जाती है |
कोई राष्ट्र उनका होता है जो उसके निर्माण में मूलभूत हैं कोई अधीनता उनके विरुद्ध कारित की जाती है कोई स्वाधीनता उनके निमित्त प्राप्त की जाती है
अधीन प्रभुत स्वाधीन होत परायो हूँत |
स्वाधीन तब होइ नहि वाके मूरी भूत || ४३४६ ||
भावार्थ : - किसी राष्ट्र के अधीन हुवे सम्प्रभुत्व की स्वाधीनता यदि राष्ट्र से भिन्न व्यक्ति, व्यक्तियों अथवा समुदाय हेतु हो तब उसके मूलभूत स्वाधीन न होकर पराधीन ही रहते हैं |
होत जात सो देस निज संप्रभूत तैं दूर |
मौलि अधिकृति ते अधिकृत भवतु परायो मूर || ३४६५ ||
भावार्थ : - वह राष्ट्र अपने सम्प्रभुत्व से दूर होता चला जाता है जिसके संविधान में स्वयं से भिन्न अन्योदर्य मूल, मौलिक अधिकारों से संपन्न हों |
एहि देस स्वाधीन किए सीस बाँधि तलवार |
कहा आधिकरिता बहुरि करतन सासनहार || ३४६६ ||
भावार्थ : - सिर पर तलवार बांधकर अपना रक्त बहाते हुवे इस देश को क्या इस हेतु स्वाधीन किया गया था कि उसका आधिकर्ता ही अधिकारों से समृद्ध होकर उसपर पुनश्च शासन करे |
कहा प्रथम आधिकरिता केर उत्तराधिकारि |
दुज ते लहि स्वाम पुनि देइ जाति करधारि || ३४६७ ||
भावार्थ : - किसी स्वामी द्वारा अपनी सम्पति पर द्वितीय बलात आधिपत्य कर्ता से प्राप्त किया गया स्वामित्व क्या प्रथम बलात आधिपत्य कर्ता अथवा उसके उत्तराधिकारी वंशजों को पुनश्च हस्तांतरित की जाती है क्या |
प्रभुत बसीभूत भै पुनि प्रभुता भइ तब दासि |
आधिकर्ताधिबासि ही भयो बहुरि जबु सासि || ३४६८ ||
भावार्थ : - ( किन्तु भारत के सत्ताधारियों ने ऐसा किया ) स्वाधीनता पश्चात जब अधिवासी अधीनकर्ता को शासन करने का अधिकार प्राप्त हुवा तब देश का सम्प्रभुत्व उसके वशीभूत हो गया और उसकी साधन सम्पतियाँ उसकी पुनश्च दासी हो गईं |
एहि पाटल बर्नारुनिम पाहन कर इतिहास |
कहत अधिबासि कर रचे करत देस कहुँ दास || ३४६९ ||
भावार्थ : - यह लालगुलाबी पत्थरों का इतिहास इस बात का साक्ष्य है कि इसे स्थायी रूप से निवासित एक भिन्न राष्ट्र के धार्मिक समुदाय ने इस राष्ट्र को अधीन करते हुवे रचा था |
खैँचते एकै रेख ते देस भया परदेस |
परबस पड़िया बासिआ तहँ बासी रह सेस || ३४७० ||
भावार्थ : -एक रेखा खींचते ही किसी के लिए यह देश विदेश हो गया, और इस राष्ट्र का मूलभूत होकर भी वह स्वाधीनता से शेष होकर पराए के वशीभूत ही रहा |
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