राजू : - मास्टरजी ! तीन चार सौ वर्ष पश्चात जब हम लगभग सभी भारतीय संकरित हो जाएंगे तब हमें जाति का महत्व समझ आएगा..,
मास्टरजी : - तब अमेरिका बोलेगा ई देखो धर्म-जात्ति.....और हम बोलेंगे ऐसो पतंगे तो हमने उड़ा उड़ा के कटवा दी हैं.....
मास्टरजी : - तब अमेरिका बोलेगा ई देखो धर्म-जात्ति.....और हम बोलेंगे ऐसो पतंगे तो हमने उड़ा उड़ा के कटवा दी हैं.....
राजू : - हाँ! तबतक ईंधन के सारे स्त्रोत समाप्त हो चुके होंगे और वो गोमय के कंडे की आंच पर सैंकी गई रोटी से गुड़ और माखन का स्वाद लेकर कौन सा गाना गाएगा.....?
मास्टर जी : -- अरे वही ह्रदय में सनेह हो तो छाछ भी दही बन जाती है..,
राजू : - तब भारत बोलेगा इसकी दही की.., ऐ अफगानिस्तान दे तो इसके कान के नीचे..,
मास्टर जी : -- लो वो इंडिआ के बोलने से थोड़ ही दे देगा..,
और फिर इधर ''बहनजी'' के साथ गठबंधन करने वाला इस्लाम अपने विवाहिक अवसरों पर छंद पडेगा
राजू : - कौन सा वाला..?
मास्टर जी : -- अरे वही ! छन पकैया छन पकैया छन्नी ऊपर गाछ |
जनम संगिनि माखन सी साली खट्टी छाछ ||
और हम भारतीयों की हम भारत की संतानों की तो दास्ताँ तक न होगी दास्तानों में
हम ''मैक मोहन सींग खान'' बने पाषाण युग की कोई नई दास्ताँ लिख रहे होंगे.....
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