शनिवार, 17 जून 2017

----- मिनिस्टर राजू १८६ -----

राजू : -- मास्टर जी ! अब चंबल में डाकू क्यों नहीं दिखाई देते.....?

" वे सभी दल बनाकर मंत्री बन गए है इसलिए दिखाई नहीं देते....."

राजू : -- अच्छा मास्टर जी ! ये नक्सली भी क्या जंगल-जंगल लगा रखे हैं दल बनाकर मंत्री काहे नहीं बन जाते वहां भी तो वोइच करने को मिलेगा जो यहाँ कर रहे हैं | वैसे भी लोकतंत्र है कोई कुछ भी बन सकता है और कुछ भी कर सकता है.....?

" प्रयोजन अर्थात मुद्दा कहाँ से लाएँगे.....? "

राजू : -- मास्टर जी ! हमारे पास से ले लेंगे चिपको आन्दोलन रहा, अपना भूमि-अधिग्रहण रहा , पेड़- लगाओ -जंगल बचाओ रहा, उपज उगाओ-खेत बचाओ रहा निर्मल नदी आंदोलन रहा,  कहता ये संविधान-सबका जीवन एक समान, भारतीय को अधिकार - प्रवासी बहार रहा घिसेपिटे मुद्दे और भी बहुंत से हैं आरक्षण संरक्षण  निर्धनता और वो टेक्स वाला वो तो बड़ा धासूँ मुद्दा है वेस्ट इण्डिया कंपनी के शासक वाला , अरे मंदिर भी वो नहीं बना रहे हैं तो ये बना दें ले चलें अयोध्या एक बस कौंन रोकेगा.....?

संत महंत.....?
           


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