मंगलवार, 28 जुलाई 2015

----- मिनिस्टर राजू १७३ -----

राजू : --मास्टर जी ! मास्टर जी !! वो तो मर के इधरिच आ रहे हैं...,"

" उनको बोल इधर खोली खाली नहीं है, परली वाली गली में जाके भूँके।।,

राजू : -- किन्तु मास्टर जी वो तो  टर्र्र्र्र्र्र्र्ररर टर्र्र्र्र्र्र्र्ररर कर रहे  हैं

"  तो इधर नाले भी किधर खाली है उनको  मजनू का टिला वाले  गटर का पता दे दे..... 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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