राजू ! काल भगवान सपणों में आए थे..,
राजू : -- तो मास्टर जी!
"तो क्या, कहने लगे " एक पत्थर की तक़दीर संवर सकती है सरत ये ही कि सलीके से तरासा जाए "
मैं मन में सोचो पत्थर के गोले ये बणाए ठीक मैं करूँ, फिर सोचा भगवान है उलटी-सीधी नहीं बोलनी चाहिए और सोच समझ के बोल्यो : -- पहले ये जो गोली बणा रक्खी है उसे तो तरास लूँ.....
राजू : -- तो मास्टर जी!
"तो क्या, कहने लगे " एक पत्थर की तक़दीर संवर सकती है सरत ये ही कि सलीके से तरासा जाए "
मैं मन में सोचो पत्थर के गोले ये बणाए ठीक मैं करूँ, फिर सोचा भगवान है उलटी-सीधी नहीं बोलनी चाहिए और सोच समझ के बोल्यो : -- पहले ये जो गोली बणा रक्खी है उसे तो तरास लूँ.....
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