सदन मंडपु मंडन किए, रचए नेम अनुबंध ।
बंधनु किन्ह बाँधिये, न्याय अहँ न प्रबंध ।२२८१।
भावार्थ : -- मंडप मंडन करके सदन नेम नियम तो भतेरे रच रहा है रचे जा रहा है । पण एक बात बताओ फांसी कीन्ह चढ़ाओगे यहाँ न्याय है न शासन -प्रबंध ।
]
>> कल महा कोरट एक पेपर वाला त कह रिया था भई आतंकवादी के नाम त के लेना.... घायल ठीक होणे चाहिए.....सरकारी हस्पताल मैं..... पहले इस हस्पताल न तो ठीक कर ले.....
जहँ सिँहासन तहँ सासन मैं के करे प्रलाप ।
जहँ पद पदबि तहँ पदानुग आपद तहँ हम आप ।२२८२ ।
भावार्थ : -- जहाँ सिंहासन होगा शासन वहीँ होगा जो मैं मैं का अनर्गल प्रलाप भी करेगा जहाँ पद होगा पदवी होगी वहां इनके अनुयायी होंगे जहाँ आपदा होगी वहां हम और आप ही होंगे ये नहीं होंगे ॥ क्यों होंगे मत दान के कारण ॥
अगजग जुगति जुगत करे, जोगे जगत समाज ।
कुल दस सदस सदन रचे, कहि ए लोक के राज ।२२८३ ।
भावार्थ : -- जगत भर की युक्तियों को युक्त कर जगत भर के समाज को जोड़ कर कहते हैं यह लोकतंत्र है ये लोक तंत्र नहीं है परलोकतंत्र है ॥
सम्प्रदाय किसे कहते हैं ?समाज किसे कहेंगे ? अथवा किसी राष्ट्र के अंतर्गत समाज की परिभाषा में कौन आते हैं.....?
बंधनु किन्ह बाँधिये, न्याय अहँ न प्रबंध ।२२८१।
भावार्थ : -- मंडप मंडन करके सदन नेम नियम तो भतेरे रच रहा है रचे जा रहा है । पण एक बात बताओ फांसी कीन्ह चढ़ाओगे यहाँ न्याय है न शासन -प्रबंध ।
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>> कल महा कोरट एक पेपर वाला त कह रिया था भई आतंकवादी के नाम त के लेना.... घायल ठीक होणे चाहिए.....सरकारी हस्पताल मैं..... पहले इस हस्पताल न तो ठीक कर ले.....
जहँ सिँहासन तहँ सासन मैं के करे प्रलाप ।
जहँ पद पदबि तहँ पदानुग आपद तहँ हम आप ।२२८२ ।
भावार्थ : -- जहाँ सिंहासन होगा शासन वहीँ होगा जो मैं मैं का अनर्गल प्रलाप भी करेगा जहाँ पद होगा पदवी होगी वहां इनके अनुयायी होंगे जहाँ आपदा होगी वहां हम और आप ही होंगे ये नहीं होंगे ॥ क्यों होंगे मत दान के कारण ॥
अगजग जुगति जुगत करे, जोगे जगत समाज ।
कुल दस सदस सदन रचे, कहि ए लोक के राज ।२२८३ ।
भावार्थ : -- जगत भर की युक्तियों को युक्त कर जगत भर के समाज को जोड़ कर कहते हैं यह लोकतंत्र है ये लोक तंत्र नहीं है परलोकतंत्र है ॥
सम्प्रदाय किसे कहते हैं ?समाज किसे कहेंगे ? अथवा किसी राष्ट्र के अंतर्गत समाज की परिभाषा में कौन आते हैं.....?
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