गुरुवार, 4 दिसंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १५४ -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये संसद भवन भी न.....सिंधु घाटी की सभ्यता लगता है..,

" कैसे "

राजू : -- मास्टर जी ! देखो न इसके भी खिड़की- दरवाज़े पिछवाड़े की ओर खुलते हैं.....


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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...