सोमवार, 29 दिसंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १५८ -----

राजू ! ये बता इस आत्महत्या की जात क्या है..,

राजू : -- मास्टर जी ! मुझे क्या पता मैं विधि का विद्यार्थी थोड़े न हूँ..,

" संविधान लागू हुवे पैसठ बरस हो गए ये सत्तर बार जात बदल चुकी है कभी ये पाप हो जाती है कभी पुण्य हो जाती है एक बार तो लिखते लिखते हो गई थी..,

राजू : -- मास्टर जी ! फिर का हुवा

" फिर का  होना था किताबी कीड़े अटक गए साठ प्रतिसत से नीचे वाले निकल लिए.....

राजू : -- मास्टर जी ! आप तो निकले हुवे महादेव निकले.....

" अब ये बता खाली बैठा बनिया क्या करता है..?

राजू : -- मास्टर जी ! इदर के बर्तन उदर करता है..?
" अच्छा ! जो बणा हुवा बणिया खाली हो तो.."

राजू : -- मास्टर जी ! इदर के बर्तन इदर और उदर के उदर करता है.....

1 टिप्पणी:

  1. हाँ यही तो हो रहा है वर्षों से...शंशोधन फिर पुनर्वर्ती कानून पास...अद्भुत है हमारा तंत्र भी।

    जवाब देंहटाएं

----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...