शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १५७ -----

राजू ! शासकों ने घूस घपलों घोटालों को 'दवा- दारू' बणा दिया

राजू :-- वो कैसे मास्टर जी ?

 "जहाँ भी जाता हूँ लोग कहते हैं ये क्या हाल बणा रखा है कुछ लेते क्यूँ नहीं....."

एक बात बता जो संसद छबि गृह है जहां पहले 'जिस देस में गंगा बहती है" दिखाई गई यदि  मध्यांतर में गंगा मैली दिखाई जाएगी ( भई सूटिंग चल री है न ) तो अंत में क्या दिखेगा..?

राजू : -- मास्टर जी ! "आ अब लौट चले"

"हाआआआआ तेरा सनीमा ज्ञान तो बहूँत है.....' 

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