शनिवार, 8 नवंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १४८ -----

राजू : -- मास्टर जी ! ये भ्रष्टाचार भी अब तो सर्वत्र व्याप्त हो गया है आगे भी, पीछे भी, नीचे भी और ऊपर भी..,

" वो कैसे ? " 

राजू : -- मास्टर जी ! वो ऐसे कि हम सौ नेता ऊपर भेजते हैं पहुँचते दस पंद्रह ही है वो देखिए कोई खाट में पड़ा है, कोई घाट में पड़ा है,  कोई बाट में खड़ा है.....  

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...