शुक्रवार, 7 नवंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १४७ -----

" यहाँ सम्बन्ध तोड़े व् जोड़े जाते हैं.., "

राजू : - मास्टर जी ! क्या खोल रहे हो..?

" दूकान "

राजू : - ओह ! मुझे लगा की कचहरी खोल रहे हो.....

" एक ही है.....भई जहां जो नहीं होगा वही तो खुलेगा.....वैसे भी झगड़े निपटाना जुलम तो है नहीं.....

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