राजू : -- मास्टर जी ! प्रधान सेवक चाय वाले कह रिया था कोई दो दो रूपए में बिकने वाली पुलिस पर 'धार्मिक गाथा' लिखो..,
" राजू उस चाय वाला नै चाय के धंधो का ही बेरा सै.....अठन्नी म बी कोणी बिक बा गाथा.....कबाड़ी बाला भी सूंग क गेर जाओगो.....उणा बोलिए किसी घटिया साहित्यकार न रतन- भूषण दे दे.....बिका वो घणिये लिख क धर देओगो.....
" राजू उस चाय वाला नै चाय के धंधो का ही बेरा सै.....अठन्नी म बी कोणी बिक बा गाथा.....कबाड़ी बाला भी सूंग क गेर जाओगो.....उणा बोलिए किसी घटिया साहित्यकार न रतन- भूषण दे दे.....बिका वो घणिये लिख क धर देओगो.....
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