सोमवार, 29 सितंबर 2014

----- मिनिस्टर राजू १४१ -----

राजू ! ऐसा करते हैं जमीं उसकी हड़प लेते हैं ग़ज़ल अपनी लिखते हैं कैसा रहेगा..?

राजू : -- मास्टर जी  ! बढ़िया !

 " ऐसा करते हैं दो कदम आगे बढ़ते हैं उसके तख्खलुस पर भी हक़ तलफ़ कर लेते है ये कैसा रहेगा..?

राजू : -- बहुंत बढ़िया ! किन्तु मास्टर जी ! यदि हम दो कदम पीछे हट जाएं तो अपनी जमीं पर पहुँच जाएंगे.....


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