राजू ! ऐसा करते हैं जमीं उसकी हड़प लेते हैं ग़ज़ल अपनी लिखते हैं कैसा रहेगा..?
राजू : -- मास्टर जी ! बढ़िया !
" ऐसा करते हैं दो कदम आगे बढ़ते हैं उसके तख्खलुस पर भी हक़ तलफ़ कर लेते है ये कैसा रहेगा..?
राजू : -- बहुंत बढ़िया ! किन्तु मास्टर जी ! यदि हम दो कदम पीछे हट जाएं तो अपनी जमीं पर पहुँच जाएंगे.....
राजू : -- मास्टर जी ! बढ़िया !
" ऐसा करते हैं दो कदम आगे बढ़ते हैं उसके तख्खलुस पर भी हक़ तलफ़ कर लेते है ये कैसा रहेगा..?
राजू : -- बहुंत बढ़िया ! किन्तु मास्टर जी ! यदि हम दो कदम पीछे हट जाएं तो अपनी जमीं पर पहुँच जाएंगे.....
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