राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !! जापान के समर्थक आपसे रुष्ट हो गए हैं.....कह रहे थे कि आपने उसके भाग्य में 'भूकम्प' 'बाड़' 'जलजला' एवं 'सूखा' काहे लिख दिया..,
लै बित्ता भर का देश और गज भर लम्बे परमाणु बम-उपक्रम.....जब वे सारे रुख़ों को मुंड देंगे तो का 'जंगल बुक' लिखेंगे.....पर्बतों को चुंड देंगे तो का 'गीत गया पत्थरों ने' लिखेंगे.....खेतन को खोद खोद के हवाई अड्डा बनाएंगे, तो का 'हरियाली और रास्ता' लिखेंगे.....नदियों को सुखा दिए फिर का 'नदिया के पार' लिखंगे.....बात करते हैं.....
लै बित्ता भर का देश और गज भर लम्बे परमाणु बम-उपक्रम.....जब वे सारे रुख़ों को मुंड देंगे तो का 'जंगल बुक' लिखेंगे.....पर्बतों को चुंड देंगे तो का 'गीत गया पत्थरों ने' लिखेंगे.....खेतन को खोद खोद के हवाई अड्डा बनाएंगे, तो का 'हरियाली और रास्ता' लिखेंगे.....नदियों को सुखा दिए फिर का 'नदिया के पार' लिखंगे.....बात करते हैं.....
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