" राजू ! वो भी क्या दिन थे जब एक 'उठ' लिखते ही दो दो उठ जाते थे, 'बाड़' लिखते तो 'जलजला' आ जाता जाने कितने को उठा ले जाता "
राजू : --मास्टर जी ! और वो सुखा .... वो भी आप ही का लिखा हुवा लगता है, सुख के ऐसे पीछे पड़े की बेचारा पड़ते पड़ते रह गया वो तो आपको को भी.....
राजू : --मास्टर जी ! और वो सुखा .... वो भी आप ही का लिखा हुवा लगता है, सुख के ऐसे पीछे पड़े की बेचारा पड़ते पड़ते रह गया वो तो आपको को भी.....
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