रविवार, 20 अप्रैल 2014

----- ॥ दोहा-दशम १४४॥ -----

बाहर भू अरु भेस भरि भित बिपरीत अकास । 
तापर बिंग बचन कहत, करे जगत परिहास ।१४४१। 
भावार्थ : -- यदि बाहर की भूमि रूपी तन  ने कोई और भेष भरा होता है और अंतर  में कोई और आकाश होता है । यह संसार उसका परिहास कर उसपर व्यंग करता है । अत: अर्थात यदि आप सामान्य हैं कोई संत-फंत किसी गुरु के फूरु नई हैं कोई 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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