बाहर भू अरु भेस भरि भित बिपरीत अकास ।
तापर बिंग बचन कहत, करे जगत परिहास ।१४४१।
भावार्थ : -- यदि बाहर की भूमि रूपी तन ने कोई और भेष भरा होता है और अंतर में कोई और आकाश होता है । यह संसार उसका परिहास कर उसपर व्यंग करता है । अत: अर्थात यदि आप सामान्य हैं कोई संत-फंत किसी गुरु के फूरु नई हैं कोई
तापर बिंग बचन कहत, करे जगत परिहास ।१४४१।
भावार्थ : -- यदि बाहर की भूमि रूपी तन ने कोई और भेष भरा होता है और अंतर में कोई और आकाश होता है । यह संसार उसका परिहास कर उसपर व्यंग करता है । अत: अर्थात यदि आप सामान्य हैं कोई संत-फंत किसी गुरु के फूरु नई हैं कोई
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