मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

----- मिनिस्टर राजू १२७ -----

राजू : -- : (

" राजू ये कैसा मुँह बना रखा है हुवा क्या ? "

राजू : -- मास्टर जी! उसने मुझे मारा

" ओय ! किसने ?

राजू : --  मास्टर जी ! उसी पत्रकारिता ने जो झांसी की रानी भी नहीं है, मर्दानी भी नहीं है, फिर भी मर्द बनी फिर रही है, अब जो मर्द न उसे क्या कहेंगे, जो कहेंगे वही कह दिया

 "ओय अब तू माया और सत्ता को कुछ मन्या कह दियो, वो तेरे को फोड़ देंगी"  

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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