शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

----- मिनिस्टर राजू १२३ -----

राजू : -- मास्टर जी ! यो दिल्ली बाले जनार्दन के तिरया चरितर का बर्णन भी बर्णनातीत है..,

 'वो कैंयाँ'

राजू : -- मास्टर जी ! वो ऐयाँ कि बेसक ऐसी कि तैसी हो जाए, पण यो 'ऍसी-वैसी' रखणो कोणी छोडै.....भई जो है, जैसी है.....है तो.....कितणी महंगाई हैं, जैसी भी नहीं रही तो.....  

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...