राजू : -- मास्टर जी ! यो दिल्ली बाले जनार्दन के तिरया चरितर का बर्णन भी बर्णनातीत है..,
'वो कैंयाँ'
राजू : -- मास्टर जी ! वो ऐयाँ कि बेसक ऐसी कि तैसी हो जाए, पण यो 'ऍसी-वैसी' रखणो कोणी छोडै.....भई जो है, जैसी है.....है तो.....कितणी महंगाई हैं, जैसी भी नहीं रही तो.....
'वो कैंयाँ'
राजू : -- मास्टर जी ! वो ऐयाँ कि बेसक ऐसी कि तैसी हो जाए, पण यो 'ऍसी-वैसी' रखणो कोणी छोडै.....भई जो है, जैसी है.....है तो.....कितणी महंगाई हैं, जैसी भी नहीं रही तो.....
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