बुधवार, 29 जनवरी 2014

----- मिनिस्टर राजू १२१ -----

" राजू ! के पड रिया सै?

राजू : -- मास्टर जी ! एक ग्रन्थ पड रिया सूँ.....इस ग्रन्थ नै, एक महा रिसी मुनि हिमालय के सिखर पर चड के अतिसय जप तप जज्ञ करके लिखा सै"

" लै इसे इसे ग्रन्थ तो म्हारी गिरहनियाँ रोट्टी बणाते बणाते लिख दें.....वो बावली बूझ ( मूर्ख) जब सिखर पे चड ही गया था तो किम्मे ढंग का करता..... 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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