मंगलवार, 19 नवंबर 2013

----- मिनिस्टर राजू 115 -----

" राजू ! आज तू मुझे ये बता, कि यदि ये इक्यालिस,बयालीस, तिरालिस भारत के रतन हैं  तो वे महा आत्मा गांधी क्या थे 'पत्थर?'

राजू : -- अरे नई रे ! मास्टर जी! ये भी पत्थर हैं और वे भी पत्थर हैं । अंतर ये है कि वे  बिड़ला हाउस के हैं, ये टाटा हाउस के हैं

" अच्छा ! अच्छा !! मैने तुम्हे कल पत्रकारिता प् निबंध लिख के लाने को बोला था चलो बोल के दिखाओ ?

राजू : -- जी मास्टर जी ! .....अब ये दल मैदान में उतरे.....कमल कमल कमल कमल.....पंजा पंजा पंजा पंजा.....झाड़ू..... बस आज के समाचार समाप्त हुवे.....मास्टर जी ! हो गई जर्नलिज्म.....

" मैंने तुझे निबंध लिख के लाने को बोला था कि हलाकू" 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

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