" राजू ! आज तू मुझे ये बता, कि यदि ये इक्यालिस,बयालीस, तिरालिस भारत के रतन हैं तो वे महा आत्मा गांधी क्या थे 'पत्थर?'
राजू : -- अरे नई रे ! मास्टर जी! ये भी पत्थर हैं और वे भी पत्थर हैं । अंतर ये है कि वे बिड़ला हाउस के हैं, ये टाटा हाउस के हैं
" अच्छा ! अच्छा !! मैने तुम्हे कल पत्रकारिता प् निबंध लिख के लाने को बोला था चलो बोल के दिखाओ ?
राजू : -- जी मास्टर जी ! .....अब ये दल मैदान में उतरे.....कमल कमल कमल कमल.....पंजा पंजा पंजा पंजा.....झाड़ू..... बस आज के समाचार समाप्त हुवे.....मास्टर जी ! हो गई जर्नलिज्म.....
" मैंने तुझे निबंध लिख के लाने को बोला था कि हलाकू"
राजू : -- अरे नई रे ! मास्टर जी! ये भी पत्थर हैं और वे भी पत्थर हैं । अंतर ये है कि वे बिड़ला हाउस के हैं, ये टाटा हाउस के हैं
" अच्छा ! अच्छा !! मैने तुम्हे कल पत्रकारिता प् निबंध लिख के लाने को बोला था चलो बोल के दिखाओ ?
राजू : -- जी मास्टर जी ! .....अब ये दल मैदान में उतरे.....कमल कमल कमल कमल.....पंजा पंजा पंजा पंजा.....झाड़ू..... बस आज के समाचार समाप्त हुवे.....मास्टर जी ! हो गई जर्नलिज्म.....
" मैंने तुझे निबंध लिख के लाने को बोला था कि हलाकू"
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