गुरुवार, 15 अगस्त 2013

----- मिनिस्टर राजू 102 .-----

राजू : -- मास्टर जी ! मास्टर जी !

" हाँ राजू ! हाँ राजू !"

राजू : -- मास्टर जी ! आप ने तो कल कहा था की खामोसी की मौसी मरेगी, वफ़ा का फूफा भी मरेगा ऐसा कब कहा था,

" राजू ! क्या है कि में कहना भूल गया था, ये सुनहरा अवसर है, एक के साथ एक नि:शुल्क है"

राजू : -- अच्छा ! अच्छा !!  मास्टर जी ! तनिक इ भी बताइए कि जब इ फूफा-मौसी मरते हैं, तो प्रशासन मदिरालय भयवश बंद कर देता है की शोकवश ?

" तुम का लगता है ?'

राजू : -- मास्टर जी ! हमको तो लगता है कि भयवश बंद करता होगा । सोचता होगा, कहीं मरनी के आरोप में हम निलंबित न हो जाएँ.....

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