बुधवार, 14 अगस्त 2013

----- मिनिस्टर राजू 101 -----

राजू : -- मास्टर जी ! आप इ साड़ियाँ क्यूँ कट्ठी कर रहे हो ??

" राजू ! कल फिर वजीरे-आजम की ख़ामोशी की मौसी मरने वाली है"

राजू : -- हाँ तो, मास्टर जी !

" राजू ! हा तो का,  कल फिर जाने केतने प्रश्नों का चीर हरन होएगा "

राजू : -- हाँ तो उनकी मैया ने नाम रखा है ना 'मोहन'….. लाज बचाने के लिए ही तो रखा है न मास्टर जी ! 

"राजू ! उ तो आँखी के अंधे औउर नाम नयन सुख हैं, इ सामान्य जनता ही जनार्दन है, इ ही लाज बचाती आई है और इ ही बचाती रहेगी"

राजू : -- मास्टर जी ! हम तो कहते हैं कल उ मौसी न ही मरे तो अच्छा है.....पड़ोसी देखते हैं तो बहुंत लाज आती है.....

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