राजू : - मास्टर जी ! भाई न माँडा(मंच) तो घणो चोखो रच दियो ।इब म्हाणे थे नु बताओ की भाई पूँची(राखी) बँधाण आओगो की भैणजी नु भिजवाणी पड़ोगी ?
" क्यूँ ! थैणे के ऊँ का दुआरि प सोण मांड्न्यणों है"
" क्यूँ ! थैणे के ऊँ का दुआरि प सोण मांड्न्यणों है"
सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१|| :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...
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