शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

----- मिनिस्टर राजू 100 -----

राजू : - मास्टर जी ! भाई न माँडा(मंच) तो घणो चोखो रच दियो ।इब म्हाणे थे नु बताओ की भाई पूँची(राखी) बँधाण आओगो की भैणजी नु भिजवाणी पड़ोगी ?

" क्यूँ ! थैणे के ऊँ का दुआरि प सोण मांड्न्यणों है"

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...