बुधवार, 31 जुलाई 2013

----- मिनिस्टर राजू ९९ -----

राजू : -- मास्टर जी !

'हाँ! बोलो

राजू : -- मास्टर जी! मस्जिद बनाने की जिद उसी को है, पुल भी उही बनाएगा, टेम्पुल भी उही बनाएगा.....
और मदिरालय में अश्लील नृत्यों का मंच भी उहिच्च बनाएगा.....तनिक इ तो बताइये ये सर्बोच्च नियायालय है की कोन्हों ठिकादार.....?

' राजू ! तू पहले न्यायालय को ठीक से लिखना सीख.....हाँ अब सुन.…उ का है की हमारे देश के लोगन की मानसिकता कुछ इस प्रकार की है, कि प्रत्येक गांधी ये समझते हैं की हम ही महात्मा है प्रत्येक दास समझते हैं की हम ही मालिक हैं और मोहन तो पता नहीं अपने आप को क्या क्या नहीं समझते.....प्रधान मंत्री तक समझते है.....सर्वोच्च न्यायालय तो यह समझते हैं की हम ही सब कुछ जानते हैं.…। 

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----- ॥ दोहा-दशम 363॥ -----,

सभा सदस बैठे रचे आपहि नेम विधान  तोड़ करे पुनि आपही न्याय का अवमान ॥१||  :-- देश के सांसद स्वयं नियम विधानों की रचना करते हैं तत्पश्चात स्वय...