" राजू ! का लिख रहे हो ? "
राजू : -- मास्टर जी ! नाटक लिख रहा हूँ नाटक
" अच्छा ! का नाम है नाटक का ? "
राजू : -- मास्टर जी ! " डाकू फ़ूल्लन देबी"
" ओह! ओह ! का का लिख चुके हो "
राजू : -- अभी तो मध्यांतर लिख दिया हूँ.....एक ठो ज़मज़मा "सैट" कर रहा हूँ
फूल उधर से खिला.....हाथ इधर से निकला.....सूरज उधर डूबा.....चाँद इधर निकला
मास्टर जी ! आप भी पढेंगे ?
" हाँ ! हाँ ! ( पढ़ने के बाद ) ओह ! ओह ! जब मध्यांतर इतना डिरावना है तो किलाइमेक्स
केतना डिरावना होगा?
राजू : - मास्टर जी ! पिछले किलाइमेक्स में फाटक बंद हुवे थे.....अब तो पूरा गढ़ ही बंद हो जाएगा.....
राजू : -- मास्टर जी ! नाटक लिख रहा हूँ नाटक
" अच्छा ! का नाम है नाटक का ? "
राजू : -- मास्टर जी ! " डाकू फ़ूल्लन देबी"
" ओह! ओह ! का का लिख चुके हो "
राजू : -- अभी तो मध्यांतर लिख दिया हूँ.....एक ठो ज़मज़मा "सैट" कर रहा हूँ
फूल उधर से खिला.....हाथ इधर से निकला.....सूरज उधर डूबा.....चाँद इधर निकला
मास्टर जी ! आप भी पढेंगे ?
" हाँ ! हाँ ! ( पढ़ने के बाद ) ओह ! ओह ! जब मध्यांतर इतना डिरावना है तो किलाइमेक्स
केतना डिरावना होगा?
राजू : - मास्टर जी ! पिछले किलाइमेक्स में फाटक बंद हुवे थे.....अब तो पूरा गढ़ ही बंद हो जाएगा.....
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें