मंगलवार, 28 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ९ ४ -----

" राजू ! का लिख रहे हो ? "

राजू : -- मास्टर जी ! नाटक लिख रहा हूँ नाटक

" अच्छा ! का नाम है नाटक का ? "

राजू : -- मास्टर जी ! " डाकू फ़ूल्लन देबी"

" ओह! ओह ! का का लिख चुके हो "

राजू : -- अभी तो मध्यांतर लिख दिया हूँ.....एक ठो ज़मज़मा "सैट" कर रहा हूँ   
             फूल उधर से खिला.....हाथ इधर से निकला.....सूरज उधर डूबा.....चाँद इधर निकला
             मास्टर जी ! आप भी पढेंगे ?

" हाँ ! हाँ ! ( पढ़ने के बाद ) ओह ! ओह ! जब मध्यांतर इतना डिरावना है तो किलाइमेक्स
 केतना डिरावना होगा?

राजू : - मास्टर जी ! पिछले किलाइमेक्स में फाटक बंद हुवे थे.....अब तो पूरा गढ़ ही बंद हो जाएगा.....

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