राजू: -- मास्टर जी ! कल ये दिल्ली की पुलिस, किस नाटक के फाटक
को कौन से निबन्ध से बंद कर रही थी ?
" राजू ! राजू! दिल्ली की पुलिस कहाँ साहित्य कार है ये नाटक-निबन्ध लिखना थोड़े ही जानती है
ये तो मुलाजमत-नामा माने की सेवा-पुस्तिका लिखती है.....कल इसने उस किताब में एक
'ज़मज़मा' माने की गीत लिख दिया..,
राजू : -- मुलाजमत-नामा में..... 'ज़मज़मा'..... मास्टर जी ! फिर का हुवा ?
" फिर.....फिर का होना है मुलाजमत-नामा हीट हो गया"
राजू :-- मास्टर जी ! फिर तो हमारी सरकार इन्हें नामो-एहतराम से नवाजना चाहिए
कोई पुरस्कार-परितोष का उद्घोष करना चाहिए ?
" राजू ! तू जितना छोटा है उतनी ही छोटी बात भी करता है.....सरकार इनके नाम से पुरूस्कार की उद्घोषणा करेगी जैसे कि....."पुलिस रत्न"
राजू : -- मास्टर जी ! "पुलिस रत्न" के फले भी तो कुछ लगना चाहिए..,
" उसके लिए समाचार पत्रों को एक एक पृष्ठ का विज्ञापन दिया है, और बिजली से चलने वाले समाचार संसाधनों को आधे आधे घंटे के विज्ञापन दी हैं
राजू : -- मास्टर जी ! ये महामात्य की "बर्तनी' अभी तक नहीं सुधरी है.....भारत निर्माण कहते हैं तो
भारत निर्वाण लगता है.....
को कौन से निबन्ध से बंद कर रही थी ?
" राजू ! राजू! दिल्ली की पुलिस कहाँ साहित्य कार है ये नाटक-निबन्ध लिखना थोड़े ही जानती है
ये तो मुलाजमत-नामा माने की सेवा-पुस्तिका लिखती है.....कल इसने उस किताब में एक
'ज़मज़मा' माने की गीत लिख दिया..,
राजू : -- मुलाजमत-नामा में..... 'ज़मज़मा'..... मास्टर जी ! फिर का हुवा ?
" फिर.....फिर का होना है मुलाजमत-नामा हीट हो गया"
राजू :-- मास्टर जी ! फिर तो हमारी सरकार इन्हें नामो-एहतराम से नवाजना चाहिए
कोई पुरस्कार-परितोष का उद्घोष करना चाहिए ?
" राजू ! तू जितना छोटा है उतनी ही छोटी बात भी करता है.....सरकार इनके नाम से पुरूस्कार की उद्घोषणा करेगी जैसे कि....."पुलिस रत्न"
राजू : -- मास्टर जी ! "पुलिस रत्न" के फले भी तो कुछ लगना चाहिए..,
" उसके लिए समाचार पत्रों को एक एक पृष्ठ का विज्ञापन दिया है, और बिजली से चलने वाले समाचार संसाधनों को आधे आधे घंटे के विज्ञापन दी हैं
राजू : -- मास्टर जी ! ये महामात्य की "बर्तनी' अभी तक नहीं सुधरी है.....भारत निर्माण कहते हैं तो
भारत निर्वाण लगता है.....
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