राजू : -- मास्टर जी !
बालपन भोले गया, और जुआ महमंत ।
बृद्धपने आलस गयो चला जरन्ते अंत ॥
----- ॥ कबीर ॥ -----
तीन बरस गए भूल मैं, तीन जुआ में हार ।
तीन गई सोवति अब चली जरन सरकार ॥
अर्थात : - तीन वर्ष खेलने खाने में बिता दी, तीन वर्ष युवा के विलास में बिता दी
तीन वृद्ध वस्था प्राप्त कर सोती रही अब सरकार तन फूंकने चली ॥
" राजू ! राजू ! अब ई का है ??"
राजू : -- मास्टर जी ! सरकार ने अर्थात पक्ष ने नरसों, अपने कार्यकाल के निबन्ध का जो
उपसंहार लिखना चालु किया था, हमने उसपर दोहा लिख दिया..,
" अच्छा ! तो विपक्ष क्या लिख रही थी?"
राजू : -- मास्टर जी ! विपक्ष को निबन्ध लिखना कहाँ आता है, यदि आता तो वो अपना संविधान
न लिख लेती विपक्ष का लिखा काहे फाल्लो करती अवसर बार बार थोड़ी न मिलता है.....
वो तो 'नाटक' लिखती है नाटक,
" आह! इतना डरावना किलाइमेक्स..... राजू ! महात्मा गांधी ने कहा है: -- "डरना और डराना दोनों पाप है"
एक बात समझ नहीं आई ये पक्ष, विपक्ष के किलाइमेक्स में अपनी फोटो काहे देख रही है.....
बालपन भोले गया, और जुआ महमंत ।
बृद्धपने आलस गयो चला जरन्ते अंत ॥
----- ॥ कबीर ॥ -----
तीन बरस गए भूल मैं, तीन जुआ में हार ।
तीन गई सोवति अब चली जरन सरकार ॥
अर्थात : - तीन वर्ष खेलने खाने में बिता दी, तीन वर्ष युवा के विलास में बिता दी
तीन वृद्ध वस्था प्राप्त कर सोती रही अब सरकार तन फूंकने चली ॥
" राजू ! राजू ! अब ई का है ??"
राजू : -- मास्टर जी ! सरकार ने अर्थात पक्ष ने नरसों, अपने कार्यकाल के निबन्ध का जो
उपसंहार लिखना चालु किया था, हमने उसपर दोहा लिख दिया..,
" अच्छा ! तो विपक्ष क्या लिख रही थी?"
राजू : -- मास्टर जी ! विपक्ष को निबन्ध लिखना कहाँ आता है, यदि आता तो वो अपना संविधान
न लिख लेती विपक्ष का लिखा काहे फाल्लो करती अवसर बार बार थोड़ी न मिलता है.....
वो तो 'नाटक' लिखती है नाटक,
" आह! इतना डरावना किलाइमेक्स..... राजू ! महात्मा गांधी ने कहा है: -- "डरना और डराना दोनों पाप है"
एक बात समझ नहीं आई ये पक्ष, विपक्ष के किलाइमेक्स में अपनी फोटो काहे देख रही है.....
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