सोमवार, 13 मई 2013

----- मिनिस्टर राजू ८ ९ -----

राजू : -- मास्टर जी !
                               बालपन भोले गया, और जुआ महमंत । 
                               बृद्धपने आलस गयो चला जरन्ते अंत ॥ 
                                    ----- ॥ कबीर ॥ -----

                              तीन बरस गए भूल मैं, तीन जुआ में हार । 
                              तीन गई सोवति अब चली जरन सरकार ॥ 
                              
                              अर्थात : - तीन वर्ष खेलने खाने में बिता दी, तीन वर्ष युवा के विलास में बिता दी 
                              तीन वृद्ध वस्था प्राप्त कर सोती रही अब सरकार तन फूंकने चली ॥ 

" राजू ! राजू ! अब ई का है ??"

राजू : -- मास्टर जी ! सरकार ने अर्थात पक्ष ने नरसों, अपने कार्यकाल के निबन्ध का जो
              उपसंहार लिखना चालु किया था, हमने उसपर दोहा लिख दिया..,

" अच्छा ! तो विपक्ष क्या लिख रही थी?"

राजू : -- मास्टर जी ! विपक्ष को निबन्ध लिखना कहाँ आता है, यदि आता तो वो अपना संविधान
             न लिख लेती विपक्ष का लिखा काहे फाल्लो करती अवसर बार बार थोड़ी न मिलता है.....
             वो तो 'नाटक' लिखती है नाटक,

" आह! इतना डरावना किलाइमेक्स..... राजू ! महात्मा गांधी ने कहा है: -- "डरना और डराना दोनों पाप है"
   एक बात समझ नहीं आई ये पक्ष, विपक्ष के किलाइमेक्स में अपनी फोटो काहे देख रही है.....









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