राजू : -- " राजनीति के सिद्धांत में राष्ट्र की रक्षा सभी उपायों से करने के आदेश हैं,
इसलिए राजा,राजकुमार, औए अमात्य सबका विसर्जन किया जा सकता है....."
----- ।। जय शंकर प्रसाद ।। -----
मास्टर जी ! इस सूक्ति का अर्थ समझाइये नाँ.....
" परसों किया था न दो अमात्यों का बिसर्जन अब महामात्य का बिसर्जन बाकी है"
राजू : -- किन्तु मास्टर जी ! आपने तो सर्जन करने कहा था बिसर्जन करने को थोड़े न कहा
था ..,
" राजू! राजू! तू ज्यादा बोल के मुझे डरा मत नहीं तो बछुआ के पेट में मरोड़ उठेगी न
तो वह अपनी बेसुरी आव़ाज से बे-उनबानी तकरीर पड़ना शुरू कर देगा, उसकी
बेसुरी तकरीरों से तो पड़ोसीयों के भी बैरक उखड़ गए फिर मेरी तो बिसात ही क्या
है.....
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