सोमवार, 15 अप्रैल 2013

----- मीस्टर राजू ८ ६ -----

"  राजू ! थे काल मदरसा कु कोणी आयो ?? "

राजू : -- मास्टर जी ! म काल साहित्य की छोरी कविता को ब्याह मंड्वाण गयो थो ।

" किस क सागो ?? "

राजू :-- मास्टर जी ! कला को पोतो सुर साग ।

" ओह ! संगीत को छोरो साग..... मंड्ग्यो??"

राजू : -- घणो चोखो मंड्ग्यो.....मास्टर जी । इब थे बताओ थे काल कू कोणी आयो ??

" म सुर ओर कविता क टाबरियां को नामकरण करन गयो थो"

राजू : -- मास्टर जी ! कुण कुण सो नाम ??

" गज़ल और गीत "

राजू : -- मास्टर जी ! फेर नाम धर दियो ??

" धरण त पैलइँ सुर को सालो निबन्ध, भाण न लेण आ ग्यो"

राजू : -- मास्टर जी ! म भी तो संस्कृति को पोतो और सभ्यता को पुत हूँ
              .................... गज़ालाआआ

" राजू ! राजू ! राजू ! म्हारो देस म बालका को ब्याह की रीति बंद होगी "

राजू : -- मास्टर जी ! म कद बड़ो होऊंगो??

" अपणी दादी त पूछ"

राजू : -- मास्टर जी !  कई दिणा होगो दादी आई कोणा ।

" आई कोणा तो बुला ले "

राजू : -- मास्टर जी ! कैंय्याँ ??

" जो पाछ को चुटकुलों म बुलायो थो वैंय्या.....









  


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