" राजू का हुआ आज तुम इत्ता हंस काहे रहे हो? "
राजू : -- मास्टर जी ! उ बछुआ कछु सर्जन तो करते अहि केवल उत्सर्जन करते रहते है
और जब महामात्य सहित उनके चेलों-चमचो से पूछो कि "कैसे गंधा रहा है ?"
तो उत्तर देते हैं "बहुँत मस्त".....
राजू : -- मास्टर जी ! उ बछुआ कछु सर्जन तो करते अहि केवल उत्सर्जन करते रहते है
और जब महामात्य सहित उनके चेलों-चमचो से पूछो कि "कैसे गंधा रहा है ?"
तो उत्तर देते हैं "बहुँत मस्त".....
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