शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

----- मिनिस्टर राजू ८ ४ -----

" राजू का हुआ आज तुम इत्ता हंस काहे रहे हो? "

राजू : -- मास्टर जी ! उ बछुआ कछु सर्जन तो करते अहि केवल उत्सर्जन करते रहते है
             और जब महामात्य सहित उनके चेलों-चमचो से पूछो कि "कैसे गंधा रहा है ?"
             तो उत्तर देते हैं "बहुँत मस्त".....

             

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