बुधवार, 27 मार्च 2013

----- मिनिस्टर राजू ८३ -----

राजू : -- मास्टर जी ! उ तिहाड़ कारागृह बालो की कमाई किती है ??

            " बहुत कोटि है, तुमको उनकी कमाई से का लेना ?? "

राजू : -- मास्टर जी ! हम तो कहते है की उ एक चलचित्र निरमान संस्थान की स्थापना काहे नहीं
             कर लेते ।  पात्र ईकाई के आतिथ्य का सौभाग्य उन्हें प्राप्त होने ही वाला है, माने की पूरी
             कास्टिंग यूनिट ही आन वाली है न । अब देखियो कैसे उस काल कोठारी के कोट कोट मा
             कोटि-कोटि की कोठी बनती है ।

           " किन्तु राजू ?? उ 'सायरी' को कहाँ से लायेंगे ??

राजू : -- अरे!  मास्टर जी ! तनिक छापा मार के तो देखें.....एक आध ठो तीर धनुसवा तो उ भी राखे
             होगें ।

             " ईईईईइ ससुरा ......इ कौन सी रासलीला है "

               नाम धनुधर धर कोउ औरे। धरे धनुर को औरन बौरे ॥ 
               सिया परे को और उकसाए  । तिर सर हिरन को और गिराए ॥ 
राजू : -- रास लीला नाहीं मास्टरजी ! राम.....लिल्ल्लाअह....."अलबेली रामलिल्ल्लाअह"
             और इ रामलीला मा उनके चुनावी दलों  के दलदल, चरित्र भूमिका में हैं

             किचित उनका चरित्र देखिये : --

             एक काम कलुषि असुरी साखा । काख छुरी मुख राम सलाका ॥ 
             दुज दीन दले दानव राखा । नाम स्याम अरु कंस मधु काखा ॥ 

             मास्टर जी ! हमारा तो मन करता है की हम राम रूपी आनंद के सागर में ही समा जाएँ







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