राजू : --मास्टर जी ! इ सरकार है की बइला-भैसा है, केतना भी बीन बजाओ
इ सुनने बाले नई..,
" राजू ! इ जाती हुई आत्मा हैं, और आत्मा को भी कोई धर सकता है का"
राजू -- मास्टर जी ! हमको तो इ भागते भूत लागत हैं हम तो लंगोटी धर लिए हैं..,
" राजू ! राजू ! तुम केतना भी लंगोटी धरो कोरट उसक प्रमाण मानेगा ही नहीं
उ तो भूतों को छोड़ने के लिए ही बैठे हैं ना अब इस अंधी कोरट को कौन
समझाए " हाथ कंगन को आरसी का".....
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