गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

----- मिनिस्टर राजू ८१ -----


राजू : --मास्टर जी ! इ सरकार है की बइला-भैसा है, केतना भी बीन बजाओ  
            इ सुनने बाले नई..,

           " राजू ! इ जाती हुई आत्मा हैं,  और आत्मा को भी कोई धर सकता है का"

राजू  -- मास्टर जी ! हमको तो इ भागते भूत लागत हैं हम तो लंगोटी धर लिए हैं..,  

           " राजू ! राजू ! तुम केतना भी लंगोटी धरो कोरट उसक प्रमाण मानेगा ही नहीं
              उ तो भूतों को छोड़ने के लिए ही बैठे हैं ना अब इस अंधी कोरट को कौन
             समझाए " हाथ कंगन को आरसी का".....


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