राजू : -- मास्टर जी ! तनिक इ तो बताइये की मस्जिद के खुलते ही, माने की
संसद सत्र सूरु होते ही उ आबरू के अब्बा की खामोसी की मौसी काहे
मर जाती है..,
" का है की उहाँ बाँग देना पड़ता है न माने की कोन्हु कछु पूछता है तो
बोलना-बतियाना पड़ता है..,
राजू : -- मास्टर जी ! उहाँ का पूछते हैं..??
" इही की अबकी घोटाला लाटरी का 'माल' कहाँ छुपाया "
राजू:-- लो उ तो खुदई 'मालामाल बिकली' हैं उ कौन हवाले से पूछेंगे
मास्टर जी एतना अभिनय तो अभिनय-साला में नहीं देखें है
संसद सत्र सूरु होते ही उ आबरू के अब्बा की खामोसी की मौसी काहे
मर जाती है..,
" का है की उहाँ बाँग देना पड़ता है न माने की कोन्हु कछु पूछता है तो
बोलना-बतियाना पड़ता है..,
राजू : -- मास्टर जी ! उहाँ का पूछते हैं..??
" इही की अबकी घोटाला लाटरी का 'माल' कहाँ छुपाया "
राजू:-- लो उ तो खुदई 'मालामाल बिकली' हैं उ कौन हवाले से पूछेंगे
मास्टर जी एतना अभिनय तो अभिनय-साला में नहीं देखें है
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