राजू -- मास्टर जी ! वो जो हमार मंतरी हैं...
" कौन से ?? घरवाले की घरवाली ??
राजू : -- मास्टर जीईई ! हमार देस मा घर के मंतरी घरवाली कहाँ होती है
घरवाले ही तो होते हैं..... तो हम कह रहे थे कि हमार घरबाले मंत्री
जो हैं उ मंतरी कम अउर 'दंड पासक' अर्थात 'जल्लाद' अधिक
लगते हैं तनिक इ तो बताइये उ जो नयन के नीचे मस्सा लगाए हैं
उ बास्तविक अर्थात ओरिजनल है की दृश्य में सजीवता दरसाने
के लिए यूँही स्वांग भरे हैं
" अब हम का बताएं राजू ! पहले तो हमको इनके इस " रौद्र रूप "
से ही भय लगता है अब इनकी इस रौद्र रस की कविता का
अनुप्रास अलंकार हमारे भय को और अधिक प्रबल कर देवत है
अजमल चल..,
अफजल चल..,
" ........" अब तू भी चल.....
" कौन से ?? घरवाले की घरवाली ??
राजू : -- मास्टर जीईई ! हमार देस मा घर के मंतरी घरवाली कहाँ होती है
घरवाले ही तो होते हैं..... तो हम कह रहे थे कि हमार घरबाले मंत्री
जो हैं उ मंतरी कम अउर 'दंड पासक' अर्थात 'जल्लाद' अधिक
लगते हैं तनिक इ तो बताइये उ जो नयन के नीचे मस्सा लगाए हैं
उ बास्तविक अर्थात ओरिजनल है की दृश्य में सजीवता दरसाने
के लिए यूँही स्वांग भरे हैं
" अब हम का बताएं राजू ! पहले तो हमको इनके इस " रौद्र रूप "
से ही भय लगता है अब इनकी इस रौद्र रस की कविता का
अनुप्रास अलंकार हमारे भय को और अधिक प्रबल कर देवत है
अजमल चल..,
अफजल चल..,
" ........" अब तू भी चल.....
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