राजू : -- मास्टर जी !
" हूँ "
राजू : -- हमारे सर्बोच्च न्यायालय के जज को तो 'बिरोध प्रदर्शन'
मा भारी रूचि है और बछुआ कहत है कि हमका तो जज
बनना है फिर समस्या का है मैय्या दिलवा काहे नहीं देती
.....खिलौना ही तो है..... उपाधि भी है.....अरे उ नाना जी
की..,
" राजू ! अब का कहें बछुआ भए दुव्वल और मैय्या है की अव्वल बने
बैठी हैं किती बारी कहा जा के चुल्हा चौका संभाले और बछुआ को
अव्वल बना कर गरम गरम रोटी खवाएं फिर उ काहे किसी के घर
घुस के खावेगा और सुतेगा और नहाएगा.....राजू ! जब दीपक
बुझता है न तो बुझने से पहिले बहुंत भरभराता है.....
" हूँ "
राजू : -- हमारे सर्बोच्च न्यायालय के जज को तो 'बिरोध प्रदर्शन'
मा भारी रूचि है और बछुआ कहत है कि हमका तो जज
बनना है फिर समस्या का है मैय्या दिलवा काहे नहीं देती
.....खिलौना ही तो है..... उपाधि भी है.....अरे उ नाना जी
की..,
" राजू ! अब का कहें बछुआ भए दुव्वल और मैय्या है की अव्वल बने
बैठी हैं किती बारी कहा जा के चुल्हा चौका संभाले और बछुआ को
अव्वल बना कर गरम गरम रोटी खवाएं फिर उ काहे किसी के घर
घुस के खावेगा और सुतेगा और नहाएगा.....राजू ! जब दीपक
बुझता है न तो बुझने से पहिले बहुंत भरभराता है.....
राजू बड़ा होशियार है ..काश राजू की बातें समझने वाले समझ पाते
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