राजू : -- ऐ मास्टर जी ! रामायण मा 'लछमन रेखा' अउर 'धोबी' का
बरनन तो सुने रहे इ नवा वाला 'मर्यादा रेखा' अउर 'मछुवारा'
किधर से आई गवा..??
" राजू ! एक राम चरित मानस तुलसी दास लिख के चल दिए
भक्ति रस मा.......इ 'मंदिर बाले' एक ठो नया लिखेंगे 'हास रस'
मा काहे कि इनका मंदिर भी बड़ा हास्यास्पद है जहाँ के भगवान
इ खुदेइ हैं अब साकेत मा लोगबाग राम के जन्म भूमि देखने
नाहीं जाते......हँसने जाते हैं.....
बरनन तो सुने रहे इ नवा वाला 'मर्यादा रेखा' अउर 'मछुवारा'
किधर से आई गवा..??
" राजू ! एक राम चरित मानस तुलसी दास लिख के चल दिए
भक्ति रस मा.......इ 'मंदिर बाले' एक ठो नया लिखेंगे 'हास रस'
मा काहे कि इनका मंदिर भी बड़ा हास्यास्पद है जहाँ के भगवान
इ खुदेइ हैं अब साकेत मा लोगबाग राम के जन्म भूमि देखने
नाहीं जाते......हँसने जाते हैं.....
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