शनिवार, 22 दिसंबर 2012

----- मिनिस्टर राजू 70 -----

राजू : -- ऐ मास्टर जी !

" हाँ, सुन रहा हूँ बोलो..,"

राजू : -- आप तो कहे रहीं की लोगन मन की भीड़ जुड़ाओ,
            जूड़ तो गई अब भी उ देखत,सुनत बोलत नाहीं हैं ..,

" हमने  केतना लोगन के भीड़ जोड़न को कहा..??

राजू : -- मास्टर जी ! लाख-पचास..,

" हाँ उहाँ जूड़ी कितनी..,
                        
राजू : -- दस-बीस हजार, ऐ मास्टर जी !

             हमरे 'राऊ' भी बड़े ही बिचित्र हैं
             अरु 'राऊ' रउधानी अपवित्र है
              इक मंत्री को कहत हैं : --
              तुम रतियन महुँ नगरिया जाओ
              चौंक डगरिया घूम के आओ
              तनि सीत  ऋतु के सोर लई के आओ
              अब आप ही बताओ
              एक तो पुरुस के गात तिसपर मंत्री जात
              अब कौनु का तो उसका 'लूटेगा' का उसको 'पिटेगा'
              थोथे चने  हैं बाजे घने हैं
              पहले से ही 'लुटे-पिटे' हैं तभी तो मंत्री बने हैं.....
   


             




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